प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रवि लामिछाने के साथ एक बैठक में नेपाल के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री मोदी और लामिछाने के बीच हुई बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और विदेश सचिव विक्रम मिसरी समेत कई अन्य लोग उपस्थित थे। X पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं साझा और समृद्ध भविष्य के लिए मिलकर काम करने की उनकी इच्छा का स्वागत करता हूं और पूरी तरह से उसका समर्थन करता हूं। नेपाल हमारी 'पड़ोसी पहले' नीति के तहत एक प्राथमिकता वाला साझेदार है और हम दोनों देशों के बीच विशेष और बहुआयामी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए नई सरकार के साथ सहयोग करने के लिए तत्पर हैं।
मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रबी लामिछाने के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच विशेष संबंधों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया। गृह मंत्री ने लामिछाने को चुनाव में आरएसपी की जीत पर बधाई दी और नई सरकार की सफलता के लिए भारत की शुभकामनाएं दीं। गृह मंत्री के कार्यालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि शाह ने नेपाल के आम चुनाव में आरएसपी की जीत पर लामिछाने को बधाई दी और पड़ोसी देश में नयी सरकार की सफलता के लिए भारत की ओर से शुभकामनाएं दीं। पोस्ट में कहा गया है, ‘‘दोनों पक्षों ने भारत और नेपाल के बीच विशेष संबंधों को मजबूत करने के लिए साथ मिलकर काम करने का दृढ़ संकल्प जताया।’’
लामिछाने के नेतृत्व में आरएसपी प्रतिनिधिमंडल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन के निमंत्रण पर भारत दौरे पर है। नितिन नवीन ने मंगलवार को कहा कि भाजपा और नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के बीच दलीय स्तर पर संबंधों को और मजबूत करने को लेकर ‘सार्थक चर्चा’ हुई। नवीन ने यह टिप्पणी आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडलके साथ मंगलवार को यहां भाजपा के मुख्यालय में हुई मुलाकात के बाद की। प्रतिनिधिमंडल के आगमन पर भाजपा मुख्यालय में उनका भव्य स्वागत किया गया। नवीन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भाजपा को जानो पहल के तहत, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) नेपाल के अध्यक्ष रवि लामिछाने और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल का भाजपा मुख्यालय में स्वागत करना और उनसे बातचीत करना मेरे लिए खुशी की बात है।
उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसपी के बीच दलीय स्तर पर संबंधों को और मजबूत करने को लेकर ‘सार्थक चर्चा’ हुई। नवीन ने कहा कि इस बात पर भी व्यापक चर्चा हुई कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा का शासन मॉडल विकास और जनसेवा पर केंद्रित है। लामिछाने के नेतृत्व में आरएसपी का यह प्रतिनिधिमंडल भाजपा अध्यक्ष नवीन के निमंत्रण पर भारत के दौरे पर है। यह प्रतिनिधिमंडल सोमवार दोपहर को नयी दिल्ली पहुंचा। भाजपा के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने एक बयान में कहा, प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए, नवीन ने साझा सभ्यतागत विरासत, सांस्कृतिक संबंधों और मजबूत जन-केंद्रित संबंधों पर आधारित भारत और नेपाल के बीच घनिष्ठ और ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जून को भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, जो स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगे। मोदी, जिन्होंने 26 मई, 2014 को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी, 10 जून को लगातार 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा करेंगे। यह नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगा, जो भारत के पहले आम चुनाव के बाद 13 मई, 1952 को शपथ लेने से लेकर 27 मई, 1964 को उनकी मृत्यु तक चला था।
यह उपलब्धि मोदी के राजनीतिक करियर में एक और मील का पत्थर है। उन्होंने 25 जुलाई, 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सबसे लंबे निर्बाध कार्यकाल को पहले ही पीछे छोड़ दिया था। गांधी ने 24 जनवरी, 1966 से 24 मार्च, 1977 तक लगातार 4,077 दिनों तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था। यह रिकॉर्ड भारत के नाटकीय रूप से परिवर्तित होने की पृष्ठभूमि में सामने आया है।
स्वतंत्रता के बाद शुरुआती वर्षों में जब नेहरू ने देश का नेतृत्व किया, तब भारत की जनसंख्या लगभग 34 करोड़ थी। 2014 में मोदी के सत्ता संभालने तक जनसंख्या 131 करोड़ से अधिक हो चुकी थी और तब से बढ़कर 146 करोड़ से भी अधिक हो गई है। भारत के लोकतंत्र का दायरा भी दशकों में काफी बढ़ गया है। जहां 1951-52 में देश के पहले आम चुनाव में 53 राजनीतिक दलों ने चुनाव लड़ा था, वहीं 2014 में यह संख्या बढ़कर 464 हो गई और 2024 के लोकसभा चुनावों में 744 तक पहुंच गई। पहले आम चुनाव के समय मतदाताओं की संख्या लगभग 17 करोड़ थी, जो 2014 तक बढ़कर 83 करोड़ से अधिक हो गई थी।
दोनों युगों की राजनीतिक परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं। नेहरू के शासनकाल में कांग्रेस का वर्चस्व था, और 1952 के चुनावों में पार्टी ने 489 लोकसभा सीटों में से 364 सीटें जीती थीं। इसके विपरीत, मोदी ने कहीं अधिक खंडित और प्रतिस्पर्धी राजनीतिक वातावरण में शासन किया है, जिसमें मजबूत क्षेत्रीय दल और राज्यों में गठबंधन की गतिशीलता हावी है। मोदी पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने लगातार दो पूर्ण बहुमत कार्यकाल पूरे किए हैं और नेहरू के बाद पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीते हैं।
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