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Shaurya Path: आकाश पर राज करेगी Indian Air Force, South Asia में ताकत के सारे समीकरण बदलकर रख देंगे 114 Rafale Jets

भारत ने एक बार फिर चीन और पाकिस्तान को साफ चेतावनी दे दी है कि अब नया भारत सिर्फ जवाब नहीं देता, बल्कि दुश्मन की रणनीति को जड़ से तोड़ने की ताकत रखता है। हम आपको बता दें कि भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल युद्धक विमानों की खरीद का फैसला दक्षिण एशिया में ताकत का पूरा समीकरण बदलने वाली चाल है। करीब तीन लाख पच्चीस हजार करोड़ रुपये के इस महा समझौते ने बीजिंग और इस्लामाबाद दोनों की नींद उड़ा दी है। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा से ठीक पहले उठाया गया यह कदम दुनिया को साफ संदेश देता है कि भारत अपनी सैन्य ताकत को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं पड़ने देगा।

देखा जाये तो भारतीय वायुसेना इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर में खड़ी है। स्वीकृत 42.5 पांच स्क्वॉड्रन के मुकाबले उसके पास केवल 29 स्क्वॉड्रन बचे हैं। दूसरी ओर चीन तेजी से अपने पांचवीं और छठी पीढ़ी के युद्धक विमानों का जाल खड़ा कर रहा है। चीन के पास पहले से जे-20 और जे-35 जैसे स्टेल्थ विमान सक्रिय हैं, जबकि वह जे-36 और जे-50 जैसे अगली पीढ़ी के विमानों का परीक्षण भी कर रहा है। पाकिस्तान भी चीन के सहयोग से जे-35 ए जैसे स्टेल्थ विमान हासिल करने की तैयारी में है। ऐसे माहौल में भारत का राफेल पर दांव केवल जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का निर्णायक प्रश्न बन चुका है।

भारतीय वायुसेना ने पिछले वर्षों में जिस अदम्य साहस और पराक्रम का प्रदर्शन किया है, उसने दुनिया को भारत की नई सैन्य सोच का परिचय दिया है। बालाकोट से लेकर वास्तविक नियंत्रण रेखा तक भारतीय वायुसेना ने यह साबित किया कि वह दुश्मन के घर में घुसकर जवाब देने की क्षमता रखती है। अब वही वायुसेना राफेल जैसे घातक और आधुनिक युद्धक विमानों से और अधिक प्रचंड होने जा रही है। देखा जाये तो राफेल केवल विमान नहीं, बल्कि हवा में भारत की दहाड़ है। इसकी मारक क्षमता, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की ताकत और दुश्मन की वायु रक्षा को ध्वस्त करने की क्षमता इसे बेहद घातक बनाती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समझौते के तहत अठारह विमान सीधे फ्रांस से आएंगे, जबकि 96 विमानों का निर्माण भारत में होगा। यह पहली बार होगा जब राफेल का निर्माण फ्रांस के बाहर किया जाएगा। लगभग पचास प्रतिशत स्वदेशीकरण के साथ यह कार्यक्रम भारत को केवल खरीदार नहीं, बल्कि रक्षा निर्माण शक्ति बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इससे भारत की रक्षा औद्योगिक क्षमता बढ़ेगी, हजारों रोजगार पैदा होंगे और भविष्य में स्वदेशी युद्धक विमान कार्यक्रमों को भी नई गति मिलेगी।

हालांकि यह भी सच है कि केवल राफेल से पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा। मिग-29, मिराज-2000 और जगुआर जैसे पुराने विमान अगले दशक में सेवा से बाहर होने लगेंगे। दूसरी ओर तेजस मार्क-1 ए और तेजस मार्क-2 जैसी स्वदेशी परियोजनाएं देरी से जूझ रही हैं। ऐसे में भारतीय वायुसेना को संख्या और तकनीक दोनों स्तरों पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इस संकट के बीच भी भारत ने बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। एक ओर राफेल, दूसरी ओर उन्नत मध्यम युद्धक विमान कार्यक्रम और साथ ही मानव रहित युद्धक प्रणालियों पर निवेश, यह दिखाता है कि नई दिल्ली आने वाले बीस वर्षों की हवाई शक्ति संरचना तैयार कर रही है।

हम आपको यह भी बता दें कि दुनिया की दो बड़ी छठी पीढ़ी की परियोजनाएं भी इस समय संकट में हैं। ब्रिटेन, इटली और जापान का वैश्विक युद्धक विमान कार्यक्रम वित्तीय संकट और देरी का शिकार है, जबकि फ्रांस, जर्मनी और स्पेन की भविष्य वायु युद्ध प्रणाली आंतरिक टकराव में फंसी हुई है। भारत ने इन दोनों परियोजनाओं में रुचि दिखाई थी, लेकिन अब वहां अनिश्चितता बढ़ गई है। यही कारण है कि भारत ने तत्काल सामरिक मजबूती के लिए राफेल पर भरोसा बढ़ाया है।

इसके अलावा, रूस का सुखोई-57 भी चर्चा में है। रूस भारत को तकनीक हस्तांतरण, स्रोत कोड और भारत में निर्माण जैसे आकर्षक प्रस्ताव दे रहा है। कई पूर्व वायुसेना अधिकारियों का मानना है कि सीमित संख्या में सुखोई-57 विमानों की खरीद भारत के लिए अंतरिम समाधान हो सकती है। लेकिन भारत फिलहाल किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर होने की बजाय बहुध्रुवीय रक्षा रणनीति अपना रहा है। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

प्रधानमंत्री मोदी की आगामी फ्रांस यात्रा इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक महत्वपूर्ण बना देती है। यह यात्रा भारत और फ्रांस के बीच उभरती सामरिक साझेदारी का निर्णायक चरण साबित हो सकती है। अमेरिका के साथ हाल के तनाव और पश्चिमी देशों की अनिश्चित नीतियों के बीच फ्रांस ऐसा साझेदार बनकर उभरा है जो भारत को तकनीक, उत्पादन और रणनीतिक सहयोग तीनों देने को तैयार दिख रहा है। चीन को घेरने की वैश्विक रणनीति में भारत और फ्रांस का यह गठजोड़ हिंद महासागर से लेकर प्रशांत क्षेत्र तक नई शक्ति संतुलन रचना कर सकता है।

दक्षिण एशिया में इसका सबसे गहरा असर पाकिस्तान पर पड़ेगा। पाकिस्तान पहले ही आर्थिक संकट और सैन्य निर्भरता से जूझ रहा है। ऐसे समय में भारत का 200 से अधिक राफेल विमानों की दिशा में बढ़ना पाकिस्तान की वायु शक्ति को पूरी तरह असंतुलित कर देगा। चीन भले ही पाकिस्तान को आधुनिक हथियार दे, लेकिन भारतीय वायुसेना का युद्ध अनुभव, प्रशिक्षण स्तर और तकनीकी समन्वय पाकिस्तान के लिए भय का कारण बना रहेगा। राफेल की मौजूदगी से भारत को दो मोर्चों पर युद्ध की स्थिति में भी निर्णायक बढ़त मिलने की संभावना मजबूत होगी।

बहरहाल, स्पष्ट है कि यह समझौता भारत की नई सैन्य सोच का उद्घोष है। संदेश बिल्कुल साफ है कि भारत अब इंतजार नहीं करेगा, भारत अब जवाब देगा। भारतीय वायुसेना की गर्जना आने वाले वर्षों में और प्रचंड होने वाली है। राफेल के पंखों पर सवार होकर भारत केवल अपनी सीमाएं सुरक्षित नहीं करेगा, बल्कि पूरे एशिया में शक्ति संतुलन की नई कहानी लिखेगा।

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