अक्सर होता है कि हमारे जीवन में टोक लग जाती है, जिसके बाद हर जगह हमारा ही नुकसान हो जाता है। कई बार इसका कारण बुरी नजर या फिर नकारात्मक ऊर्जा भी हो सकती है। ऐसे में बनते-बनते काम भी बिगड़ जाते हैं और आपको समझ नहीं आ रहा इसके पीछे का कारण, तो हो सकता है नकारात्मक ऊर्जा हावी हो। जो आपके जीवन में बाधा डाल रही हो। अगर आपकी नौकरी में भी अड़चन आ रही है, तो हम इस लेख में आपके लिए उपाय लेकर आएं। ऐसे में आपको पीली सरसों का एक उपाय जरुर करना चाहिए, जिससे कोई भी बुरी शक्ति दूर रहे और आपके सभी काम बनने लगें। आइए आपको इस उपाय के बारे में बताते हैं-
किसे करें पीली सरसों का महाउपाय
-पीली सरसों का उपाय करने के लिए सबसे पहले एक मुट्ठी पीली सरसों लेनी हैं। अब सुबह या शाम के समय शांत मन से बैठें और पीली सरसों को अपने हाथ में लेकर सिर से लेकर पैरों तक आठ बार घुमाएं। पीली सरसों को घुमाते हुए मन में अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए प्रार्थना करें।
- आठ बार पीली सरसों को उतारने के बाद सरसों को घर के बाहर किसी स्थान पर बहते हुए पानी में प्रवाहित कर दें। ध्यान रखें कि सरसों को फेंकने के बाद पीछे मुड़कर बिल्कुल भी न देखें। माना जाता है कि इससे व्यक्ति पर मौजूद कोई भी नकारात्मक ऊर्जा दूर होने लगती है।
आठ बार ही क्यों घुमाई जाती है पीली सरसों?
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, अंक 8 का संबंध कर्म और बाधाओं को समाप्त करने वाली ऊर्जा से होता है। इसलिए पीली सरसों को आठ बार सिर के ऊपर से उतारने की प्रथा है। यह प्रक्रिया व्यक्ति के आसपास मौजूद किसी भी नकारात्मक शक्ति को दूर हटाने का प्रतीक मानी जाती है। वहीं, सरसों में ऐसे गुण होते है जो व्यक्ति या उसके आस-पास मौजूद किसी भी तरह की बुरी शक्ति को दूर करने में मदद करती है। इसके उपाय से जीवन में सकारात्मकता आती है।
किन लोगों को करना चाहिए पीली सरसों के उपाय
- यह उपाय उन लोगों को जरुर करना चाहिए, जिनका काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं।
- अगर आपकी नौकरी में तमाम समस्याएं आ रही है, तो इस उपाय को जरुर करें।
- बार-बार नौकरी के लिए इंटरव्यू देते हैं, लेकिन सफलता नहीं मिलती है, तो यह उपाय जरुर करें।
- अगर आपके बिजनेस में लगातार नुकसान हो रहा है, तो इस उपाय को जरुर करें।
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एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को केंद्र सरकार पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का तीखा हमला करते हुए चेतावनी दी कि इस प्रक्रिया से अस्थायी रूप से वंचित भारतीयों का एक वर्ग बन सकता है। एक्स पर एक पोस्ट में, ओवैसी ने आरोप लगाया कि केंद्र ने दस्तावेज़ आधारित सत्यापन प्रक्रिया के माध्यम से 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों से लगभग 6.5 करोड़ नाम पहले ही हटा दिए हैं।
उन्होंने दावा किया कि सरकार अब एक समिति के माध्यम से इस प्रक्रिया को संस्थागत रूप देने की कोशिश कर रही है जो इन नामों को हटाए जाने की जांच करेगी और कथित अवैध प्रवासियों की पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने और निर्वासित करने के लिए एक दीर्घकालिक तंत्र स्थापित करेगी। ओवैसी ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले दस्तावेज़ आधारित एसआईआर (SIR) लागू किया, जिसके तहत 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों से लगभग 65 लाख नाम हटा दिए गए। अब सरकार चाहती है कि इन्हीं हटाए गए नामों का अध्ययन करने और अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत और निर्वासन के लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाने के लिए एक समिति गठित की जाए।
हैदराबाद के सांसद ने चिंता व्यक्त की कि इस प्रक्रिया का लोकतांत्रिक भागीदारी पर, विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों पर, दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि एसआईआर का इस्तेमाल वंचित भारतीयों का एक स्थायी वर्ग बनाने के लिए किया जाएगा। मतदान का अधिकार ही गरीबों का शक्तिशाली लोगों के खिलाफ एकमात्र हथियार है। इसके बिना सरकार उनके साथ मनमानी करेगी। ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाए गए व्यक्तियों को पहले से ही कल्याणकारी लाभों तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से किसी व्यक्ति की नागरिकता पर स्वतः कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
उन्होंने कहा कि कानून के तहत, एसआईआर के तहत नाम हटाए जाने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति नागरिक नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि लगभग 27 लाख मामले अभी भी विचाराधीन हैं और कई प्रभावित व्यक्ति अभी भी फॉर्म 6 के माध्यम से नामांकन करा सकते हैं। इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए ओवैसी ने दावा किया कि भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने ऐसे आंकड़े जारी नहीं किए हैं जिनसे यह पता चले कि कितने उम्मीदवारों को विदेशी नागरिकता के कारण बाहर किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले लोग मुसलमान, महिलाएं, प्रवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग हैं।
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