Shukra Nakshatra Parivartan: 11 जून को शुक्र का नक्षत्र परिवर्तन, इन 5 राशियों की बदलेगी किस्मत
Shukra Nakshatra Parivartan: शुक्र ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में बहुत खास माना जाता है. इस ग्रह को लग्जरी, सुख-सुविधाओं, धव-दौलत और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है. जब भी इस ग्रह का नक्षत्र परिवर्तन होता है या गोचर होता है तो उसका प्रभाव राशिचक्र की सभी राशियों पर पड़ता है. इस बार शुक्र ग्रह का नक्षत्र परिवर्तन हो रहा है. जून के महीने में 11 तारीख को शुक्र ग्रह पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जहां वो 23 जून तक रहने वाले हैं.
ज्योतिषों की मानें तो इस गोचर को यह अत्यंत शुभ खगोलीय घटना है. पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है. ऐसे में सुख-समृद्धि के कारक यहां आ रहे हैं तो इस अवधि में कुछ राशियों को भौतिक सुविधाओं से अधिक मिल सकता है. प्रेम और आर्थिक लाभ हो सकता है. चलिए जानते हैं इन राशियों के बारे में.
शुक्र के पुष्य नक्षत्र में गोचर का क्या होगा प्रभाव?
द्रिक पंचांग के अनुसार, 11 से 23 जून तक की अवधि में होने वाले इस ग्रह गोचर के प्रभाव विलासिता, सौंदर्य और धन के संसाधनों में वृद्धि होगी. यह समय खरीदारी, संबंधों और निवेश के लिहाज से बहुत खास माना जा रहा है.
इन 5 राशियों को होगा शुक्र गोचर का लाभ
1.वृषभ
शुक्र इस राशि के स्वामी होते हैं. इसलिए, पुष्य नक्षत्र में शुक्र के गोचर से सुख समय का प्रारंभ होगा. इस दौरान आपको हर कार्य में सफलता मिलने वाली है. अगर आप किसी महंगी वस्तु को खरीदने के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे थे तो अब आप उसे ले सकते हैं. समय आपके अनुकूल चल रहा है. आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी.
2.कर्क
कर्क राशि के जातकों को पुष्य नक्षत्र में शुक्र के प्रवेश लाभ होगा. पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनिदेव होते हैं. इसलिए, शुक्र का आपकी राशि में प्रवेश महत्वपूर्ण है. कार्यस्थल में पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है. वैवाहिक जीवन में खुशहाली आएगी. लाइफ पार्टनर के साथ संबंधों में मिठास बढ़ेगी.
3.कन्या
कन्या राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह नक्षत्र परिवर्तन आर्थिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है. इन लोगों को शुक्र के प्रभाव से अक्समात धनलाभ होगा. कन्या राशि के वे जातक को एंटरटेनमेंट वर्ल्ड, कला या मीडिया से जुड़े हुए हैं, उन्हें अच्छे अवसर मिलेंगे. इन लोगों के लिए आय के नए स्त्रोत खुलेंगे.
4.वृश्चिक
शुक्र का गोचर आपकी राशि के लिए सुख-सुविधाओं से भरा होने वाला है. घर में कोई मांगलिक कार्य संपन्न हो सकता है. वृश्चिक राशि के लोगों को मनपसंद ट्रांसफर हो सकता है. यह अवधि आपके लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आ रही है. निवेश से जुड़े काम भी सफल होंगे.
5.मीन
इस राशि के लोगों को शुक्र के उच्च प्रभाव से लाभकारी समय का आनंद उठाने का लाभ मिलेगा. आपको समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी. अगर कोई पुराना वाद-विवाद चल रहा है तो वह तुरंत समाप्त हो जाएगा. यह समय उनके लिए रचनात्मक कार्यों का होगा, जिसमें उन्हें सफलता मिल सकती है.
शुक्र गोचर से ज्यादा लाभ पाने के लिए करें ये खास उपाय
- शुक्रवार के दिन सफेद मिठाई या मिश्री का प्रसाद माता लक्ष्मी को चढ़ाएं.
- शुक्र के बीज मंत्र ऊं द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:, इस मंत्र का 108 बार जाप करें.
- इस अवधि में इत्र या खुशबूदार चीजों का प्रयोग करें.
Vibhuvan Sankshti Chaturthi 2026: अधिकमास की विभुवन संकष्टी चतुर्थी आज, बप्पा को लगाएं इन खास चीजों का भोग, जानिए चंद्र अर्घ्य का मुहूर्त
Vibhuvan Sankshti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है, लेकिन जब बात विभुन संकष्टी चतुर्थी की हो तो इसके महत्व कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है. आज 03 जून, बुधवार को साल की सबसे शक्तिशाली और दुर्लभ विभुवन संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह कोई साधारण चतुर्थी नहीं है, बल्कि हर ढाई से तीन साल में एक बार आने वाला एक महायोग है. इस चतुर्थी को भगवान गणेश की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने का विधान है. आइए जानते हैं इस बेहद शुभ दिन का पूजा शुभ मुहूर्त, बप्पा को प्रसन्न करने वाले खास भोग और चंद्रमा को अर्घ्य देना का मुहूर्त क्या होगा.
पूजा और चंद्रोदय का मुहूर्त
आज विभुवन संकष्टी चतुर्थी को शुभ मुहू्र्त में पूजा करने से व्रत और पूजा का पूरा फल प्राप्त होगा. इसके साथ ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. संकष्टी चतुर्थी की पूजा का मुहूर्त अमृत काल में शाम 07 बजकर 37 मिनट से रात 09 बजकर 24 मिनट पर होगा. इस मुहूर्त में भगवान गणेश की पूजा करें. 3 जून 2026 को चंद्रोदय का समय और पूजा मुहूर्त रात 10 बजकर 04 मिनट से रात 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. इस मुहूर्त में आप चंद्रदेव की पूजा करें.
विभुवन संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
आज व्रत वाले दिन सुबह उठकर सबसे स्नान करें और स्वच्छ कपड़े धारण करें. इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. पूजा स्थान पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें. इसके बाद भगवान को फूल, माला, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें. यदि दूर्वा की माला उपलब्ध न हो तो 11 जोड़ी दर्वा चढ़ा सकते हैं. धूप और घी का दीपक जलाकर गणेश चालीसा, स्तुति और मंत्रों का पाठ करें. संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें और अंत में बप्पा की आरती कर सच्चे मन से अपनी मनोकामनाएं भगवान के सामने रखें.
बप्पा को लगाएं ये खास भोग
मोदक
भगवान गणेश जी का सबसे प्रिय़ भोग मोदक माना जाता है. घर में बने गुड़-नारियल के मोदक चढ़ाने से बप्पा जल्दी प्रसन्न होते हैं.
दूर्वा
गणेश जी को दूर्वा यानी घास अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि कम से कम 21 दूर्वा चढ़ाने की परंपरा है.
लड्डू का भोग
आज भगवान गणेश जी को लड्डू चढ़ाने से जीवन में मिठास और सुख-समृद्धि आती है.
केला और नारियल
बप्पा को फल अर्पित करना भी शुभ होता है, खासकर केला और नारियल का भोग बप्पा को बहुत ही प्रिय होता है.
विभुवन संकष्टी चतुर्थी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, अधिक मास बेहद खास है. इस महीने के सभी व्रत बेहद पुण्यकारी माने जाते हैं. अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का व्रत इसीलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस चतुर्थी को विभुवन संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. इस व्रत को रखकर भगवान गणेश और चंद्रदेव की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. जीवन के सभी कष्ट और संकट समाप्त हो जाते हैं. कामों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं. जीवन में सुख-शांति आती है. घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. मानसिक तनाव और व्यर्थ की चिंताओं से छुटकारा मिल जाता है.
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