Delhi के Narela में DDA प्लॉट के पानी भरे गड्ढे में डूबने से दो बच्चों की मौत
दिल्ली के नरेला इलाके में डीडीए फ्लैट के पास बारिश के पानी से भरे एक गड्ढे में डूबने से नौ और 11 साल के दो बच्चों की मौत हो गई। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। यह घटना नरेला इलाके के “100 फुटा” पर हुई, जहां बवाना के रहने वाले बच्चे कथित तौर पर खेलने गए थे।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची, जहां स्थानीय निवासियों की मदद से बच्चों को पानी भरे गड्ढे से बाहर निकाला गया। पुलिस ने बताया कि उन्हें नरेला के सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पीड़ितों के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि एक बच्चा सुबह करीब 10 बजे अपने पिता से कुछ पैसे लेकर टॉफी खरीदने के लिए घर से निकला था।
वह पांचवीं कक्षा में पढ़ता था। उसके पिता मजदूरी करते हैं। बच्चे की चाची लाडली ने कहा, हमें दुर्घटना की सूचना मिली और हम मौके पर पहुंचे।” दूसरे बच्चे की मां ने बताया कि जब वह काम पर थी, तब उसे स्थानीय निवासियों का फोन आया, जिन्होंने उसे बताया कि उसका बेटा डूब गया है।
उसने कहा, वह सुबह करीब 10 बजे ट्यूशन के लिए गया था। मैं यह जानने के लिए फोन कर रही थी कि क्या वह ट्यूशन से लौट आया है। मुझे नहीं पता कि वह वहां क्यों गया।
प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद शाहनवाज ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि दो बच्चे पानी से भरे गड्ढे में हैं और वे तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा, कुछ लोगों ने देखा था कि बच्चे पहले ही डूब चुके थे। हमने उन्हें बचाने की कोशिश की और पुलिस को सूचित किया।
स्थानीय निवासियों की मदद से हम दोनों बच्चों को बाहर निकालने में सफल रहे। यह घटना दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) फ्लैटों के पास खाली जमीन पर बने एक गड्ढे में हुई। निवासियों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान यह गड्ढा बनाया गया था और बाद में इसमें बारिश का पानी भर गया।
घटना के बाद, डीडीए ने एक बयान में कहा कि उसने अनधिकृत प्रवेश रोकने के लिए खाली भूखंड की चारदीवारी कर दी थी। इसने कहा कि हालांकि असामाजिक तत्वों द्वारा चारदीवारी के हिस्सों को बार-बार क्षतिग्रस्त किया गया है, जिसे बार-बार मरम्मत भी कराई गई है। डीडीए ने कहा कि क्षेत्र में इस तरह के नुकसान, चोरी और अनधिकृत गतिविधियों की घटनाओं को लेकर समय-समय पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।
प्राधिकरण ने कहा कि वह पुलिस को हरसंभव सहयोग दे रहा है और इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचने के लिए चारदीवारी को मजबूत करने और क्षेत्र में संवेदनशील खाली भूखंडों की निगरानी बढ़ाने सहित निवारक उपायों की भी समीक्षा की जा रही है। नाबालिगों के परिवार के सदस्यों और स्थानीय निवासियों ने स्थल के रखरखाव में लापरवाही का आरोप लगाया और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कार्रवाई की मांग की। यह घटना राष्ट्रीय राजधानी में बारिश के बीच हुई है, जिससे कई इलाकों में जलभराव और बारिश का पानी एकत्र हो गया है।
जांच के तहत बच्चों के गड्ढे में उतरने की सटीक परिस्थितियों और उनके डूबने से पहले की घटनाओं के क्रम का पता लगाया जा रहा है। पुलिस ने कहा कि जांच आगे बढ़ने पर और जानकारी सामने आएगी।
NEET paper leak: Delhi Court ने CBI चार्जशीट पर संज्ञान लिया, 13 के खिलाफ पर्याप्त सबूत
दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्न पत्र लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए कहा कि 13 आरोपियों द्वारा अवैध आर्थिक लाभ के लिए प्रश्नपत्र लीक करने और उसे प्रसारित करने के लिए गिरोह बनाने के प्रथम दृष्टया पर्याप्त व पुख्ता सबूत मौजूद हैं। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने बुधवार को 13 आरोपियों के खिलाफ जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट पर संज्ञान लिया। अदालत ने बृहस्पतिवार को उपलब्ध कराए गए आदेश में कहा, “सीबीआई द्वारा व्यापक जांच के दौरान जुटाए गए पर्याप्त और पुख्ता सबूतों से प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि उपरोक्त सभी आरोपी किसी न किसी रूप में नीट (स्नातक) 2026 के प्रश्न पत्र लीक गिरोह का हिस्सा थे।
इनमें से प्रत्येक ने परीक्षा के तीनों विषयों भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के प्रश्नपत्र को प्रसारित करने में सक्रिय भूमिका निभाई।” अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि कथित मुख्य आरोपी पी. वी. कुलकर्णी को पूरी जानकारी थी कि निर्धारित स्थान पर विषय विशेषज्ञों की तलाशी लेने की कोई व्यवस्था नहीं थी इसलिए उसने इसका फायदा उठाया और रसायन विज्ञान के प्रश्नपत्र का अनुवाद करते समय गुप्त रूप से तैयार की गई पर्चियां या छोटे नोट अपने साथ ले गया। अदालत ने कहा, “रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट है कि इन तीनों विशेषज्ञों कुलकर्णी, भौतिकी के लिए मनीषा संजय हवलदार और जीव विज्ञान के लिए मनीषा गुरुनाथ मंधारे ने यह काम सौंपे जाने से पहले लिखित रूप में वचन दिया था कि वे नीट- स्नातक 2026 से संबंधित सामग्री का कोई भी हिस्सा किसी के साथ किसी भी तरीके से साझा नहीं करेंगे।” अदालत ने कहा कि इस वचन का उल्लंघन प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि इन आरोपियों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के साथ विश्वासघात किया। एनटीए ने इन्हें अपने-अपने विषयों के नीट प्रश्नपत्र के अनुवाद का काम सौंपा था।
अदालत ने कहा, “इसके अलावा, अपने उक्त कृत्य से उन्होंने प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) अधिनियम की धारा 13 के तहत लोक सेवक द्वारा आपराधिक कदाचार भी किया।” अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह भी स्पष्ट है कि इन तीनों विषय विशेषज्ञों ने अवैध आर्थिक लाभ हासिल करने के लिए अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची। उन्होंने परीक्षा से संबंधित सामग्री यानी अपने-अपने विषय के लीक हुए प्रश्न सह-आरोपियों और कई अभ्यर्थियों को “कोचिंग देने के बहाने” बेच दिए। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराधों का संज्ञान लिया।
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