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Explainer: अब ईरान पर हमला कहीं अमेरिका को न पड़ जाए भारी! जानें कहां से तेहरान को मिले घातक ड्रोन और मिसाइलें

अमेरिका के साथ ईरान दोबारा से तल्खी बढ़ चुकी है. पिछली बार जब फरवरी में युद्ध शुरू हुआ था  तब ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने बड़े हमले किए थे. इसमें ईरान के कई अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह कर दिया गया था. खासतौर पर सैन्य अड्डे को तबाह कर दिया गया. फरवरी में जब हमला हुआ था तब यह अचानक हुआ था. ईरान को संभलने का मौका नहीं मिला था. इस दौरान ईरान के सवोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की हत्या कर दी गई थी. वहीं ईरान के कई बड़े नेताओं को पर हमले हुए थे. इसके साथ सैन्य अड्डों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी. 40 दिन तक चले युद्ध में अमेरिका और इजरायल की ओर से दावा किया गया था कि हमलों में ईरान को काफी नुकसान हुआ. यहां तक  की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि ईरान को भारी नुकसान हुआ है और ईरान को जल्द हमारी शर्तोंं को मानना ही होगा.  

इस बीच ईरान के हथियारों से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है. जिस ईरान को अब तक अमेरिका कमजोर समझ रहा था, वह अभी भी उतना ताकतवर दिख रहा है. बताया जा रहा है कि ईरान के पास इस समय 1,000 से ज्यादा मिसाइलें, 50 गुप्त लॉन्चर और हजारों ड्रोन मौजूद हैं. इनका उपयोग वह बड़े युद्ध के हालात में कर सकता है. ईरान का कहना है कि अगर भविष्य में युद्ध की नौबत आती है तो उसके हथियार खाड़ी देशों को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं. ईरान अब खाड़ी देशों पर भारी तबाही मचा सकता है. संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब पर वह बड़ा हमला कर सकता है. 

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो युद्ध के दौरान अमेरिका ने ईरान के 69 गुप्त लॉन्चरों को तबाह कर दिया था. लेकिन अब बताया जा रहा है कि इनमें से 50 लॉन्चरों को ईरान ने दोबारा से सक्रिय कर दिया है. इन लॉन्चरों के साथ ईरान के साथ के पास करीब एक हजार मिसाइलें मौजूद हैं. 

ईरान के पास अब तक कितने हथियार 

बताया जा रहा है कि जंग से पहले ईरान के पास करीब तीन हजार बैलिस्टिक मिसाइलों की बात कही गई थी. इस दौरान वाशिंगटन पोस्ट की ओर से खुफिया अधिकारियों के हवाले से यह रिपार्ट सामने आई कि ईरान ने युद्ध-पूर्व अपनी मिसाइल क्षमता का करीब 70 प्रतिशत भाग फिर से हासिल कर लिया है. उसके पास करीब 2,100 मिसाइलें यहां पर मौजूद हैं. 

ईरान के पास करीब 100 मिसाइल लॉचर मौजूद हैं. इनमें से 50 गुप्त रूप से सक्रिय बताए गए. ईरान के पास शाहेद ड्रोन मौजूद हैं. इन्होंने युद्ध के दौरान खाड़ी देशों में भारी तबाही मचाई. ईरान के पास ऐसे शाहेद ड्रोन की संख्या हजारों में बताया जा रही है. 

क्या चीन और रूस ईरान की कर रहे मदद? 

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान को हथियारों का जखिरे में चीन की कंपनियों ने बड़ी सहायता की है. चीन से ईरान को हथियारों के पुर्जे मिले हैं. इसके जरिए ईरान ने सस्ते रॉकेट और मिसाइलों का जखीरा तैयार किया गया है. चीन के साथ ईरान को रूस से भी हथियारों के कलपुर्जें मिल रहे हैं. यह दोनों ही ईरान के दोस्त मुल्कों में आते हैं. अब अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो उसे मुंह की खानी पड़ सकती है. ईरान ने तय कर लिया कि अगर किसी तरह का बड़ा हमला होता है तो खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है. इजरायल के लिए भी दूसरी बार अटैक   करना खतरनाक होगा. 

मई के मध्य में बीजिंग दौरे के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चीन ने उनसे वादा किया है कि वे ईरान को हथियार को हथियार उपलब्ध नहीं कराएगा. हालांकि, चीन ने राष्ट्रपति ट्रंप के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

ईरान और अमेरिका में समझौते पर चर्चा

सीजफायर के बाद ईरान और अमेरिका परमाणु समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं. कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देश इस बात का समाधान तलाश रहे हैं कि मध्य पूर्व में शांति किस तर से स्थापित हो. परमाणु समझौते को लेकर ट्रंप ने जो प्रस्ताव रखा है, उसमें कहा गया है कि ईरान  होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी देशों के लिए खुला रखने वाला ह. वहीं ईरान अमेरिका की निगरानी में यूरेनियम संवर्धन के कार्यक्रम को पूरी तरह से खत्म कर देगा. 

ईरान अमेरिका की किन शर्तों पर है सहमत  

हाल की अमेरिका-ईरान के बीच हुई शांति वार्ता में ईरान ने कुछ शर्तों पर सहमति जताई है, लेकिन  अभी अंतिम समझौता नहीं सामने आया है. रिपोर्टों की मानें तो ईरान ने इन बिंदुओं पर सकारात्मक  संकेत दिए हैं

परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता

उच्च स्तर के यूरेनियम संवर्धन (enrichment) को सीमित करने और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण बढ़ाने पर बातचीत. कुछ प्रस्तावों में अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करने या बाहर भेजने पर चर्चा. होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही तय करने पर सहमति की दिशा में बातचीत.

ईरान की मुख्य मांगें 

अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों (sanctions) में राहत दे. विदेशों में जमी हुई ईरानी संपत्तियों (frozen assets) को पूरी तरह से मुक्त करे. क्षेत्रीय संघर्षों, विशेषकर लेबनान और गाजा से जुड़े मुद्दों पर  तनाव कम करना होगा.

 

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