Independence Day Special: कौन बना बॉलीवुड का सबसे दमदार फौजी? इन किरदारों ने छोड़ी खास छाप
Independence Day Special: स्वतंत्रता दिवस पर देशभर में देशभक्ति का माहौल देखने को मिलता है. इस खास दिन पर तिरंगा फहराने से लेकर देशभक्ति फिल्में देखने तक, हर कोई देश के वीर जवानों को याद करता है. बॉलीवुड ने भी अपनी फिल्मों के जरिए सेना के जवानों की बहादुरी, त्याग और जज्बे को पर्दे पर बखूबी दिखाया है. कई एक्टर्स ने ऐसे आर्मी ऑफिशर का रोल प्ले कया है, जो आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हैं. तो चलिए जानते हैं इस लिस्ट में किस-किस एक्टर का नाम शामिल है.
1. विक्की कौशल (Vicky Kaushal)
इस लिस्ट में सबसे पहला नाम लोगों के जेहन में आता है वो है विक्की कौशल का है. साल 2019 में आई एक्टर की सुपरहिट फिल्म 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' में उन्होंने एक आर्मी ऑफिसर का रोल प्ले किया थे. इस रोल के लिए एक्टर को काफी पसंद किया जाता है. वहीं, इसके अलावा विक्की 'राजी' में भी एक फौजी अफसर के रोल में नजर आए थे और उन्होंने सैम बहादुर में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का रोल भी प्ले किया था.
2. सिद्धार्थ मल्होत्रा (Siddharth Malhotra)
सिद्धार्थ मल्होत्रा का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है . एक्टर ने 'शेरशाह' में परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा का रोल प्ले किया था. भले ही ये फिल्म ओटीटी पर रिलीज हुई थी, लेकिन इसने देशभर में खूब सुर्खियां बटोरी थी. इसके अलावा सिद्धार्थ फिल्म 'अय्यारी' में भी आर्मी ऑफिसर के रोल में दिखे थे.
3. ऋतिक रोशन (Hrithik Roshan)
इस लिस्ट में बॉलीवुड के सपुरस्टार ऋतिक रोशन का नाम भी शामिल हैं. उन्होंने फरहान अख्तर की फिल्म 'लक्ष्य' में कैप्टन करण शेरगिल का रोल प्ले किया था. इस किरदार के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है. बता दें, ये उन आइकॉनिक किरदारों में शामिल है, जिसके लिए लोग देशभक्ति फिल्में देखते हैं.
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4. शाहरुख खान (Shahrukh Khan)
बॉीलवुड के किंग खान यानी शाहरुख का नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं. उन्होंने टीवी सीरियल 'फौजी' से अपने कॅरियर की शुरुआत की थी. हालांकि उन्हें 'जब तक है जान' में सेना के अफसर का किरदार निभाने के लिए याद किया था. इसके अलावा शाहरुख ने फिल्म 'आर्मी', 'मैं हूं ना' में भी आर्मी अफसर का रोल प्ले किया था.
5. अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan)
अमिताभ बच्चन ने भी कई फिल्मों में आर्मी ऑफिशर का रोल प्ले किया था. खासतौर पर उन्हें फिल्म 'मेजर साब' के रोल के लिए जाना जाता है. इस फिल्म में उन्हें मेजर जसबीर सिंह राणा के रोल में देखा गया. इसके अलावा एक्टर 'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों', 'लक्ष्य' जैसी फिल्मों में भी दमदार सैनिक के रोल में नजर आएंगे.
6. सनी देओल (Sunny Deol)
सनी देओल भी आर्मी ऑफिशर के रोल के लिए चर्चा में रहते हैं. उनके 'बॉर्डर' फिल्म के रोल को कोई कैसे भूल सकता है. इस फिल्म में सनी देओल का मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी के रोल में देखा गया था. इसके अलावा बॉर्डर 2 में भी उन्होंने पुलिस वाला का रोल प्ले किया था.
7. अक्षय कुमार (Akshay Kumar)
आर्मी ऑफिशर की बात हो और अक्षय कुमार का नाम ना आए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता है. बॉलीवुड खिलाड़ अक्षय कुमार ने फिल्म 'फौजी' में पहली बार सेना की वर्दी पहनी थी. इस रोल में उनकी काफी तारीफ हुई थी. इसके बाद उन्होंने कई और फिल्में में सेना की वर्दी पहनी. फिल्म हॉलीडे के लिए तो उन्हें आज भी याद किया जाता है.
राहुल गांधी का RSS पर बड़ा बयान, बोले- अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगी तो करूंगा रक्षा
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर दिए बयान ने देश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है. राहुल गांधी ने कहा कि राजनीतिक या वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी संगठन को अपनी बात रखने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर कभी RSS की अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने की कोशिश की गई, तो वह उसके अधिकारों की रक्षा के लिए भी खड़े होंगे.
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों को लेकर अपनाए गए रुख को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज है.
जंतर-मंतर के प्रदर्शन को लेकर सरकार पर निशाना
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि युवा अपनी परेशानियां और मांगें सामने रखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी बात कहने का अधिकार मिलना चाहिए. उनके मुताबिक, किसी प्रदर्शन या विरोध के दौरान व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि लोगों को अपनी आवाज उठाने से ही रोक दिया जाए.
राहुल गांधी ने इस दौरान एक महिला का भी जिक्र किया, जो अपनी बेटी से जुड़े पुराने मामले को लेकर न्याय की मांग कर रही थी. उन्होंने कहा कि अगर कोई पीड़ित व्यक्ति अपनी बात रखना चाहता है, तो व्यवस्था को उसकी आवाज सुननी चाहिए.
#WATCH | Delhi: Lok Sabha LoP and Congress MP Rahul Gandhi says, "...I can understand if you are fighting the British Empire and suddenly you say, I'm feeling a bit scared. But you're fighting a bunch of jokers. How can you feel scared? You're literally fighting a bunch of… pic.twitter.com/Q1prAPfyfh
— ANI (@ANI) August 13, 2026
‘RSS की अभिव्यक्ति की भी रक्षा करूंगा’
RSS को लेकर राहुल गांधी का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. उन्होंने कहा कि वह विचारधारा के आधार पर किसी की अभिव्यक्ति की आजादी खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं.
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनका मानना है कि हर व्यक्ति और संगठन को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए, भले ही उसके विचारों से वह स्वयं सहमत न हों.
उन्होंने कहा कि यदि RSS की अभिव्यक्ति को देश से बाहर करने या उसकी आवाज दबाने की कोशिश होती है, तो वह उसकी भी रक्षा करेंगे. उनके इस बयान को राजनीतिक विरोध के बावजूद लोकतांत्रिक अधिकारों की वकालत के रूप में देखा जा रहा है.
मौजूदा सरकार देश के मुद्दों को खुलकर सामने नहीं रख रही
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने दावा किया कि सरकार अब इस बात को समझ चुकी है कि लोगों को अपनी बात रखने से हमेशा के लिए नहीं रोका जा सकता. राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा सरकार के सामने बड़ी चुनौती यह है कि देश के लोग अब अपने मुद्दों को खुलकर सामने रखना चाहते हैं.
अमित शाह को लेकर भी राहुल गांधी का बयान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी राहुल गांधी ने बयान दिया. उन्होंने अमित शाह को लेकर संसद में उनकी गैरमौजूदगी का जिक्र किया और राजनीतिक तंज कसा. राहुल गांधी ने कहा कि अमित शाह को कभी ‘चाणक्य’ जैसी उपमाएं दी जाती थीं, लेकिन अब वह राजनीतिक रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार को यह एहसास हो चुका है कि जनता अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेगी.
अभिव्यक्ति की आजादी बनी राजनीतिक मुद्दा
राहुल गांधी के बयान का मुख्य केंद्र अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकार रहा. उन्होंने एक तरफ सरकार पर छात्रों और आम लोगों की आवाज दबाने का आरोप लगाया, वहीं दूसरी तरफ RSS जैसे वैचारिक रूप से विरोधी संगठन के लिए भी अभिव्यक्ति की आजादी की वकालत की.
उनका यह रुख राजनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस और RSS के बीच लंबे समय से वैचारिक मतभेद रहे हैं.
बयान से बढ़ सकती है सियासी बहस
राहुल गांधी के बयान के बाद अब राजनीतिक गलियारों में बहस तेज होने की संभावना है. एक ओर उनके समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता के तौर पर देख सकते हैं, जबकि विरोधी दल उनके बयान के राजनीतिक अर्थ पर सवाल उठा सकते हैं.
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