कानपुर की जुगियाना बस्ती में शिक्षा बदहाल, 1000 परिवारों के बच्चे 8वीं बाद छोड़ रहे स्कूल, कतरन-बर्तन बेचने को मजबूर
कानपुर के कर्नलगंज इलाके में स्थित जुगियाना बस्ती की तंग गलियों में सुबह से शाम तक चहल-पहल बनी रहती है. यहां बच्चों और युवाओं की बड़ी संख्या किसी न किसी काम में लगी दिखाई देती है. लेकिन इस चहल-पहल के पीछे एक ऐसी सच्चाई छिपी है, जो चिंता बढ़ाने वाली है.बस्ती के अनेक बच्चों के लिए स्कूल जाना नहीं, बल्कि परिवार की आमदनी बढ़ाना प्राथमिकता बन गया है.शौकत अली पार्क के आसपास बसे इस इलाके में रहने वाले कई परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं.
कभी माना जाता था बेकार झाड़, आज बन गया 'हरा खजाना'! आक की खेती से बदल रही किसानों की किस्मत, जानिए पूरा गणित
Aak Ki Kheti: खेती में बढ़ती लागत और पानी की कमी के बीच ‘आक’ (Calotropis) की खेती किसानों के लिए कमाई का नया विकल्प बनकर उभर रही है. यह पौधा बेहद कम पानी और कम देखभाल में भी आसानी से विकसित हो जाता है, इसलिए शुष्क और कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए इसे उपयुक्त माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार एक बार पौधा लगाने के बाद यह कई वर्षों तक उत्पादन देता है और करीब 12 साल तक आय का स्रोत बना रह सकता है. आक के पौधे का उपयोग औषधीय उत्पादों, जैविक उद्योगों, प्राकृतिक रेशों और विभिन्न शोध कार्यों में किया जाता है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. कम लागत और बेहतर बाजार संभावनाओं के कारण किसान इसे अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपना रहे हैं.
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