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तमिलनाडु की 151 सीटें ऑल इंडिया कोटा को देने के आदेश पर अंबुमणि रामदास ने जताई आपत्ति, राज्य सरकार से की ये अपील

चेन्नई, 1 जून (आईएएनएस)। पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने तमिलनाडु सरकार से हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने की अपील की है, जिसमें तमिलनाडु में सरकारी डॉक्टरों के लिए आरक्षित सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल पाठ्यक्रमों की 151 रिक्त सीटों को अखिल भारतीय कोटा (ऑल इंडिया कोटा) में शामिल करने का निर्देश दिया गया है।

डॉ. अंबुमणि रामदास का कहना है कि यह फैसला तमिलनाडु के साथ अन्याय है और इससे राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने राज्य सरकार से इस आदेश के खिलाफ कानूनी कदम उठाने और सरकारी डॉक्टरों के हितों की रक्षा करने की अपील की है।

सोमवार को जारी एक बयान में अंबुमणि रामदास ने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सरकारी डॉक्टरों के लिए आरक्षित सीटें बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन सीटों के जरिए तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ और सुपर-स्पेशियलिटी डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिल पाता है।

उन्होंने कहा कि इन आरक्षित सीटों के माध्यम से ही राज्य विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़कर रख सकता है। उनके अनुसार, सरकारी अस्पतालों में अनुभवी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था बेहद जरूरी है।

उनके अनुसार, तमिलनाडु में सुपर-स्पेशियलिटी पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स की कुल 670 सीटें हैं, जिनमें से 415 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध हैं। इनमें से 215 सीटें सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों के लिए आरक्षित हैं। इस कोटे के तहत दाखिला लेने वाले डॉक्टरों को एक बॉन्ड भरना पड़ता है, जिसमें वे यह वादा करते हैं कि वे अपनी सेवा अवधि के दौरान सरकारी अस्पतालों में ही काम करेंगे।

अंबुमणि ने कहा कि सुपर-स्पेशियलिटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिकांश डॉक्टर बेहतर वेतन और अधिक अवसरों के कारण निजी अस्पतालों में काम करना पसंद करते हैं। ऐसे में सरकारी डॉक्टरों के लिए आरक्षित सीटों की व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी अस्पतालों में भी विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध रहें।

उन्होंने कहा कि इस नीति की वजह से सरकारी अस्पतालों को ऐसे योग्य विशेषज्ञ मिलते हैं, जो मरीजों को आधुनिक और बेहतर इलाज उपलब्ध करा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि सरकारी डॉक्टरों के लिए आरक्षित 215 सीटों पर दाखिले की काउंसलिंग अप्रैल में शुरू हुई थी। पहले चरण में नीट सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा में क्वालिफाइंग अंक हासिल करने वाले 170 आवेदकों में से 100 उम्मीदवारों को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया। इनमें 71 उम्मीदवारों को सीटें आवंटित की गईं, जबकि 68 उम्मीदवारों ने आवंटित सीटों पर दाखिला लेने की सहमति दे दी।

अंबुमणि ने कहा कि बची हुई सीटों को भरने के लिए काउंसलिंग का दूसरा दौर अभी होना बाकी था। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें खाली पड़ी सीटों को ऑल इंडिया कोटा में शामिल करने की मांग की गई। याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने शेष 151 सीटों को ऑल इंडिया कोटा को सौंपने का आदेश दिया।

अंबुमणि ने कहा कि ऐसी खाली सीटों को भरने के लिए आमतौर पर क्वालिफाइंग अंकों में छूट दी जाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस साल भी यही प्रक्रिया अपनाएगी, जिससे सभी सीटों को भरा जा सके।

उन्होंने कहा कि अगर तमिलनाडु में भी पात्रता मानदंडों में इसी तरह की छूट दी जाए, तो सरकारी डॉक्टरों के लिए आरक्षित सभी 151 खाली सीटों को जल्द ही योग्य उम्मीदवारों से भरा जा सकता है।

अंबुमणि ने कहा कि ये सीटें करदाताओं के पैसे से संचालित सरकारी संस्थानों में बनाई गई हैं और इनका लाभ तमिलनाडु के लोगों को मिलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये सीटें राज्य के सरकारी डॉक्टरों को नहीं मिलती हैं, तो भविष्य में सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी हो सकती है।

उन्होंने तमिलनाडु सरकार से अपील की कि वह इन सीटों को ऑल इंडिया कोटा में स्थानांतरित न होने दे और इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ में अपील दायर करे।

--आईएएनएस

एसएचके/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Explainer: क्यों और कब लगता है चंद्र ग्रहण? इस समय क्या करें और क्या न करें, जानिए इसके पीछे का पूरा वैज्ञानिक रहस्य

Chandra Grahan 2026: आसमान में होने वाली खगोलीय घटनाएं हमेशा से लोगों के लिए आकर्षण और जिज्ञासा का विषय रही हैं. इनमें चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) एक ऐसी घटना है, जिसे लेकर विज्ञान और धार्मिक मान्यताओं दोनों में विशेष रुचि देखने को मिलती है. जब पूर्णिमा की रात अचानक चंद्रमा का चमकता हुआ चेहरा धुंधला पड़ने लगता है या उसका कुछ हिस्सा काला दिखाई देने लगता है, तब लोग इसे चंद्र ग्रहण के रूप में देखते हैं. हालांकि, आज भी बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर चंद्र ग्रहण क्यों लगता है? यह कितनी बार होता है? क्या ग्रहण के दौरान भोजन करना चाहिए? क्या गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए? और विज्ञान इस घटना को किस तरह समझाता है? आइए विस्तार से जानते हैं चंद्र ग्रहण से जुड़ी हर जानकारी.

क्या होता है चंद्र ग्रहण?

चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो तब घटित होती है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है. इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और चंद्रमा का पूरा या कुछ हिस्सा अंधकारमय दिखाई देने लगता है. आसान भाषा में कहें तो सूर्य की रोशनी सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती क्योंकि पृथ्वी बीच में आकर उस प्रकाश को रोक देती है. यही स्थिति चंद्र ग्रहण कहलाती है. चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा (Full Moon) के दिन ही दिखाई देता है, क्योंकि उसी समय सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में होते हैं.

हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण क्यों नहीं लगता?

यह एक बेहद रोचक सवाल है. यदि चंद्र ग्रहण पूर्णिमा पर ही लगता है, तो फिर हर महीने पूर्णिमा के दिन ग्रहण क्यों नहीं दिखाई देता? वास्तव में चंद्रमा की कक्षा (Orbit) पृथ्वी की कक्षा के मुकाबले लगभग 5 डिग्री झुकी हुई होती है. इसलिए अधिकांश पूर्णिमा पर चंद्रमा पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से गुजर जाता है. केवल तब ग्रहण लगता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक विशेष ज्यामितीय स्थिति में आ जाते हैं और चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है.

चंद्र ग्रहण के प्रकार

वैज्ञानिक रूप से चंद्र ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं. 

1. पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse)

जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया (Umbra) में प्रवेश कर जाता है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है. इस दौरान चंद्रमा लाल या तांबे जैसा दिखाई देता है, जिसे "ब्लड मून" भी कहा जाता है.

2. आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse)

जब चंद्रमा का केवल कुछ हिस्सा पृथ्वी की छाया में आता है, तब आंशिक चंद्र ग्रहण होता है. इस स्थिति में चंद्रमा का एक भाग काला या धुंधला दिखाई देता है.

3. उपच्छाया चंद्र ग्रहण (Penumbral Lunar Eclipse)

यह सबसे हल्का ग्रहण होता है. इसमें चंद्रमा पृथ्वी की बाहरी छाया (Penumbra) से गुजरता है, जिससे उसकी चमक थोड़ी कम हो जाती है. कई बार इसे सामान्य आंखों से पहचानना भी मुश्किल होता है.

ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल क्यों दिखाई देता है?

पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा अक्सर लाल या नारंगी रंग का नजर आता है. इसके पीछे भी एक वैज्ञानिक कारण है. जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरता है, तब नीले रंग की किरणें अधिक बिखर जाती हैं जबकि लाल रंग की किरणें आगे तक पहुंचती हैं. यही लाल प्रकाश पृथ्वी के चारों ओर मुड़कर चंद्रमा तक पहुंचता है और उसे लाल रंग का बना देता है. यही कारण है कि पूर्ण चंद्र ग्रहण को कई बार "ब्लड मून" कहा जाता है.

क्या चंद्र ग्रहण देखना सुरक्षित है?

सूर्य ग्रहण के विपरीत चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है. इसके लिए किसी विशेष चश्मे या उपकरण की आवश्यकता नहीं होती. आप दूरबीन, टेलीस्कोप या सामान्य आंखों से भी चंद्र ग्रहण का आनंद ले सकते हैं. चंद्र ग्रहण से आंखों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचता.

चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें?

  • ग्रहण का वैज्ञानिक अवलोकन करें.
  • खगोलीय घटनाओं को समझने का प्रयास करें.
  • ध्यान और मंत्र जाप करें.
  • बच्चों को विज्ञान से जुड़ी जानकारी दें.
  • टेलीस्कोप या दूरबीन से चंद्रमा का नजारा देखें.
  • ग्रहण की फोटोग्राफी कर सकते हैं.

चंद्र ग्रहण के दौरान क्या न करें?

  • ग्रहण काल में भोजन न करें.
  • शुभ कार्यों की शुरुआत टालना.
  • मंदिरों के पट बंद रखें.
  • ग्रहण खत्म होने से पहले भोजन पकाने से बचें. 

क्या गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए?

भारत सहित कई देशों में यह मान्यता प्रचलित है कि गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी रखनी चाहिए. लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार चंद्र ग्रहण का गर्भावस्था पर कोई सिद्ध नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया है. फिर भी यदि कोई महिला अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करना चाहती है, तो वह अपनी सुविधा और विश्वास के अनुसार ऐसा कर सकती है.

विज्ञान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है चंद्र ग्रहण?

चंद्र ग्रहण केवल एक सुंदर खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का महत्वपूर्ण अवसर भी होता है. इस दौरान वैज्ञानिक पृथ्वी के वायुमंडल, उसकी संरचना और प्रकाश के व्यवहार का अध्ययन करते हैं. चंद्र ग्रहण से प्राप्त आंकड़े ग्रहों और उपग्रहों के बारे में नई जानकारियां जुटाने में भी मदद करते हैं.

FAQs

1. चंद्र ग्रहण कब लगता है?

चंद्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है.

2. क्या चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन ही होता है?

हां, चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होता है.

3. क्या हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लगता है?

नहीं, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से थोड़ी झुकी हुई होती है.

4. चंद्रमा ग्रहण के दौरान लाल क्यों दिखाई देता है?

पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरने वाली लाल किरणें चंद्रमा तक पहुंचती हैं, जिससे वह लाल रंग का नजर आता है.

5. क्या चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देख सकते हैं?

हां, चंद्र ग्रहण को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है.

6. क्या गर्भवती महिलाओं को ग्रहण से खतरा होता है?

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार चंद्र ग्रहण से गर्भवती महिलाओं या गर्भस्थ शिशु को कोई सिद्ध नुकसान नहीं होता.

7. चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण में क्या अंतर है?

चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जबकि सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य को ढंक देता है.

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