डॉक्टरों ने छोड़ दी थी उम्मीद, लेकिन आस्था ने रचा इतिहास! जानिए कैसे खड़ा हुआ 22 एकड़ में फैला स्वर्णगिरी मंदिर
Swarnagiri Jain Mandir: राजस्थान का भव्य स्वर्णगिरी मंदिर केवल अपनी विशाल वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी प्रेरणादायक कहानी के लिए भी प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि मंदिर निर्माण की प्रेरणा एक ऐसे अनुभव से जुड़ी है, जब गंभीर बीमारी के दौरान डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी. कठिन परिस्थितियों में भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास ने नई ऊर्जा दी, जिसे कई लोग चमत्कार के रूप में देखते हैं. इसी आस्था और संकल्प ने आगे चलकर 22 एकड़ में फैले भव्य स्वर्णगिरी मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया. मंदिर अपनी शानदार नक्काशी, दिव्य वातावरण और आध्यात्मिक महत्व के कारण देशभर से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है. यह केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि विश्वास, धैर्य और समर्पण की एक जीवंत मिसाल भी माना जाता है.
अयोध्या हनुमानगढ़ी में नवाब मंसूर अली खां के पुत्र का हनुमान जी कृपा से बची जान, तब 52 बीघा मंदिर को किया दान, जाने
अयोध्या की हनुमानगढ़ी मंदिर से जुड़ी प्रचलित कथा के अनुसार 18वीं शताब्दी के दौरान अवध के नवाब मंसूर अली खां के पुत्र की तबीयत अचानक बेहद खराब हो गई थी. नवाब ने अपने पुत्र के उपचार के लिए उस समय के नामी वैद्यों और हकीमों की सहायता ली, लेकिन स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ. जब सभी प्रयास विफल होते दिखाई दिए तो नवाब को हनुमान जी के परम भक्त बाबा अभयरामदास जी के बारे में जानकारी मिली. बाबा अभयरामदास उस समय अयोध्या में तप और भक्ति के लिए विख्यात संत माने जाते थे.
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