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पाकिस्तान में यूट्यूबर्स पर व्यूज के आधार पर टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर विवाद, व्यवहारिकता पर उठे सवाल

नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान की एक प्रमुख संघीय सरकारी एजेंसी फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) के नए प्रस्ताव में यूट्यूबर्स पर उनके वीडियो व्यूज (कितनी बार वीडियो देखा गया) के आधार पर टैक्स लगाने की बात कही गई है। पाकिस्तान सरकार की योजना पर विवाद खड़ा हो गया है। आलोचकों का कहना है कि अगर सरकार सिर्फ व्यूज देखकर टैक्स लगाएगी, तो कई यूट्यूबर्स को अपनी वास्तविक कमाई से भी ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है।

मालदीव इनसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एफबीआर के इस कदम से कानूनी मान्यता और ऑनलाइन मोनेटाइजेशन की सच्चाई के साथ एजेंसी के तालमेल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

दरअसल आलोचकों का कहना है कि यूट्यूब पर ज्यादा व्यूज का मतलब हमेशा ज्यादा कमाई नहीं होता। उदाहरण के लिए अगर किसी यूट्यूबर के 10 लाख व्यूज हैं, लेकिन उसके वीडियो पर विज्ञापन कम चले, तो उसकी कमाई बहुत कम हो सकती है। वहीं किसी दूसरे यूट्यूबर के 10 लाख ही व्यूज हों, लेकिन उसके दर्शक अमेरिका या यूरोप जैसे देशों से हों, तो उसकी कमाई कई गुना ज्यादा हो सकती है। इसलिए टैक्स आय पर लगना चाहिए, सिर्फ व्यूज पर नहीं। सरकार वास्तविक आय की बजाय वीडियो व्यूज को टैक्स का आधार बना रही है, जिसे कई लोग अनुचित और अव्यावहारिक मान रहे हैं।

इस विवाद के केंद्र में कुछ विदेशी पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर्स के लिए टैक्सेशन 66 फीसदी तक पहुंचने की संभावना है। यह आंकड़ा न सिर्फ एक आक्रामक वित्तीय रुख को दिखाता है, बल्कि पॉलिसी डिजाइन और डिजिटल इनकम जेनरेशन के तरीकों के बीच एक बुनियादी अंतर को भी दिखाता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि यूट्यूब का रेवेन्यू मॉडल हर व्यू पर फिक्स्ड रेट पर काम नहीं करता है। क्रिएटर्स आमतौर पर अपने कंटेंट के साथ दिए गए विज्ञापन से कमाते हैं, जिसमें पेमेंट कॉस्ट पर मिल (सीपीएम) जैसे मेट्रिक्स पर कैलकुलेट किया जाता है, जो हर 1,000 व्यू पर कमाई दिखाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, असल में, सीपीएम रेट अलग-अलग होते हैं। कई क्रिएटर्स के लिए कमाई 1 डॉलर प्रति 1,000 व्यूज जितनी कम हो सकती है, जबकि ज्यादा डिमांड वाले मार्केट में प्रीमियम कंटेंट के लिए रेट 30 डॉलर प्रति 1,000 व्यूज से ज्यादा हो सकते हैं। शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट के लिए यह फर्क और भी ज्यादा है। उदाहरण के लिए, यूट्यूब शॉर्ट्स काफी कम रिटर्न देते हैं, जो अक्सर 0.4 डॉलर और 0.6 प्रति डॉलर 1,000 व्यूज के बीच होता है, जो प्लेटफॉर्म के अलग मोनेटाइजेशन स्ट्रक्चर को दिखाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “यदि कराधान को वास्तविक आय के बजाय केवल व्यूज की संख्या से जोड़ा जाता है, तो ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिसमें कर की देनदारी कमाई से भी अधिक हो जाए। ऐसे मामलों में प्रभावी कर दर न केवल असंगत होगी, बल्कि वास्तविक आय से पूरी तरह अलग हो जाएगी।”

अत्यधिक परिवर्तनशील आय स्रोत पर एक समान कर ढांचा लागू करने का प्रयास पाकिस्तान की कर नीति में एक व्यापक समस्या को भी उजागर करता है। प्रस्तावित व्यवस्था इस धारणा पर आधारित प्रतीत होती है कि व्यूज सीधे तौर पर आय से जुड़े होते हैं, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म के संदर्भ में यह मान्यता सही नहीं है।

कंटेंट से होने वाली कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि विज्ञापन दिखाए गए या नहीं, दर्शकों ने उन विज्ञापनों के साथ कितना जुड़ाव किया और विज्ञापनदाता किस बाजार से जुड़े हैं, जहां भुगतान दरें अधिक या कम हो सकती हैं। कई मामलों में कुछ क्षेत्रों से आने वाले व्यूज़ कोई राजस्व उत्पन्न ही नहीं करते, खासकर तब जब विज्ञापन नहीं दिखाए जाते या उनका मुद्रीकरण संभव नहीं होता।

रिपोर्ट में कहा गया है, “यह विविधता एक समान कर दर लागू करने की व्यवहारिकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि आय निर्धारित करने वाले मूल कारकों को ध्यान में नहीं रखा गया, तो यह नीति ऐसी कमाई पर भी कर का बोझ डाल सकती है जो वास्तव में हुई ही न हो।”

इसके अलावा, प्रस्तावित कर ढांचा विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर्स पर भी लागू होगा, जिससे अधिकार-क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) से जुड़ी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। इनमें से कई लोग पाकिस्तान के बाहर रहते हैं, विदेशी मुद्रा में आय अर्जित करते हैं और संभव है कि उनकी पाकिस्तान में कोई भौतिक उपस्थिति भी न हो।

--आईएएनएस

केके/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक से जोड़ें : CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभागों की समीक्षा करते हुए साफ तौर पर कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का लाभ सीधे आम आदमी को मिलना चाहिए.  उन्होंने निर्देश दिए कि सरकारी अस्पतालों में इलाज, जांच, दवाओं और आपात सेवाओं की गुणवत्ता लगातार बेहतर होनी चाहिए. साथ ही, मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग संस्थानों और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को आधुनिक तकनीक, बेहतर मानव संसाधन और प्रभावी प्रबंधन से सशक्त बनाया जाए.

27,668 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं

सीएम योगी ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य केवल संस्थान बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रदेश को प्रशिक्षित चिकित्सक, विशेषज्ञ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध कराना है. उन्होंने मेडिकल संस्थानों में आधुनिक उपकरणों, विशेषज्ञ फैकल्टी और रिसर्च गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए. बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 108 जनपदीय चिकित्सालय, 106 विशिष्ट चिकित्सालय, 976 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 3757 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 27,668 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं. वर्ष 2025-26 में सरकारी अस्पतालों में 26.41 करोड़ ओपीडी सेवाएं और 1.23 करोड़ आईपीडी सेवाएं दी गईं, जबकि 24.33 करोड़ पैथोलॉजी जांच की गईं. वर्ष 2016-17 की तुलना में सत्र 2025-26 तक प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 44 से बढ़कर 83 हो गई है, जो 88.6 प्रतिशत की वृद्धि है.

सीटों की संख्या 1344 से बढ़कर 5067 हो गई

विगत 10 वर्षों में पीजी सीटों की संख्या 1344 से बढ़कर 5067 हो गई है, जबकि एमबीबीएस सीटें 5390 से बढ़कर 12800 तक पहुंच गई हैं. सुपर स्पेशियलिटी सीटों में भी लगभग 165 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है. नर्सिंग शिक्षा के विस्तार की जानकारी देते हुए बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 652 नर्सिंग संस्थान संचालित हैं. एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग और अन्य पाठ्यक्रमों की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा राज्य में लगभग 3.95 लाख पंजीकृत नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध हैं.

सुधारों की जानकारी भी दी गई

‘मिशन निरामया 1.0’ के तहत नर्सिंग शिक्षा में हुए सुधारों की जानकारी भी दी गई. बताया गया कि 17 हजार स्कूलों में परामर्श सत्र आयोजित किए गए तथा 3.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई गई. 10,570 नर्सिंग संकाय सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों का सबसे बड़ा सहारा बन रही है. उन्होंने क्लेम दावों का तय समय सीमा में निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि अस्पतालों को समय पर भुगतान होता रहेगा तो मरीजों को बेहतर सुविधा मिलती रहेगी.

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 6,480 अस्पताल योजना से जुड़े हैं और अब तक 96.75 लाख से अधिक निशुल्क उपचार किए जा चुके हैं. मुख्यमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना में आयुष पद्धतियों को भी शामिल करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पद्धतियों की आईपीडी सेवाओं को भी योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए.

स्रोत-आईएएनएस

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