पश्चिम बंगाल में सोमवार को होगा मंत्रिमंडल विस्तार, 35 मंत्री लेंगे शपथ, सीएम शुभेंदु अधिकारी ने दी जानकारी
पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार के गठन को लेकर चल रहा इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। सोमवार को शुभेंदु अधिकारी कैबिनेट का विस्तार होगा और 35 नए मंत्रियों को पद की शपथ दिलाई जाएगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि राज्य मंत्रिपरिषद का विस्तार किया जाएगा और 35 नए मंत्री शपथ लेंगे। यह शपथ ग्रहण समारोह सोमवार सुबह 11 बजे लोक भवन में आयोजित होगा। इस दौरान राज्यपाल आरएन रवि सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इस विस्तार के साथ ही पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार अपनी प्रशासनिक टीम को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है।
दरअसल, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसी साल 9 मई को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव दर्ज हुआ था। यह पहला मौका था जब भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में पूर्ण बहुमत के साथ अपनी सरकार बनाई। बीजेपी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में स्पष्ट बहुमत हासिल करके तृणमूल कांग्रेस के पिछले 15 सालों के शासन का अंत किया था, जो राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यह जीत बीजेपी के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी और इसने राज्य में एक नई राजनीतिक दिशा तय की थी। अब यह मंत्रिमंडल विस्तार उसी दिशा में एक अगला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो सरकार को और अधिक व्यापक और स्थिर बनाएगा।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ पांच मंत्रियों ने ली थी शपथ
शुभेंदु अधिकारी के साथ कितने मंत्रियों ने ली थी शपथ, यह भी जानना महत्वपूर्ण है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आर एन रवि ने शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी। उस समय उनके साथ पांच अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी। इन पांच मंत्रियों में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। ये पांच नेता उस प्रारंभिक टीम का हिस्सा थे जिन्होंने नई बीजेपी सरकार की नींव रखी थी। अब नए 35 मंत्रियों के शपथ लेने के बाद राज्य के मंत्रिपरिषद का आकार काफी बड़ा हो जाएगा और सरकार को विभिन्न विभागों में काम करने के लिए अधिक अनुभवी और नए चेहरे मिलेंगे, जिससे प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि होगी।
कैबिनेट विस्तार से सरकार की टीम होगी और मजबूत
अब मंत्रिमंडल विस्तार के साथ बीजेपी सरकार प्रशासनिक स्तर पर अपनी टीम को और मजबूत करने की तैयारी में है। राजनीतिक जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि नए मंत्रियों को शामिल करके सरकार विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की कोशिश करेगी। यह कदम न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि राज्य के हर कोने से लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने में भी मदद करेगा। लोक भवन में होने वाला यह शपथ ग्रहण समारोह पश्चिम बंगाल की नई बीजेपी सरकार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। यह सरकार की भविष्य की दिशा और राज्य के विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाएगा। इस विस्तार से यह भी उम्मीद की जा रही है कि विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों से आने वाले मंत्री सरकार को और अधिक समावेशी बनाएंगे और राज्य के संतुलित विकास में योगदान देंगे। कुल मिलाकर, यह मंत्रिमंडल विस्तार शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को और अधिक स्थिरता और शक्ति प्रदान करेगा, जिससे वे अपने चुनावी वादों को पूरा करने और राज्य में विकास को गति देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेंगे।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सोमवार से शुरू होगी अंतिम दौर की वार्ता, इन मुद्दों पर टिकी सभी की निगाहें
भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार से राजधानी दिल्ली में चार दिवसीय महत्वपूर्ण वार्ता का दौर शुरू होने जा रही है। दरअसल दोनों प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के बीच लंबे समय से चल रही इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य एक द्विपक्षीय व्यापारिक समझौते या एक अंतरिम व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा को कानूनी जामा पहनाना है। यह बैठक दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
दरअसल इस उच्च स्तरीय वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं, जो व्यापारिक समझौतों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वहीं, भारत की ओर से वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन मुख्य वार्ताकार की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह महत्वपूर्ण बातचीत 1 जून से शुरू होकर 4 जून तक चलेगी, जिसमें दोनों पक्ष गहन विचार-विमर्श करेंगे।
इन मुद्दों पर होगी विस्तार से चर्चा
वहीं वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, दोनों पक्ष समझौते को अंतिम रूप देने के लिए व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत कई प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तार से बातचीत करेंगे। इनमें बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दे, गैर-टैरिफ उपाय, सीमा शुल्क संबंधी प्रक्रियाओं का सरलीकरण, व्यापार और व्यवसाय सुगमता, विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के अवसर और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं। इन सभी पहलुओं पर गहन मंथन किया जाएगा।
इससे पहले, 7 फरवरी को भारत और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी किया था, जिसने इस व्यापारिक समझौते की नींव रखी थी। उस बयान में द्विपक्षीय व्यापारिक समझौते या एक अंतरिम व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा या ढांचे को अंतिम रूप दिया गया था। अब, वर्तमान वार्ता का लक्ष्य उस सैद्धांतिक सौदे को कानूनी रूप से बाध्यकारी स्वरूप देना है। इस ढांचे ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रतिबद्धता की पुष्टि की थी और भविष्य के सहयोग का मार्ग प्रशस्त किया था।
टैरिफ पर मिल सकती है भारत को राहत?
दरअसल फरवरी में तय किए गए ढांचे के अनुसार, अमेरिका ने भारत में लगने वाले कुछ टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर अपनी सहमति जताई थी। यह भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत हो सकती है। गौरतलब है कि अमेरिका ने इससे पहले रूसी तेल खरीदने के कारण भारतीय सामानों पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को हटा दिया था। उस समय समझौते के तहत इस 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत किया जाना प्रस्तावित था।
वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी व्यापार नीति में हालिया बदलाव भी इन वार्ताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। 20 फरवरी को अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द कर दिया था। ये टैरिफ 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट के तहत लगाए गए थे। इसके ठीक बाद, 24 फरवरी को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ने 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसने वैश्विक व्यापार जगत में चिंता बढ़ा दी थी। इन्हीं सभी जटिल व्यापारिक चर्चाओं को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच एक स्थायी और लाभकारी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका का एक उच्च स्तरीय दल 1 जून से 4 जून तक भारत में मौजूद रहेगा, जो इन मसलों पर गहन विचार-विमर्श करेगा।
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