IPL ट्रॉफी में संस्कृत भाषा में क्या लिखा हुआ है? क्रिकेट फैन को जरूर होना चाहिए पता
2008 में इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत हुई थी, जिसकी तर्ज पर दुनियाभर में आज क्रिकेट के खेल में फ्रेंचाइजी लीग खेली जा रही हैं. आईपीएल में युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका मिलता है. हर सीजन कई युवा खिलाड़ी अपना जलवा दिखाते हैं और हर किसी का दिल जीतते हैं. आईपीएल 2026 की बात करें, तो 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की और हर किसी को अपना फैन बना लिया. आईपीएल की शुरुआत ही युवा खिलाड़ियों को मंच देने के उद्देश्य के साथ हुई थी. इस ट्रॉफी पर भी एक खास मैसेज लिखा है, जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं. तो आइए आपको इस आर्टिकल में ट्रॉफी पर लिखे उस खास मैसेज के बारे में बताते हैं...
IPL Trophy पर संस्कृत में क्या लिखा है?
2008 से शुरू हुई इंडियन प्रीमियर लीग साल दर साल ग्रोथ कर रही है. इस लीग में 10 टीमें हिस्सा लेती हैं और 2 महीने तक आपस में भिड़ती हैं. तब जाकर विनर को चमचमाती हुई आईपीएल ट्रॉफी दी जाती है. इस आईपीएल ट्रॉफी में संस्कृत में कुछ शब्द लिखे होते हैं, जिसके बारे में जानकर आप भी इस टूर्नामेंट के उद्देश्य को समझ सकते हैं.
संस्कृत में लिखे शब्दों का संबंध टूर्नामेंट से है. ट्रॉफी पर संस्कृत में लिखा है, यत्र प्रतिभा अवसरा प्राप्तोतिहि, इसका मतलब है कि जहां प्रतिभा और अवसर का मिलन होता है.
आईपीएल ट्रॉफी किस धातु की बनी होती है?
कैशरिच लीग के नाम से मशहूर आईपीएल में खेलने वाले खिलाड़ियों की सैलरी करोड़ों-लाखों में होती है. इस फ्रेंचाइजी लीग में एक फ्रेंचाइजी को अपनी टीम बनाने के लिए 120 करोड़ रुपये खर्च करने की आजादी होती है. ऐसे में 10 टीमों की जंग के बाद जो टीम ट्रॉफी उठाती है, उसे प्राइज मनी में भी 20 करोड़ रुपये मिलते हैं. तो सवाल उठता है कि इस ट्रॉफी की कीमत भला क्या होगी?
ट्रॉफी की कीमत के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी तो नहीं है, लेकिन रिपोर्ट्स की मानें, तो हर साल विनर को मिलने वाली उस ट्रॉफी सोने और चांदी से बनी हुई है. मगर, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस ट्रॉफी की कीमत 30 से 50 लाख रुपये के करीब है.
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— IndianPremierLeague (@IPL) May 31, 2026
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कौन अपने पास रखता है ट्रॉफी
BCCI की ओर से IPL सीजन जीतने वाले कैप्टन को ट्रॉफी सौंपी जाती है. लेकिन, कम ही लोग इस बात को जानते हैं कि जश्न मनाने के बाद बोर्ड इस ट्रॉफी को वापस ले लेता है और विनर टीम को इसकी रेप्लिका दे दी जाती है. अगर आप ट्रॉफी को गौर से देखें, तो नीचे हर सीजन की चैंपियन टीम का नाम लिखा होता है. चैंपियन टीम का नाम मेटल के स्टिकर से ट्रॉफी में लगा दिया जाता है.
IPL 2026 के फाइनल में RCB VS GT की टक्कर
इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का फाइनल मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु बनाम गुजरात टाइटंस के बीच खेला जाने वाला है. ये मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा, जिसपर हर किसी की नजरें टिकी हुई हैं. इस मैच को जीतने वाली टीम ट्रॉफी उठाएगी, तो वहीं हारने वाली टीम रनरअप बनाकर रह जाएगी. आपको बता दें, RCB और GT दोनों ने ही एक-एक बार आईपीएल ट्रॉफी जीती हैं. ऐसे में जीतने वाली टीम दूसरी बार खिताब उठाएगी. देखने वाली बात होगी कि अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आज क्या होगा और कौन सी टीम जीतेगी.
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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप: 2 और मासूमों की मौत, अब तक 585 ने गंवाई जान
ढाका, 31 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे के मिलते-जुलते लक्षणों के कारण 2 और बच्चों ने दम तोड़ दिया। इस तरह 15 मार्च 2026 से अब तक मृतकों की कुल संख्या 585 हो गई है, स्थानीय मीडिया ने इसकी जानकारी दी।
ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय (डीजीएचएस) की ओर से बताया गया कि पिछले 24 घंटों में (शनिवार से रविवार सुबह 8 बजे तक) दोनों मौत खसरे के मिलते-जुलते लक्षणों की वजह से हुई हैं। ये आंकड़े देश भर से जुटाए गए हैं।
इसी हफ्ते की शुरुआत में बुधवार और गुरुवार को 5-5 बच्चों की जान गई थी, वहीं मंगलवार को ये आंकड़ा 10 था।
यूएनबी के अनुसार इसके साथ ही खसरे से मिलते-जुलते लक्षणों से मौत का आंकड़ा 495 हो गया है। वहीं 90 की मौत खसरे से कंफर्म की गई है।
डीजीएचएस की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि, पिछले 24 घंटों में 1,324 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 70,936 तक पहुंच गई। इसी अवधि में 53 नए पुष्टि किए गए मामले भी दर्ज हुए, जिसके बाद कुल पुष्ट मामलों की संख्या 9,049 हो गई है।
15 मार्च से अब तक खसरे से मिलते-जुलते लक्षणों वाले 56,886 मरीजों (बच्चों) को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 52,841 ठीक होकर घर लौट चुके हैं।
बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सरकार ने अप्रैल में देशव्यापी आपातकालीन खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान शुरू किया था। इस अभियान के तहत 6 महीने से 5 साल तक के लगभग 18 मिलियन बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा डब्ल्यूएचओ, यूनीसेफ और टीका और प्रतिरक्षा के लिए गठित वैश्विक गठबंधन (जीएवीआई-गावी) के सहयोग से चलाया गया था।
हाल ही में यूनिसेफ ने दावा किया कि अंतरिम सरकार के 18 महीने के कार्यकाल में उन्होंने बार-बार चेताया था कि अगर उचित कदम नहीं उठाए गए तो परिणाम भयावह हो सकते हैं।
--आईएएनएस
केआर/
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