Tripura Chit Fund Scam: त्रिपुरा के बहुचर्चित चिट फंड घोटाले में CBI की विशेष अदालत ने एक निजी कंपनी और उसके तीन वरिष्ठ अधिकारियों को दोषी करार देते हुए छह-छह वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है. पश्चिम त्रिपुरा जिला स्थित CBI कोर्ट ने 30 मई 2026 को M/s Pragati Sheel Infra Projects & Services Limited तथा उसके CMD अरिंदम दास, निदेशक परितोष दास और प्रशासनिक निदेशक दीपशिखा चक्रवर्ती को दोषी ठहराया. अदालत ने तीनों दोषियों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जबकि कंपनी पर 7 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है.
2012 में दर्ज एक केस से जुड़ा है मामला
मामला वर्ष 2012 में दर्ज कैलाशहर थाने के एक केस से जुड़ा है. त्रिपुरा सरकार और केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की अधिसूचनाओं के आधार पर CBI ने 8 अक्टूबर 2013 को मामले को पुनः दर्ज कर जांच शुरू की थी. आरोप था कि कंपनी और उसके अधिकारियों ने निवेशकों को धन वापसी का झांसा देकर करोड़ों रुपये जमा कराए और बाद में लगभग 5 से 6 करोड़ रुपये का गबन कर लिया.
3 अधिकारियों के खिलाफ दर्ज हुई थी चार्जशीट
जांच पूरी होने के बाद CBI ने 28 मई 2018 को कंपनी और उसके तीन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. सुनवाई के दौरान आरोप साबित होने पर अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सज़ा सुनाई.
सक्षम अधिकारियों को सौंपी जाए जुर्माने की राशि
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि दोषियों से वसूले गए जुर्माने की राशि सक्षम अधिकारियों को सौंपी जाए, ताकि उसे उनाकोटी ज़िले के जिलाधिकारी एवं कलेक्टर के माध्यम से पीड़ित जमाकर्ताओं में आनुपातिक रूप से वितरित किया जा सके. इसके अलावा, कोर्ट ने सक्षम अधिकारियों से कुर्क की गई संपत्तियों से यथासंभव धन की वसूली कर उसे उन निवेशकों में बांटने को कहा है, जिन्हें अब तक अपनी जमा राशि वापस नहीं मिल सकी है.
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