भारत सरकार की तरफ से देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाए गए जनरल एन एस राजा सुब्रमणि ने आधिकारिक तौर पर अपना काम संभाल लिया है। वे पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान की जगह ले रहे हैं। इससे पहले वे राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में देश की सुरक्षा रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे थे। अब नए सीडीएस के ऊपर तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने और सेना को आधुनिक बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
पीएम के विजन 'JAI' को करेंगे पूरा
नया पदभार संभालते हुए जनरल सुब्रमणि ने कहा, "मैं यह जिम्मेदारी मिलने पर बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं। भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और रक्षा मंत्रालय मिलकर देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। हम प्रधानमंत्री के विजन 'JAI' यानी जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।" उन्होंने आगे कहा कि सेना को आत्मनिर्भर बनाना हमारी सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है और हम स्वदेशी हथियारों को बढ़ावा देंगे।
पढ़ाई-लिखाई में भी रहे हैं आगे
14 दिसंबर 1985 को 'गढ़वाल राइफल्स' की 8वीं बटालियन में शामिल होने वाले जनरल सुब्रमणि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी के छात्र रहे हैं। उन्होंने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी सैन्य शिक्षा हासिल की है। वे ब्रिटेन के जॉइंट सर्विसेज कमांड स्टाफ कॉलेज से पढ़े हैं। उनके पास किंग्स कॉलेज लंदन से एमए और मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस स्टडीज में एम.फिल की डिग्रियां हैं।
चीन और पाकिस्तान बॉर्डर का लंबा अनुभव
जनरल सुब्रमणि को भारत की सबसे संवेदनशील और मुश्किल सीमाओं पर सेना का नेतृत्व करने का बहुत लंबा अनुभव है। उन्होंने असम में उग्रवाद के खिलाफ चले 'ऑपरेशन राइनो' में कमान संभाली थी। इसके अलावा उन्होंने जम्मू-कश्मीर में इन्फैंट्री ब्रिगेड और सेंट्रल सेक्टर में माउंटेन डिवीजन का नेतृत्व भी किया है। उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना की मुख्य स्ट्राइक कोर '2 कोर' की कमान संभालना शामिल है। वे उप थल सेनाध्यक्ष भी रह चुके हैं।
विदेशी मामलों और खुफिया विभाग के एक्सपर्ट
फील्ड में सेना का नेतृत्व करने के साथ-साथ जनरल सुब्रमणि ने कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक पदों पर भी काम किया है। वे कजाकिस्तान में भारत के डिफेंस अटाशे (सैन्य दूत) के रूप में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने रक्षा मंत्रालय के मिलिट्री इंटेलिजेंस के उप महानिदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं। उत्तरी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रहते हुए उन्होंने चीन और पाकिस्तान दोनों सीमाओं की चुनौतियों को बहुत करीब से देखा है।
सर्वोच्च सैन्य सम्मानों से नवाजे गए
देश के प्रति उनकी शानदार और समर्पित सेवा के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा कई बड़े सैन्य सम्मान दिए जा चुके हैं। इनमें परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक शामिल हैं।
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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद विपक्षी नेताओं में भारी नाराजगी है। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने खुद उन्हें फोन किया और अभिषेक बनर्जी के इलाज के लिए हर संभव मदद की पेशकश की। ममता बनर्जी के मुताबिक, राहुल ने उन्हें पूरा साथ देने का भरोसा दिलाया है।
हैदराबाद में भी करा सकते हैं इलाज
शनिवार देर रात पत्रकारों से बात करते हुए ममता बनर्जी ने राहुल गांधी से हुई बातचीत की जानकारी दी। ममता बनर्जी ने कहा, "राहुल गांधी ने मुझे फोन किया और कहा कि अगर किसी भी चीज की जरूरत हो, तो मैं उन्हें बता सकती हूं। उन्होंने यहां तक कहा कि वे अभिषेक बनर्जी को इलाज के लिए हैदराबाद या किसी भी दूसरी जगह ले जा सकते हैं।"
पीड़ितों से मिलने गए थे अभिषेक
यह पूरी घटना तब हुई जब अभिषेक बनर्जी दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर इलाके में चुनाव के बाद हुई हिंसा के शिकार परिवारों से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान स्थानीय लोगों और प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उन पर कथित तौर पर हमला कर दिया।
सुरक्षा घेरे में फटी शर्ट
सोनारपुर से सामने आए वीडियो में साफ दिख रहा है कि उग्र प्रदर्शनकारी टीएमसी नेता पर पत्थर, अंडे और जूते फेंक रहे हैं। इस धक्का-मुक्की और हंगामे के बीच अभिषेक बनर्जी की शर्ट भी फट गई। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह उन्हें सुरक्षित घेरे में लिया और इलाके से बाहर निकाला।
हमले को बताया सोची-समझी साजिश
इस हमले को लेकर अभिषेक बनर्जी ने खुद बयान दिया है और इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। मौके पर पर्याप्त पुलिस न होने पर सवाल उठाते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा, "देखिए उन्होंने मेरे साथ क्या किया है। यह सब पहले से तय था। इलाके में कोई पुलिस मौजूद नहीं थी। वे मुझे मारना चाहते हैं।"
अस्पतालों और डॉक्टरों पर दबाव का आरोप
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मामले में एक और गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि घटना के बाद अभिषेक बनर्जी को इलाज न मिल सके, इसके लिए अस्पतालों और डॉक्टरों पर दबाव बनाया जा रहा है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा, "सत्ता में बैठे लोग सभी अस्पतालों और बड़े अधिकारियों को धमका रहे हैं कि अभिषेक बनर्जी को भर्ती न किया जाए। जब मैं अस्पताल के एडमिनिस्ट्रेटर के साथ बैठी थी, तो उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें पुलिस से धमकी भरे फोन आ रहे थे। डॉक्टर दुखी हैं, लेकिन वे दबाव में हैं।"
राहुल गांधी ने कहा, यह लोकतंत्र पर हमला है
दूसरी तरफ, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस हमले की कड़ी निंदा की। राहुल गांधी ने लिखा, "सोनारपुर में सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला बेहद निंदनीय है। किसी सांसद पर हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं है। यह उन लोगों पर हमला है जिन्होंने उन्हें चुना है, और उस लोकतंत्र पर हमला है जो हमारी साझा विरासत है। यह भाजपा की बदले की राजनीति का गंदा चेहरा है। राजनीतिक मतभेद कभी भी हिंसा को सही नहीं ठहरा सकते।" उन्होंने केंद्र और बंगाल सरकार से दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की।
भाजपा ने नकारे आरोप
इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, तो वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे 'बड़ी साजिश' बताते हुए भाजपा पर हिंसक राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि इसमें पार्टी की कोई भूमिका नहीं है, यह टीएमसी के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा हो सकता है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी शांति की अपील की है।
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