पीएम स्वनिधि योजना के तहत 75.5 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को मिले 112 लाख से ज्यादा लोन
नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत अब तक 75.5 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर्स) ने 112 लाख से ज्यादा लोन का लाभ उठाया है।
देश भर के रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को 17,800 करोड़ रुपए से अधिक के लोन वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा लाभार्थियों को ब्याज सब्सिडी और डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपए भी प्राप्त हुए हैं।
योजना के लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि करीब 70 प्रतिशत लाभार्थी वंचित और कमजोर वर्गों से आते हैं। बयान के अनुसार, इस योजना ने सूक्ष्म उद्यमों, स्थानीय आपूर्ति शृंखलाओं और शहरी स्थानीय निकायों के साथ रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के एकीकरण को मजबूत किया है।
पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान की गई थी, ताकि उन रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर्स) को किफायती कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जा सके, जिनका कारोबार महामारी से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था।
रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए विशेष रूप से शुरू की गई यह देश की पहली सूक्ष्म ऋण योजना थी। असंगठित क्षेत्र के इस बड़े वर्ग की औपचारिक ऋण व्यवस्था तक सीमित पहुंच को देखते हुए, योजना का उद्देश्य उनके कारोबार को बढ़ावा देना और वित्तीय समावेशन को मजबूत करना था।
योजना की उपलब्धियों और इसके सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना का पुनर्गठन और विस्तार करने को मंजूरी दी है। अब इस योजना के तहत ऋण वितरण की अवधि मार्च 2030 तक बढ़ा दी गई है।
इस योजना के तहत वे सभी लोग पात्र हैं जो सड़क, फुटपाथ, पगडंडी या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अस्थायी ढांचे के माध्यम से अथवा घूम-घूमकर दैनिक उपयोग की वस्तुएं, खाद्य पदार्थ या अन्य सामान बेचते हैं या सेवाएं प्रदान करते हैं। इनमें सब्जी, फल और तैयार खाद्य पदार्थ बेचने वाले विक्रेता तथा नाई, मोची और कपड़ा धुलाई जैसी सेवाएं देने वाले लोग शामिल हैं।
योजना के तहत रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना किसी गारंटी के 15,000 रुपए, 25,000 रुपए और 50,000 रुपए तक के कार्यशील पूंजी लोन चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराए जाते हैं।
इसके साथ ही योजना में ब्याज सब्सिडी, ऋण गारंटी सहायता और पात्र विक्रेताओं को 30,000 रुपए तक की सीमा वाले यूपीआई से जुड़े रुपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी दी जाती है।
पीएम स्वनिधि योजना समय पर और जल्दी ऋण चुकाने को प्रोत्साहित करती है। इसके तहत लाभार्थियों को प्रतिवर्ष 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाती है। समय पर ऋण चुकाने वाले विक्रेता अगले चरण में अधिक राशि के ऋण के लिए भी पात्र हो जाते हैं।
योजना डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए 1,600 रुपए तक के कैशबैक प्रोत्साहन और वित्तीय साक्षरता सहायता भी प्रदान करती है। अब तक 55 लाख से अधिक विक्रेताओं ने करीब 8.96 लाख करोड़ रुपए मूल्य के 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेन-देन किए हैं।
योजना के तहत भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के सहयोग से वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता और खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जाता है। अब तक लगभग 6 लाख स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
1 जून से पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात शुल्क में बदलाव, घरेलू ईंधन दरें अपरिवर्तित
नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने 1 जून से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर लगने वाले निर्यात शुल्क में संशोधन किया है।
एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क 1.5 रुपए प्रति लीटर, डीजल के निर्यात पर 13.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ के निर्यात पर 9.5 रुपए प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।
हालांकि, सरकार ने घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली उत्पाद शुल्क के दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
अधिसूचना के अनुसार, नई दरें कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की अंतरराष्ट्रीय औसत कीमतों को ध्यान में रखते हुए तय की गई हैं, जो पिछली समीक्षा के बाद की अवधि में प्रचलित थीं।
पश्चिम एशिया संकट के बीच देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और निर्यात को नियंत्रित करने के उद्देश्य से 27 मार्च 2026 को इन निर्यात शुल्कों को लागू किया गया था। इससे पहले आखिरी संशोधन 16 मई 2026 से प्रभावी हुआ था।
16 मई को सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात कर में बदलाव करते हुए पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपए प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) लगाया था, जबकि डीजल पर शुल्क घटाकर 16.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया था।
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया था कि पेट्रोल निर्यात पर 3 रुपए प्रति लीटर की नई दर लागू होगी, जबकि डीजल पर शुल्क 16.5 रुपए प्रति लीटर निर्धारित किया गया था। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर सड़क एवं अवसंरचना उपकर को शून्य कर दिया गया था। घरेलू ईंधन कर दरों में तब भी कोई बदलाव नहीं किया गया था।
इससे पहले डीजल पर निर्यात शुल्क में कई बार बदलाव किया गया। 26 मार्च को इसे 21.50 रुपए प्रति लीटर तय किया गया था, जिसे 11 अप्रैल को बढ़ाकर 55.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया। बाद में 30 अप्रैल को इसे घटाकर 23 रुपए प्रति लीटर किया गया और अब इसे और कम करके 13.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है।
इसी तरह एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर भी शुल्क में कई बदलाव हुए। शुरुआत में यह 29.5 रुपए प्रति लीटर था, जिसे बढ़ाकर 42 रुपए प्रति लीटर किया गया। बाद में इसे घटाकर 33 रुपए प्रति लीटर किया गया और अब इसे और कम करके 9.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है।
पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक तेल बाजार में आई अस्थिरता के बीच देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और निर्यात को नियंत्रित करने के लिए यह विंडफॉल टैक्स व्यवस्था लागू की गई थी।
--आईएएनएस
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