Reaction @Insta: राघव चड्ढा के फॉलोअर्स क्यों घटे? सोशल मीडिया पर यूजर्स का बदला रुख
दिल्ली की सियासत में शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला, जब राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने आम आदमी पार्टी (AAP) का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। उनके साथ 6 अन्य राज्यसभा सांसदों के भी पाला बदलने से AAP को बड़ा झटका लगा है।
इस घटनाक्रम ने न सिर्फ पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा दी है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी उसका असर साफ दिखने लगा है। राघव चड्ढा का यह फैसला उनके समर्थकों को कुछ खास पसंद नहीं आया। जिसके चलते 24 घंटे के भीतर उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में 13 लाख से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
इंस्टा फॉलोअर्स में आई बड़ी गिरावट
राजनीति में दल बदल आम है, लेकिन इस बार कहानी सिर्फ राजनीतिक नहीं रही- यह सीधे डिजिटल दुनिया में लोगों की भावनाओं से जुड़ गई। क्योंकि राघव चड्ढा को युवाओं के बीच सबसे ‘रिलेटेबल’ नेताओं में गिना जाता था, लेकिन उनके इस फैसले के बाद Gen Z यूजर्स ने अचानक इंस्टा पर राघव को अनफॉलो करना शुरू कर दिया। जिसके चलते 24 घंटे के भीतर ही राघव चड्ढा के फॉलोअर्स करीब 13 लाख से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार को राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम पर 14.6 मिलियन फॉलोअर्स थे, जो शनिवार 4:21 बजे तक घटकर 13.3 मिलियन रह गए। यानी एक दिन से भी कम समय में उनके फॉलोअर बेस में बड़ी कमी आई। इसके अलावा, एक्स (x) पर #unfollowRaghavChadha जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे और उनके पोस्ट्स पर आलोचनात्मक कमेंट्स की बाढ़ आ गई।
‘हीरो से ज़ीरो’ वाला इंटरनेट रिएक्शन
इस बीच एनसीपी नेता Anish Gawande ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि इंस्टाग्राम पर चल रहे Gen Z के “अनफॉलो” ट्रेंड का सीधा असर Raghav Chadha की फॉलोइंग पर पड़ा है। उनके मुताबिक, महज 24 घंटे के भीतर करीब 10 लाख यूजर्स ने उन्हें अनफॉलो कर दिया।
A viral GenZ “unfollow” campaign on Instagram has led to Raghav Chadha’s followers dropping by 10 lakhs in 24 hours.
— Anish Gawande (@anishgawande) April 25, 2026
The internet can make you a hero overnight. The internet can also bring you down to zero overnight …
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल दौर में पॉपुलैरिटी पलभर में बदल सकती है- इंटरनेट किसी को रातोंरात स्टार बना देता है और उतनी ही तेजी से उसे नीचे भी ले आता है।
युवाओं के बीच राघव ने बनाई अलग इमेज
राघव चड्ढा ने अपनी पहचान सिर्फ एक नेता के तौर पर नहीं, बल्कि ऐसे युवा चेहरे के रूप में बनाई थी जो रोजमर्रा के मुद्दों पर खुलकर बात करता था- चाहे वह ट्रैफिक हो, डेटा लिमिट हो या फिर महंगे एयरपोर्ट फूड की शिकायत। यही वजह थी कि सोशल मीडिया पर उनकी फॉलोइंग सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि एक जुड़ाव थी। लेकिन जैसे ही राजनीतिक रुख बदला, वही डिजिटल सपोर्ट तेजी से आलोचना में बदल गया।
आशा भोसले की लव-स्टोरी: पहले पति ने घर से निकाला, 6 साल छोटे आरडी बर्मन पर आया दिल; प्यार के खातिर परिवार से तोड़ा रिश्ता
Asha Bhosle-RD Burman love Story: 'पिया तू अब तो आजा', 'ओ हसीना ज़ुल्फों वाली', 'दम मारो दम', 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को'... और न जाने ऐसे कितने सुपरहिट गानों की झड़ी लगाने वाली आशा भोसले और आरडी बर्मन की जोड़ी ने संगीत की दुनिया में अपना जादू चलाया। इन सदाबहार गानों के पीछे आशा और बर्मन की लव स्टोरी भी छिपी हुई है जिससे वैसे तो कई लोग वाकिफ हैं, लेकिन इस प्यार के पीछे आशा ताई को मिला संघर्ष, विरोध और दर्द।
स्वर कोकिला लता मंगेशकर के परिवार से आने वालीं आशा भोसले की पर्सनल लाइफ भी कई मुश्किलों में गुजरी। 16 की उम्र में पहला प्यार मिला, शादी भी की लेकिन किस्मत के आगे किसा जोर चलता है। हालांकि आशा भोसेल को जब आरडी बर्मन से प्यार हुआ तो जैसे उनकी सच्चे प्यार की तलाश खत्म हो गई। जानिए इस मशूहर जोड़ी की लव स्टोरी...
16 साल की उम्र में घर से भागीं आशा भोसेल
आशा भोसले ने महज 16 साल की उम्र में एक ऐसा कदम उठाया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। वह अपनी बहन लता मंगेशकर के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले के प्यार में पड़ी। परिवार ने भारी विरोध किया तो उनसे अलग होने का फैसला लिया और घर से भागकर आशा ने गणपतराव भोसले से शादी रचा ली। उनके तीन बच्चे हुए लेकिन जिम्मेदारी और घरेलू तनाव के बीच उनका वैवाहिक जीवन धीरे-धीरे टूटने लगा।
बताया जाता है कि उनके पति उनपर हिंसक और अब्यूसिव व्यव्हार करते थे। वे अक्सर उन्हें काम करने से रोकते और पैसों को लेकर परेशान करते थे। आखिरकार 1960 में हालात इतने बिगड़ गए कि आशा भोसले को अपने तीन बच्चों के साथ घर छोड़ना पड़ा। इस मुश्किल दौर में उन्होंने हार नहीं मानी और अपने करियर पर पूरा ध्यान दिया।
करियर में मिली नई पहचान
इस दौर के बाद आशा भोसले का करियर तेजी से आगे बढ़ा। उन्होंने ‘वक्त’, ‘गुमराह’, ‘हमराज’ जैसी फिल्मों में गाने गाकर अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज में एक अलग अंदाज था, जिसने उन्हें अपनी बहन लता मंगेशकर से अलग पहचान दिलाई।
आर.डी. बर्मन के साथ मिला सच्चा प्यार
इसी दौरान उनकी जिंदगी में आए मशहूर संगीतकार राहुल देव बर्मन। दोनों की मुलाकात काम के दौरान हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया। उम्र में छोटे होने के बावजूद आर.डी. बर्मन ने उन्हें लंबे समय तक प्रपोज किया, लेकिन पहली शादी के अनुभव के कारण आशा तुरंत राजी नहीं हुईं।
काफी समय बाद दोनों ने 1980 में शादी कर ली। यह रिश्ता उनके जीवन का सबसे खूबसूरत अध्याय साबित हुआ। दोनों ने साथ मिलकर कई सुपरहिट गाने दिए और संगीत जगत में एक अलग मुकाम हासिल किया।
प्यार, दूरी और एक दर्दनाक विदाई
हालांकि, उनकी जिंदगी में दुख भी कम नहीं थे। 1980 के दशक के अंत में आर.डी. बर्मन की सेहत खराब रहने लगी और दोनों कुछ समय के लिए अलग हो गए। इसके बावजूद आशा भोसले हमेशा उनके साथ रहीं।
4 जनवरी 1994 को आर.डी. बर्मन का निधन हो गया, जिसने आशा भोसले को गहरा आघात पहुंचाया। इस सदमे के बाद भी उन्होंने खुद को संभाला और संगीत में वापसी की।
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