Rupee vs Dollar: भारतीय रुपया शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया पहली बार 96 प्रति डॉलर के अहम स्तर को पार कर गया। कारोबार के दौरान रुपया 96.14 प्रति डॉलर तक फिसल गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर है।
रुपये में यह गिरावट लगातार बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिका की सख्त आर्थिक नीति के संकेतों के कारण देखने को मिली। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.86 पर खुला था, लेकिन जल्द ही दबाव में आ गया और 50 पैसे टूटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
इससे पहले गुरुवार को भी रुपया 95.96 के रिकॉर्ड लो तक पहुंचा था, हालांकि बाद में मामूली सुधार के साथ 95.64 पर बंद हुआ था।
भारत की आयात लागत लगातार बढ़ रही विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की बढ़ती आयात लागत और खासतौर पर महंगे कच्चे तेल की वजह से रुपया एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया। ब्रेंट क्रूड की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है, जिससे भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ रहा।
डॉलर इंडेक्स लगातार चौथे सेशन में मजबूत हुआ वहीं, डॉलर इंडेक्स भी लगातार चौथे सत्र में मजबूत हुआ और 99.28 के स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों ने यह उम्मीद कम कर दी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरों में बड़ी कटौती करेगा। इससे डॉलर को और मजबूती मिली है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें 3 रुपये बढ़ीं इस बीच केंद्र सरकार ने भी महंगाई और बढ़ते दबाव को देखते हुए कई कदम उठाए हैं। शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। सरकार का मानना है कि इससे ईंधन की मांग को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
सरकार ने इससे पहले गोल्ड इंपोर्ट पर भी सख्ती बढ़ाई थी। ड्यूटी-फ्री गोल्ड इंपोर्ट को 100 किलोग्राम तक सीमित किया गया है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
मिडिल ईस्ट संकट ने बढ़ाई चिंता वैश्विक स्तर पर भी माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक से भी बाजार को कोई खास राहत नहीं मिली। ताइवान और ईरान से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
हालांकि शेयर बाजार ने शुरुआती कारोबार में कुछ मजबूती दिखाई। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती दौर में 239 अंक तक चढ़ा, लेकिन बाद में गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा जरूर दिया।
अब निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की चाल और सरकार के अगले कदमों पर टिकी हुई है, क्योंकि रुपया कमजोर होने का असर सीधे महंगाई और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
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