Bajrang punia reaction on vinesh phogat: भारतीय कुश्ती की स्टार पहलवान विनेश फोगाट की एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में हार के बाद, ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया उनके समर्थन में आगे आए हैं. बजरंग ने विनेश को हिम्मत न हारने और खेल अधिकारियों की मनमानी व तानाशाही के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखने की सलाह दी है. उन्होंने 'एक्स' पर भावुक पोस्ट साझा कर कहा कि एक ट्रायल का नतीजा विनेश के ऐतिहासिक योगदान को कम नहीं कर सकता और पूरा देश कुश्ती संघ के इस मौजूदा दौर को करीब से देख रहा है. नई दिल्ली. भारतीय कुश्ती के इतिहास में कई ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली स्टार महिला पहलवान विनेश फोगाट को उस समय एक बड़ा झटका लगा, जब एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में उनकी वापसी की कोशिशें अधूरी रह गईं. विनेश 53 किलोग्राम भारवर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में युवा पहलवान मीनाक्षी गोयत से 4-6 से हार गईं. इस अप्रत्याशित हार के साथ ही एशियाई खेलों की टीम में जगह बनाने की उनकी उम्मीदें फिलहाल खत्म हो गई हैं. इस मुश्किल घड़ी में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने वाले टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता बजरंग पूनिया ने विनेश का हौसला बढ़ाया है. बजरंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक बेहद भावुक और कड़ा संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने विनेश को एक सच्ची चैंपियन बताते हुए खेल अधिकारियों पर भी परोक्ष रूप से तीखा निशाना साधा. बजरंग पूनिया ने अपनी पोस्ट में विनेश के सालों के संघर्ष और देश के लिए जीते गए पदकों को याद किया. उन्होंने लिखा, 'विनेश फोगाट ने वर्षों तक देश के लिए लड़कर तिरंगे का मान बढ़ाया है. एक ट्रायल का नतीजा उनके योगदान को कम नहीं कर सकता. विनेश, अपना संघर्ष जारी रखो. एक चैंपियन हार से नहीं हारता, बल्कि हार मान लेने से हारता है.' बजंरग का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विनेश न केवल मैट पर बल्कि मैट के बाहर भी एक लंबी और थका देने वाली लड़ाई लड़ रही हैं. भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर चले लंबे विरोध प्रदर्शन में विनेश और बजरंग दोनों ही मुख्य चेहरा रहे हैं. खेल संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर उठाए सवालबजंरग पूनिया ने विनेश को सांत्वना देने के साथ-साथ भारतीय खेल व्यवस्था और कुश्ती महासंघ के अधिकारियों की कार्यप्रणाली की भी कड़ी आलोचना की. उन्होंने इशारों-इशारों में यह साफ कर दिया कि वर्तमान में रेसलिंग फेडरेशन के भीतर जो कुछ भी चल रहा है, वह खिलाड़ियों के हक में नहीं है. अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए पूनिया ने कहा, 'आज भारतीय कुश्ती में जो कुछ भी हो रहा है, पूरा देश उसे देख रहा है और समझ भी रहा है. एथलीटों के प्रति निष्पक्षता, सम्मान और पारदर्शिता हर खेल संस्था की जिम्मेदारी है.' भारतीय खेल गलियारों में इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं. जानकारों का मानना है कि बजरंग का यह गुस्सा सिर्फ एक मैच की हार को लेकर नहीं है, बल्कि उस मानसिक तनाव और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ है जिसका सामना इन शीर्ष पहलवानों को पिछले कुछ समय से लगातार करना पड़ रहा है. क्या विनेश की हार के पीछे मानसिक तनाव एक बड़ी वजह?विनेश फोगाट का मीनाक्षी गोयत के खिलाफ 4-6 से हारना कई खेल प्रेमियों के लिए चौंकाने वाला था. हालांकि, खेल विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक-डेढ़ साल से विनेश जिस तरह के प्रशासनिक और कानूनी विवादों से घिरी रही हैं, उसका असर उनकी ट्रेनिंग और मानसिक स्थिति पर पड़ना लाजिमी था. न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर हफ्तों तक बैठने और अदालतों के चक्कर काटने के कारण उन्हें मैट पर पसीना बहाने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका. इसके बावजूद, विनेश ने चयन ट्रायल में हिस्सा लेकर वापसी की पुरजोर कोशिश की. भले ही सेमीफाइनल में उनका सफर थम गया, लेकिन खेल प्रेमियों और बजरंग जैसे वरिष्ठ साथियों की नजर में उनका यह प्रयास ही उनकी अदम्य खेल भावना को दर्शाता है. खेल जगत में न्याय की मांग और भविष्य की राहबजरंग पूनिया के इस बयान ने एक बार फिर भारतीय खेल प्रशासकों की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर दिया है. खेल में राजनीति के दखल और एथलीटों के आत्मसम्मान की रक्षा का मुद्दा दोबारा गरमा गया है. बजरंग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई केवल एक पदक या एक टूर्नामेंट में चयन की नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए खेल के माहौल को सुरक्षित, पारदर्शी और सम्मानजनक बनाने की जंग है. विनेश फोगाट के लिए एशियाई खेलों का यह रास्ता भले ही बंद हो गया हो, लेकिन बजरंग की बातों से साफ है कि उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है. भारतीय खेल प्रेमी अब यह उम्मीद कर रहे हैं कि विनेश इस हार से उबरकर जल्द ही अखाड़े में वापसी करेंगी और व्यवस्था के खिलाफ अपनी इस न्याय की लड़ाई को भी अंजाम तक पहुंचाएंगी. Sat, 30 May 2026 23:13:09 +0530