केंद्र ने पीएम-सेतु योजना के तहत पहले स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट प्लान को दी मंजूरी
नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससी) ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम आईटीआई क्लस्टर के लिए स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह पीएम-सेतु यानी प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-एसईटीयू) योजना के तहत स्वीकृति पाने वाला पहला प्रस्ताव बन गया है। सरकार ने शनिवार को यह जानकारी दी।
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के अनुसार, यह प्रस्ताव आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया) द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश पीएम-सेतु के तहत उद्योग साझेदारी को लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है, जिसने एंकर इंडस्ट्री पार्टनर (एआईपी) को शामिल किया है।
यह मंजूरी मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संचालन समिति की तीसरी बैठक में दी गई।
यह स्वीकृति पीएम-सेतु के उस विजन को लागू करने की दिशा में पहला ठोस कदम है, जिसके तहत सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को उद्योग-प्रबंधित और परिणाम-आधारित संस्थानों में बदला जाना है। इसके लिए राज्य सरकारों और प्रमुख उद्योग समूहों के बीच साझेदारी की व्यवस्था की जाएगी।
बैठक की अध्यक्षता कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने की। बैठक में प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीटी) दिलीप कुमार, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, उद्योग संगठनों और विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
अधिकारियों ने कहा कि विशाखापट्टनम क्लस्टर को मिली मंजूरी पीएम-सेतु के तहत प्रस्तावित उद्योग-नेतृत्व वाले हब एंड स्पोक मॉडल को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल के रूप में काम करेगा, जो व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण में उद्योगों की भागीदारी बढ़ाना चाहते हैं।
इसके अलावा, राष्ट्रीय संचालन समिति ने विभिन्न राज्यों में पीएम-सेतु योजना की प्रगति की भी समीक्षा की और उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने, प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने, विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी) की वित्तीय स्थिरता सुधारने तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
सरकार के अनुसार, 60,000 करोड़ रुपए के बजट वाली पीएम-सेतु एक प्रमुख सरकारी योजना है, जिसका उद्देश्य 1,000 सरकारी आईटीआई को उद्योग-नेतृत्व वाले हब एंड स्पोक मॉडल के जरिए आधुनिक बनाना है। इस योजना में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, उद्योगों के साथ मजबूत जुड़ाव और युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।
मंत्रालय ने बताया कि अब तक 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने राज्य स्तरीय संचालन समितियों का गठन कर लिया है। वहीं, 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स के चयन के लिए उद्योगों से प्रस्ताव आमंत्रित करने हेतु रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) भी जारी कर दिए हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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भीख मांगने को मजबूर हुई ये एक्ट्रेस, मुंबई की सड़कों पर बेहाल देख पुलिस ने भेजा मेंटल हॉस्पिटल
Actress Mitali Sharma Started Begging: एक समय भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री और मॉडलिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाली पूर्व एक्ट्रेस मिताली शर्मा का जीवन कथित तौर पर ऐसे मोड़ पर पहुंच गया, जिसने मनोरंजन जगत और उनके फैंस को हैरान कर दिया. जी हां, कभी फिल्मों और ग्लैमर की दुनिया में भविष्य की उभरती हुई स्टार मानी जाने वाली मिताली शर्मा बाद के वर्षों में आर्थिक, सामाजिक और मानसिक परेशानियों से जूझती नजर आईं.
सपनों को लेकर मुंबई पहुंची थीं मिताली शर्मा
मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली मिताली शर्मा एक्ट्रेस बनने का सपना लेकर मुंबई आई थीं. शुरुआती दौर में उन्होंने मॉडलिंग और भोजपुरी फिल्मों में काम किया. बताया जाता है कि उनकी कुछ शुरुआती फिल्मों और प्रोजेक्ट्स ने उन्हें इंडस्ट्री में पहचान दिलाई थी. उस समय उन्हें एक ब्रिलियंट और संभावनाओं से भरपूर चेहरा माना जाता था और कई निर्माता-निर्देशक भी उन्हें अपने प्रोजेक्ट्स के लिए पसंद करते थे. हालांकि, मनोरंजन जगत में सफलता को लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं होता. समय के साथ उनके पास आने वाले फिल्मी ऑफर्स में कमी आने लगी. धीरे-धीरे काम कम होता गया और इंडस्ट्री में उनकी एक्टिविटी भी घटने लगी.
काम की कमी और आर्थिक संकट ने बढ़ाईं मुश्किलें
रिपोर्ट्स के अनुसार, लगातार कम होते प्रोजेक्ट्स और परमानेंट इनकम के अभाव ने मिताली शर्मा की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया. मुंबई जैसे महंगे शहर में जीवनयापन करना उनके लिए चुनौती बन गया. इसी दौरान वो अपने परिवार से भी दूर होती चली गईं, जिसके कारण उन्हें भावनात्मक और आर्थिक सहयोग पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल सका. करीबी लोगों का मानना है कि काम की कमी, असफलताओं का दबाव और अकेलेपन ने उनके जीवन पर गहरा असर डाला. धीरे-धीरे वो सामाजिक रूप से भी अलग-थलग पड़ने लगीं.
मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा असर
कथित तौर पर लगातार संघर्ष, अनिश्चित भविष्य और आर्थिक तंगी का असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा. रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि समय के साथ उनकी मानसिक स्थिति अस्थिर होती गई और वो सामान्य जीवन जीने में कठिनाइयों का सामना करने लगीं. मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बेरोजगारी, सामाजिक अलगाव और आर्थिक संकट किसी भी व्यक्ति के मानसिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं. मिताली शर्मा का मामला भी कथित तौर पर इसी तरह की परिस्थितियों से जुड़ा बताया गया.
लोखंडवाला की सड़कों पर मिलीं मिताली शर्मा
उनके जीवन का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि मिताली शर्मा मुंबई के लोखंडवाला इलाके में बेहद खराब हालत में देखी गईं. खबरों के मुताबिक, वो सड़क पर भटकती हुई और लोगों से मदद मांगती हुई नजर आई थीं. कभी कैमरों की चमक और फिल्मी दुनिया का हिस्सा रहीं मिताली की ये स्थिति देखकर स्थानीय लोग और उन्हें पहचानने वाले कई लोग हैरान रह गए. सोशल मीडिया और न्यूज़ मीडिया में भी ये मामला चर्चा का विषय बन गया.
पुलिस ने किया हस्तक्षेप
रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुंबई पुलिस ने हस्तक्षेप किया. बताया जाता है कि पुलिस ने उन्हें सड़क पर पाया और आवश्यक कार्रवाई के लिए अपने साथ ले गई. कुछ खबरों में ये भी दावा किया गया कि इस दौरान पुलिस और मिताली के बीच बहस जैसी स्थिति पैदा हुई थी. आरोप है कि जब एक महिला पुलिसकर्मी ने उन्हें नियंत्रित करने का प्रयास किया, तो उन्होंने विरोध किया और वहां से निकलने की कोशिश की.
पुलिस स्टेशन पहुंचकर मांगा खाना
खबरों के अनुसार, पुलिस स्टेशन ले जाए जाने के बाद मिताली शर्मा ने अधिकारियों से सबसे पहले खाना खाने की मांग की. उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी टेंशन में आ गए. बताया जाता है कि अधिकारियों ने इंसानियत के नाते उनकी मदद की और उनके लिए खाना और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं कीं. इसके बाद उनकी हेल्थ स्थिति को देखते हुए हॉस्पिटल की सहायता उपलब्ध कराई गई.
मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया भर्ती
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच और शुरूआती देखभाल के बाद अधिकारियों ने उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए मेंटल हेल्थ सेंटर भेजा. वहां विशेषज्ञों की निगरानी में उनका इलाज शुरू कराया गया. बताया जाता है कि उस समय उन्हें आर्थिक सहायता की भी आवश्यकता थी और संबंधित एजेंसियों ने उनकी मदद के लिए आवश्यक कदम उठाए.
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