कब, कहां और कितने बजे खेला जाएगा RCB VS GT के बीच फाइनल मैच, जानिए कहां देख सकेंगे LIVE एक्शन
RCB VS GT Final: इंडियन प्रीमियर लीग 2026 रोमांचक अंदाज में आगे बढ़ते हुए फाइनल तक आ पहुंचा है. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने क्वालीफायर 1 जीतकर फाइनल में पहुंची थी. तो वहीं दूसरे क्वालीफायर में राजस्थान रॉयल्स को हराकर गुजरात टाइटंस ने फाइनल तक का सफर तय किया. अब फाइनल मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस का आमना-सामना होने वाला है. तो आइए इस आर्टिकल में आपको आरसीबी बनाम जीटी के बीच खेले जाने वाले ग्रैंड फिनाले खेला जाएगा. आइए आपको इस मैच से जुड़ी डीटेल्स के बारे में बताते हैं...
RCB VS GT Final: कितनी तारीख को खेला जाएगा?
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु बनाम गुजरात टाइटंस के बीच IPL 2026 का फाइनल मैच खेला जाएगा. ये मैच 31 मई, रविवार को खेला जाएगा, जिसपर हर किसी की नजरें होंगी.
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RCB VS GT Final: कहां खेला जाएगा?
RCB VS GT के बीच खेला जाने वाला फाइनल मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा. यकीनन नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच पर
RCB VS GT Final: कितने बजे शुरू होगा मैच?
इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का फाइनल मैच आरसीबी बनाम जीटी के बीच होगा. अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रविवार को ये मुकाबला शाम 7.30 बजे से शुरू होगा. इसके टॉस के लिए दोनों कप्तान 7 बजे मैदान पर आएंगे.
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RCB VS GT Final: कहां लाइव देख सकेंगे?
RCB VS GT के बीच आईपीएल 2026 का फाइनल मैच आज खेला जाएगा. ये हाईवोल्टेज मुकाबला शाम 7:30 बजे से खेला जाएगा, जिसके टॉस के लिए दोनों कप्तान 7 बजे मैदान पर उतरेंगे. भारत में स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क और जियोहॉटस्टार ऐप पर इस मैच का सीधा प्रसारण देखा जा सकता है.
RCB VS GT Final: दोनों टीमों के स्क्वाड
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु : वेंकटेश अय्यर, विराट कोहली, देवदत्त पडिक्कल, रजत पाटीदार (कप्तान), जितेश शर्मा (विकेटकीपर), टिम डेविड, रोमारियो शेफर्ड, क्रुणाल पंड्या, भुवनेश्वर कुमार, सुयश शर्मा, जोश हेजलवुड, रसिख सलाम डार, फिलिप साल्ट, अभिनंदन सिंह, स्वप्निल सिंह, जॉर्डन कॉक्स, कनिष्क चौहान, जैकब डफी, रिचर्ड ग्लीसन, विक्की ओस्टवाल, विहान मल्होत्रा, मंगेश यादव, सात्विक देसवाल
गुजरात टाइटंस : साई सुदर्शन, शुबमन गिल (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, निशांत सिंधु, जेसन होल्डर, राशिद खान, कैगिसो रबाडा, अरशद खान, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, अनुज रावत, ग्लेन फिलिप्स, राहुल तेवतिया, कुलवंत खेजरोलिया, कुमार कुशाग्र, रविश्रीनिवासन साई किशोर, शाहरुख खान, ईशांत शर्मा, ल्यूक वुड, अशोक शर्मा। कॉनर एस्टरहुइज़न, गुरनूर बराड़, मानव सुथार, जयंत यादव
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पृथ्वी से ज्यादा गड्ढों से भरा है चंद्रमा, जानें क्यों नहीं मिटते क्रेटर्स के निशान
नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। 31 मई को आसमान में पूर्णिमा यानी फुल मून का सुंदर नजारा देखने को मिलेगा। चंद्रमा हमेशा से लोगों के लिए आकर्षण और जिज्ञासा का विषय रहा है। इसकी चमक, आकार में बदलाव और सतह पर दिखाई देने वाले गड्ढे (क्रेटर्स) अक्सर लोगों के मन में कई सवाल पैदा करते हैं। इन्हीं सवालों में से एक सबसे आम सवाल यह है कि चंद्रमा पर इतने अधिक गड्ढे क्यों दिखाई देते हैं, जबकि पृथ्वी पर ऐसे गड्ढे बहुत कम नजर आते हैं?
चंद्रमा को निहारेंगे तो उसकी सतह पर बने हजारों गड्ढे आसानी से दिखाई देंगे। चंद्रमा पर ये गड्ढे (क्रेटर्स) देखकर अक्सर सवाल उठता है कि आखिर ये इतने सारे गड्ढे चंद्रमा पर क्यों हैं, जबकि पृथ्वी पर 180 के करीब ही ज्ञात गड्ढे हैं? ऐसे में वैज्ञानिक बताते हैं कि चंद्रमा पर गड्ढों की भरमार का सबसे बड़ा कारण है कि वहां कोई वातावरण नहीं है। पृथ्वी और चंद्रमा दोनों ही पिछले 4.5 अरब सालों से अंतरिक्ष में उल्कापिंडों और क्षुद्रग्रहों के हमलों का शिकार रहे हैं। लेकिन पृथ्वी इन निशानों को मिटा देती है, जबकि चंद्रमा उन्हें सदियों तक संजोए रखता है।
पृथ्वी गड्ढों को क्यों मिटा देती है? पृथ्वी पर तीन प्रमुख प्रक्रियाएं गड्ढों को लगभग पूरी तरह नष्ट कर देती हैं। पहली प्रक्रिया - अपरदन, इसमें पृथ्वी पर हवा, बारिश, नदियां, समुद्र और पेड़-पौधे निरंतर काम करते रहते हैं। ये सब मिलकर चट्टानों को तोड़ते-घिसते रहते हैं। समय के साथ कोई भी गड्ढा धीरे-धीरे भर जाता है या पूरी तरह मिट जाता है। वहीं, चंद्रमा पर वायुमंडल नहीं है, इसलिए न हवा है, न पानी है और न मौसम। एक बार कोई उल्कापिंड टकरा जाए तो उसका निशान लाखों-करोड़ों साल तक वैसा ही बना रहता है। यही वजह है कि चंद्रमा पर एस्ट्रोनॉट्स के पैरों के निशान आज भी बरकरार हैं।
दूसरी प्रक्रिया प्लेट टेक्टोनिक्स है, जिसमें पृथ्वी की सतह लगातार हिलती-डुलती और नई चट्टानें बनती हैं, पुरानी चट्टानें अंदर धंस जाती हैं। इस वजह से पुराने गड्ढे दब जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं। चंद्रमा पर ऐसी कोई गतिविधि नहीं है। वहां अरबों साल से सतह स्थिर है, इसलिए गड्ढे जस के तस बने हुए हैं।
तीसरी प्रक्रिया ज्वालामुखी गतिविधि है। पृथ्वी पर ज्वालामुखी लावा निकालकर कई गड्ढों को ढक देते हैं। चंद्रमा पर भी बहुत पहले ज्वालामुखी सक्रिय थे, जिन्होंने कुछ बड़े गड्ढों को ढका था, लेकिन पिछले तीन अरब वर्षों से वहां कोई ज्वालामुखी गतिविधि नहीं हुई है।
--आईएएनएस
एमटी/पीएम
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