UPI यूजर्स की स्टडी:जेन-जी समझदार; 70% आय जरूरतों पर खर्च, 50% से ज्यादा वेतन राशन-बिलों में ही साफ
घूमने, सब्सक्रिप्शन, लाइफस्टाइल पर खर्च करने वाली पीढ़ी मानी जाने वाली जेन जी (14-29 साल) असल में बाकी पीढ़ियों जैसी ही जिम्मेदार है। 5.2 लाख से ज्यादा सैलरीड यूपीआई यूजर्स के लेनदेन पर आधारित एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, जेन जी की मासिक कमाई का 70% से ज्यादा हिस्सा बिल भुगतान, राशन, फाइनेंशियल सर्विसेज, शॉपिंग और खाने जैसे रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च होता है। फिनटेक प्लेटफॉर्म ‘सैलरीसे’ की यह स्टडी ये भी कहती है कि जेन जी सफर पर सिर्फ 5% खर्च करती है, जबकि घूमना-फिरना इस पीढ़ी की पहली पसंद माना जाता है। मनोरंजन में स्ट्रीमिंग जेन जी की पहली पसंद बनकर उभरी सब्सक्रिप्शन में जियो हॉटस्टार की हिस्सेदारी 12.4%, नेटफ्लिक्स की 10.7% और स्पॉटिफाई की 5.6% है। मनोरंजन पर खर्च ज्यादा दिखने के बावजूद यह कुल खर्च का छोटा सा ही हिस्सा है। हर पेमेंट एक ही डिजिटल इकोसिस्टम से करने का ट्रेंड बिजली-पानी का बिल हो या सब्सक्रिप्शन का रिन्युअल, जेन जी अब हर भुगतान एक ही डिजिटल इकोसिस्टम से कर रही है। इसके चलते रोजमर्रा और जरूरी खर्च आपस में घुल-मिल गए हैं। युवा मौज-मस्ती पर भी खर्च कर रहे, पर जिम्मेदारी से जिम्मेदारियां बढ़ने के बावजूद जेन जी का मौज-मस्ती पर खर्च खत्म नहीं होता। स्टडी के मुताबिक, यह जरूरी खर्चों के साथ-साथ, उनकी जगह लिए बिना, बना रहता है। यानी दोनों तरह के खर्च साथ-साथ चलते हैं। उम्र के साथ जिम्मेदारी बढ़ रही, शौकिया खर्च घट रहा 18-23 साल के जेन जी का 50% खर्च जरूरी चीजों पर, जबकि 24-29 साल के लोगों में यह बढ़कर 59% हो जाता है। दोनों में मौज-मस्ती वाला खर्च 32% पर स्थिर है, यानी उम्र के साथ जिम्मेदारियां बढ़ती हैं। और इधर…आम भारतीय अब प्रीमियम प्रोडक्ट पर खर्च बढ़ा रहे जरूरी सामान से आगे बढ़कर अब भारतीय उपभोक्ता प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर भी खुलकर खर्च कर रहे हैं। जून तिमाही के नतीजों में एचयूएल की ब्यूटी एंड वेलबीइंग कैटेगरी 12% बढ़ी, जबकि आईटीसी के गैर-स्टेपल कारोबार ने 16% ग्रोथ दिखाई। डेयरी, स्नैक्स और नूडल्स जैसी कैटेगरी में तो 20% से ज्यादा उछाल आया। पेप्सिको की बॉटलर कंपनी वरुण बेवरेजेज का वॉल्यूम 14.4% बढ़ा। हालांकि सस्ते उत्पादों की मांग अब भी कमजोर बनी हुई है। जेन जी के खर्च की प्राथमिकताओं में जरूरी बिल और राशन सबसे ऊपर, ट्रैवल सबसे नीचे अन्य- 23.3% बिल पेमेंट, सब्सक्रिप्शन- 20.1% सफर-5.00% राशन, अन्य सामान- 15.7% शॉपिंग-11.9% फाइनेंशियल सर्विसेज- 12.2% डाइन इन/आउट- 11.5% तीन जरूरतों- राशन, वित्तीय सेवाएं और खाना पर जेन जी 39.4% मासिक खर्च करती है, जो बिल-सब्सक्रिप्शन का लगभग दोगुना है। कुल खर्च में शॉपिंग का हिस्सा 11.9% होने के बावजूद यह मनोरंजन-केंद्रित नहीं, बल्कि रोजमर्रा के डिजिटल पेमेंट ढांचे का ही विस्तार है।
टाटा ट्रस्ट्स ने शुरू की अगले टाटा संस चेयरमैन की तलाश, एन. चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी के चयन के लिए बनेगी समिति
मुंबई, 13 अगस्त (आईएएनएस)। टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन द्वारा फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किए जाने के एक दिन बाद टाटा ट्रस्ट्स ने उनके उत्तराधिकारी की तलाश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
टाटा संस के प्रमुख शेयरधारक सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) ने गुरुवार को कहा कि ट्रस्ट के न्यासियों (ट्रस्टीज) ने एक प्रस्ताव पारित कर चयन समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुरूप अगले चेयरमैन के नाम की सिफारिश करेगी।
ट्रस्ट ने अपने बयान में कहा कि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए चयन समिति का गठन जल्द से जल्द किया जाएगा, जिसका उद्देश्य टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में बिना किसी व्यवधान के नेतृत्व हस्तांतरण सुनिश्चित करना है।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन के निर्णय का सम्मान करते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की। ट्रस्ट ने कहा कि वह टाटा संस को एक सुगम, समयबद्ध और व्यवस्थित नेतृत्व परिवर्तन सुनिश्चित करने में पूरा सहयोग देगा, ताकि समूह के दीर्घकालिक हितों और मूल्यों की रक्षा की जा सके।
यह घटनाक्रम उस घोषणा के बाद सामने आया है जिसमें एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस बोर्ड को सूचित किया था कि वह अगले कार्यकाल के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे। इससे पिछले कई महीनों से चल रही उत्तराधिकार संबंधी अनिश्चितताओं पर काफी हद तक स्पष्टता आ गई है।
करीब 40 वर्षों से टाटा समूह से जुड़े चंद्रशेखरन ने बुधवार को कहा था कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद पद छोड़ देंगे। यह फैसला ऐसे समय आया जब उन्हें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट दोनों की ओर से अगले पांच वर्षों के लिए कार्यकाल बढ़ाने का समर्थन मिला हुआ था।
चंद्रशेखरन के अनुसार, दोनों ट्रस्टों ने सर्वसम्मति से उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी। इस प्रस्ताव को बाद में टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी और कंपनी के बोर्ड का भी समर्थन प्राप्त हुआ था।
हालांकि, 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के समक्ष रखे गए प्रस्ताव को सर्वसम्मति नहीं मिल सकी, क्योंकि एक निदेशक ने इसका समर्थन करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद से नेतृत्व को लेकर चर्चा और अटकलें चल रही थीं।
चंद्रशेखरन ने कहा था कि टाटा संस इस समय कई महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं पर काम कर रही है और ऐसे में निवेशकों तथा अन्य हितधारकों के लिए फरवरी 2027 के बाद के नेतृत्व को लेकर स्पष्टता होना जरूरी है।
गौरतलब है कि एन. चंद्रशेखरन ने जनवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) के रूप में कार्य कर चुके थे। उन्होंने 1987 में टीसीएस में एक प्रशिक्षु (इंटर्न) के रूप में अपना करियर शुरू किया था और धीरे-धीरे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे।
उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने डिजिटल, प्रौद्योगिकी, विमानन, उपभोक्ता व्यवसाय, नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक विस्तार जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की।
अब टाटा ट्रस्ट्स द्वारा शुरू की गई चयन प्रक्रिया पर उद्योग जगत और निवेशकों की नजर रहेगी, क्योंकि नया चेयरमैन भारत के सबसे बड़े और प्रभावशाली कारोबारी समूहों में से एक की अगली विकास यात्रा का नेतृत्व करेगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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