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दिल्ली लाल किला हमले के पीछे था आतंकी संगठन AQIS, UN रिपोर्ट में हुई आधिकारिक पुष्टि

नयी दिल्ली में पिछले साल नवंबर में लाल किले पर हुए आतंकवादी हमले के लिए ‘अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (एक्यूआईएस) को ‘‘आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया’’ है। आतंकवाद-रोधी प्रतिबंधों की निगरानी करने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक इकाई की नयी रिपोर्ट में यह बात कही गई है। नयी दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए भीषण विस्फोट में करीब 15 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे।

लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास यातायात सिग्नल पर धीमी गति से चल रही एक कार में यह विस्फोट हुआ था। सोमवार को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया कि ‘‘एक्यूआईएस ने बिखरे हुए समूह से क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन के रूप में खुद को विकसित करना जारी रखा।’’ ‘इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवांत’ (आईएसआईएल) और अल-कायदा से संबंधित सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति को सौंपी गई विश्लेषणात्मक सहायता एवं प्रतिबंध निगरानी दल की 38वीं रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘एक्यूआईएस ने साजो-सामान और वित्तीय नेटवर्क स्थापित किए तथा बड़ी इकाइयों के बजाय छोटे और अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय विकेंद्रीकृत समूहों के रूप में काम किया। नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले पर हुए हमले के लिए एक्यूआईएस को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया।’’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ‘‘एक्यूआईएस द्वारा बांग्लादेश में अपने समूह स्थापित करने के लिए वहां की परिस्थितियों का फायदा उठाए जाने की कोशिश को लेकर कुछ चिंता है।’’ रिपोर्ट में कहा गया कि अल-कायदा और आईएसआईएल (दाएश) रासायनिक और जैविक हथियार विकसित करने में कई वर्षों से लगातार रुचि दिखा रहे हैं लेकिन वे इससे जुड़ी तकनीकी चुनौतियों से पार पाने में अब तक नाकाम रहे हैं।

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ऐसे हथियार विकसित करने के निर्देश ऑनलाइन आतंकवादी समूहों में व्यापक रूप से साझा किए गए हैं। इसमें कहा गया, ‘‘उदाहरण के लिए, फरवरी में आईएसआईएल (दाएश) की अंग्रेजी की पत्रिका ‘इनवेड’ में ‘बोटुलिनम टॉक्सिन’ और ‘सायनाइड’ विकसित करने के निर्देश शामिल थे।’’ रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवांत-खुरासान (आईएसआईएल-के) ने इसमें ‘‘विशेष रुचि’’ दिखाई है और पिछले 12 महीने में उसने ‘राइसिन’ नाम का जहरीला पदार्थ विकसित करने से संबंधित निर्देश प्रसारित किए। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘भारतीय अधिकारियों ने 2025 के अंत में एक चिकित्सक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें विदेश में सक्रिय आईएसआईएल (दाएश) के एक समूह ने राइसिन विकसित करने का काम सौंपा था।’’ रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमले जारी रहने के कारण दक्षिण एशिया में अत्यधिक क्षेत्रीय तनाव पर बना हुआ है।

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तालिबान इस बात से सार्वजनिक रूप से लगातार इनकार करता रहा है कि वह किसी आतंकवादी संगठन को पनाह दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने चिंता जताई कि संघर्ष की स्थिति आतंकवादी संगठनों के लिए अवसर पैदा कर सकती है और इससे क्षेत्र के सामने सुरक्षा संबंधी अतिरिक्त चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘अफगानिस्तान से पैदा होने वाला आतंकवादी खतरा लगभग पहले जैसा ही बना हुआ है।

कई आतंकवादी संगठनों का अफगानिस्तान में सक्रिय रहना पड़ोसी देशों और मध्य एशियाई क्षेत्र के लिए लगातार खतरा बना हुआ है। इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवांत-खुरासान से निपटने और अन्य आतंकवादी संगठनों पर अंकुश लगाने के अधिकारियों के प्रयासों के बावजूद वे आतंकवाद की समस्या को दबाने में नाकाम रहे हैं।

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Health Tips: 'Self-Confidence' पर चोट करते हैं पीरियड्स कमेंट्स, महिलाओं की 'Mental Health' पर पड़ता है गहरा असर

अक्सर महिलाएं तब गुस्सा होती हैं, या चिढ़ती हैं या इमोशनल होती हैं, तो उनके पार्टनर या आसपास के लोग सवाल करते हैं कि पीरियड्स की वजह से चिढ़ रही हो। या तुमको पीरियड्स आए हैं क्या। हालांकि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को मूड स्विंग्स होते हैं। कई बार उनका छोटी-छोटी बातों पर रोना आता है या तेज गुस्सा आता है। लेकिन महिलाओं के इमोशंस को पीरियड्स से जोड़ देना सही नहीं है।

इसका महिलाओं की मेंटल हेल्थ पर भी असर होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा हैं कि इस तरह के कमेंट्स किस तरह से महिलाओं की मेंटल हेल्थ को प्रभावित करते हैं।

महिलाएं व्यक्त नहीं कर पातीं अपनी फीलिंग्स

पीरियड्स होने से पहले भावनात्मक बदलावों को यह कहकर टाल देना कि 'तुमको तो पीरियड हो रहा है' या फिर उनके इमोशनल होने को पीरियड से जोड़ देना गलत होता है। भले ही पीरियडस में होने वाले हार्मोनल बदलाव का असर मूड पर पड़ता है। लेकिन सभी भावनात्मक प्रतिक्रियाएं बायोलॉजिकल नहीं होती हैं। वहीं सभी महिलाओं में एक तरह के लक्षण भी नहीं दिखते हैं।

जब महिलाओं द्वारा अपनी फीलिंग्स शेयर करने पर उसको पीरियड्स से जोड़ दिया जाए, तो कई बार महिलाएं मदद लेने से हिचकिचा जाती हैं। इस तरह से वह अपने इमोशंस को अपने मन में रखती हैं। जिसका उनकी मेंटल हेल्थ पर भी असर होता है।

हर बात को हार्मोन से जोड़ना

महिलाओं की हर बात, नाराजगी या गुस्से को सिर्फ हार्मोन्स से जोड़ देना बात की गंभीरता को खत्म करता है। इससे वह खुद में बुरा महसूस करने लगती हैं।

कम होने लगता है आत्मविश्वास

जब कई बार आप महिलाओं की असल परेशानी को इस तरह से नकार देते हैं, तो महिलाओं का सेल्फ कॉन्फिडेंस भी कम होने लगता है। उनको ऐसा महसूस होता है कि शायद उनका गुस्सा या इमोशंस सही नहीं है। जिस कारण वह खुद को कम आंकने लगती हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

साथ ही एक बात का और भी ध्यान रखना चाहिए कि पीरियड्स के दिनों में ज्यादा मूड स्विंग्स होना सही नहीं है। भले ही पीएमएस नॉर्मल है। लेकिन प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर या मूड डिसऑर्डर जैसी स्थितियां नॉर्मल नहीं हैं अगर इमोशंस पर काबू करना मुश्किल हो जाता है और रोजाना के कामों में भी मुश्किल होने लगे, तो इस चीज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए।

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नखरे बंद करो, तुम कोई राजकुमारी नहीं हो...फैन ने उड़ाई स्टीव स्मिथ की खिल्ली, 'स्मज' ने 71 रन ठोककर रच दिया इतिहास

Steve Smith Trolled by Fan: डार्विन टेस्ट के पहले दिन बांग्लादेशी गेंदबाजों के आगे ऑस्ट्रेलियाई टॉप ऑर्डर पस्त नजर आया. संकट के समय जब स्टीव स्मिथ एकाग्रता बनाने के लिए साइट स्क्रीन ठीक करवा रहे थे, तब स्टैंड्स से एक फैन ने तंज कसते हुए कहा, 'राजकुमारी मत बनो स्मज, खेल से बड़े नहीं हो तुम!' इस ड्रामे से बेपरवाह स्मिथ ने 71 रनों की जुझारू पारी खेल टीम को 198 तक पहुंचाया और स्टीव वॉ के 82 बार 50+ स्कोर के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली. Thu, 13 Aug 2026 16:26:46 +0530

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