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JLKM leader Devendra Mahto ने मांगी विरोध स्थल जाने की अनुमति, Civil Surgeon को लिखा पत्र

भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में पिछले 11 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे और यहां के सदर अस्पताल में इलाज करा रहे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र महतो ने बुधवार रात रांची के सिविल सर्जन को पत्र लिखकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित विरोध स्थल पर लौटने की अनुमति मांगी। झारखंड विधानसभा तक प्रदर्शनकारी छात्रों के मार्च में शामिल होने के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर जेएलकेएम नेता को सोमवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रांची के सिविल सर्जन को लिखे अपने पत्र में महतो ने कहा कि अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हजारों छात्र इस लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं और यह उनके लिए न केवल एक विरोध प्रदर्शन है, बल्कि एक जिम्मेदारी और उम्मीद का जरिया भी है।

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महतो ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, आज मैंने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर विरोध स्थल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम जाने की अनुमति मांगी है। मेरे शरीर का तो अस्पताल के बिस्तर पर इलाज किया जा रहा है, लेकिन मेरी आत्मा सत्याग्रह स्थल पर है जहां छात्र और युवा अपने भविष्य के लिए न्यायपूर्ण संघर्ष कर रहे हैं। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं के आयोजन में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र पिछले 19 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं।

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Bhagwant Mann ने Beant Singh हत्याकांड के दोषी हवारा की पैरोल पर राज्यपाल से की मुलाकात

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी जगतार सिंह हवारा को पैरोल प्रदान किए जाने को लेकर हस्तक्षेप का अनुरोध किया। उम्रकैद की सजा काट रहे हवारा ने अपनी बीमार मां से मिलने का हवाला देते हुए पैरोल की गुहार लगाई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने भी मानवीय आधार पर पैरोल की याचिका का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि हवारा की बुजुर्ग और बीमार मां को उनके बेटे के कृत्यों की सजा नहीं मिलनी चाहिए। रवनीत सिंह बिट्टू, बेअंत सिंह के पोते हैं। मान ने मानवीय आधार पर हवारा की पैरोल का समर्थन करते हुए कहा कि 31 साल बाद, उनकी बीमार मां को अपने बेटे से मिलने की ‘नयी उम्मीद’ जगी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह इस मामले को केंद्रीय गृह सचिव के समक्ष उठाएंगे। मुख्यमंत्री की राज्यपाल के साथ यह बैठक कटारिया को लिखे उस पत्र के कुछ दिनों बाद हुई है, जिसमें उन्होंने मानवीय आधार पर हवारा को 10 दिन की पैरोल देने की वकालत की थी। मान ने कहा, ‘‘मैं उसी सिलसिले में उनसे (राज्यपाल) मिला था।

राज्यपाल चंडीगढ़ के प्रशासक भी हैं। वह सिर्फ सिफारिश करेंगे और उसके बाद गृह मंत्रालय फैसला लेगा।’’ मान ने कहा, ‘‘हमने 10 दिन की पैरोल के लिए पत्र लिखा था। लेकिन यह केंद्र सरकार तय करेगी कि कितने दिनों की पैरोल देनी है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि हवारा की मां अपने बेटे से मिलना चाहती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जब भी उनके सामने हवारा का नाम लिया जाता है, तो वह प्रतिक्रिया देती हैं। वह अपने बेटे से मिलना चाहती हैं।’’ मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी ज़िम्मेदारी उनकी सरकार की है। उन्होंने कहा,‘‘जगतार सिंह हवारा के घर आने के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार लेगी।

उनके समर्थकों और परिवार के सदस्यों ने भी इस मामले में राज्य सरकार को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया है।’’ मान ने कहा,‘‘राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पंजाब में बड़ी मुश्किल से हासिल हुई शांति की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस नेक काम के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मैंने राज्यपाल को यह भी भरोसा दिलाया है कि केंद्र के साथ इस मामले को आगे बढ़ाने में राज्य सरकार का पूरा समर्थन और सहयोग मिलेगा।’’ मान ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि भाई जगतार सिंह हवारा जी जल्द ही अपनी मां के पास बैठे होंगे।’’ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पिछले महीने दिल्ली की मंडोली जेल (जहां हवारा बंद है) के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे चंडीगढ़ प्रशासन की सिफारिशें लेने के बाद हवारा की पैरोल अर्जी पर एक तय समय-सीमा के भीतर फ़ैसला लें।

हवारा को मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। वह 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट से संबंधित मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। इस हमले में बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे।

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  Sports

मैदान पर छक्कों की बौछार, बाहर स्पॉन्सर्स की कतार... जानिए कैसे 15 की उम्र में वैभव सूर्यवंशी बने ब्रांड्स के फेवरेट 'पोस्टर बॉय'

Vaibhav Sooryavanshi 5 brands: भारतीय क्रिकेट में हर दशक में कोई न कोई ऐसा अनोखा खिलाड़ी आता है, जिसकी तुलना सीधे सचिन तेंदुलकर के शुरुआती दिनों से होने लगती है. वैभव सूर्यवंशी की यात्रा भी कुछ ऐसी ही सनसनीखेज रही है. इतनी कम उम्र में इंटरनेशनल दबाव का सामना करना और फिर अपने बल्ले की धमक से प्रतिद्वंद्वियों को पस्त करना उनकी मानसिक मजबूती का सबूत है. क्रिकेट मैदान पर उनके इस उल्कापिंड जैसी तेज़ी से हुए उभार ने सिर्फ खेल प्रेमियों का ध्यान ही नहीं खींचा, बल्कि कॉर्पोरेट जगत और दुनिया के बड़े ब्रांड्स को भी अपनी ओर आकर्षित किया है. आज वैभव मैदान के अंदर अपनी धमाकेदार पारियों और मैदान के बाहर अपनी बढ़ती ब्रांड वैल्यू के चलते चर्चा के केंद्र में हैं. Fri, 14 Aug 2026 05:01:03 +0530

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