रूस ने भारत को एक ऐसा ऑफर दे दिया है जिसके बाद चीन के टैंक एक्सपर्ट्स और पाकिस्तान की सेना दोनों की टेंशन बढ़ गई है। कल्पना कीजिए अगर भारत के 3600 से ज्यादा टैंक अचानक नेक्स्ट जनरेशन बन जाए। अगर भारतीय T90 टैंक ड्रोन हमलों को हवा में ही खत्म करने लगे। अगर रेगिस्तान से लेकर एलएसी तक भारतीय टैंक पहले से कई गुना ज्यादा घातक हो जाए तो एशिया में ताकत का संतुलन पूरी तरह से बदल सकता है और अब रूस यही करने की तैयारी में है। दरअसल बता दें कि रूस की मशहूर टेक डिज़ एजेंसी ने बता दें और उसके जो चीफ इंजीनियर हैं और डायरेक्टर हैं एंड्री उन्होंने भारत को एक बड़ा ऑफर दिया है। एंड्री ने कहा है कि रूस भारत के T72 अजय और T90 भीष्म टैंकों को भविष्य के युद्ध के हिसाब से अपग्रेड करने को तैयार है।
आपको बता दें भारत दुनिया के सबसे बड़े टैंक ऑपरेटर्स में से एक है। भारतीय सेना के पास 2400 से ज्यादा T72 और 1200 से ज्यादा T90 टैंक हैं। लेकिन अब युद्ध पूरी तरह से बदल चुका है। यूक्रेन युद्ध ने पूरी दुनिया को हिला दिया। करोड़ों डॉलर के भारीभरकम टैंक सस्ते एफपीवी ड्रोन के सामने जलते दिखाई दिए। ऊपर से हमला, सटीक निशाना और कुछ ही सेकंड में तबाही। यही वजह है कि अब दुनिया भर की सेनाएं अपने टैंकों को ड्रोन प्रूफ बनाने में जुटी है और भारत भी अब उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। काम कर रहा है। रूस ने भारत के सामने तीन बड़े प्रस्ताव रखे हैं। पहला भारत के पुराने T72 और मौजूदा T90 टैंकों में नए प्रोडक्शन सिस्टम, एडवांस फायर कंट्रोल और एंटी ड्रोन टेक्नोलॉजी लगाई जाए। दूसरा भारत के फ्यूचर रेडी कॉम्बैक्ट व्हीकल यानी कि एफआरसीवी प्रोजेक्ट्स में रूस अपनी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के साथ साझेदारी करना चाहता है और तीसरा प्रस्ताव रूस की तरफ से आया है और यह सबसे बड़ा है।
रूस का यह दावा है कि उसका T9M दुनिया के सबसे बेहतरीन टैंकों में से एक है और यूक्रेन युद्ध से मिले अनुभव के आधार पर भारत के भीष्म टैंकों को और भी ज्यादा यह घातक बनाया जा सकता है। रूसी डिजाइनर ने यह साफ कहा है कि ड्रोन युद्ध से टैंकों को कैसे बचाना है। रूस यह अनुभव भारत के साथ साझा करने को तैयार है। अब यहां सबसे दिलचस्प कहानी शुरू होती है। आज रूस भारत के टैंकों को अपग्रेड करने की बातें कर रहा है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब भारत ने रूस की टैंक इंडस्ट्री को डूबने से बचाया था। 1990 के दशक में सोवियत संघ टूट चुका था। रूस आर्थिक संकट में था। रूस की मशहूर टैंक कंपनी बंद होने की कगार पर पहुंच गई थी। उसके पास T90 जैसे शानदार टैंक डिजाइन तो था लेकिन उसे खरीदने के लिए खुद रूसी सेना के पास पैसे नहीं थे। तभी भारत आगे आया। साल 2001 में भारत ने रूस से 310 T90 टैंकों की बड़ी डील की और बाद में चेन्नई की एचपीएफ फैक्ट्री में हजारों T90 भारत में ही बनने लगे। कहा जाता है कि भारत की इसी डील ने रूस की टैंक इंडस्ट्री में फिर से जान डाल दी थी। यानी जिस भारत ने कभी रूस की रक्षा इंडस्ट्री को सहारा दिया था। आज वही रूस भारत की सेना को भविष्य के युद्ध के लिए और भी ज्यादा ताकतवर बनाने की तैयारी कर रहा है। यानी ये साफ है कि आने वाले युद्ध सिर्फ गोलियों से नहीं लड़ा जाएगा। ड्रोन, एआई और स्मार्ट टेक ही नई ताकत तय करेंगे।
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15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी राजस्थान रॉयल्स के लिए सबसे बड़ी खोजों में से एक साबित हुए हैं। टूर्नामेंट में अपने दूसरे सीज़न में खेल रहे वैभव वर्तमान में ऑरेंज कैप धारक हैं और इस समय विश्व के सबसे बेहतरीन फॉर्म में चल रहे बल्लेबाजों में से एक हैं। एसआरएच के खिलाफ, वैभव इतिहास रचने के कगार पर थे, जब उन्होंने 29 गेंदों में 97 रन बनाए और आईपीएल इतिहास का सबसे तेज शतक बना सकते थे। उनके प्रदर्शन को देखकर, पूर्व भारतीय क्रिकेटर अंबाती रायडू ने चर्चा बटोरी और भविष्यवाणी की कि वैभव टी20 पारी में 200 रन बनाने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं।
रायडू ने ईएसपीएनक्रिकइंफो पर हुई बातचीत के दौरान कहा कि मुझे लगता है कि वो जल्द ही 200 रन बना लेंगे। अगर वो इसी तरह खेलते रहे, तो बहुत जल्द ही 200 रन पूरे हो जाएंगे। उन्होंने एक भी गेंद पर पहले से कोई रणनीति नहीं बनाई है, सिवाय एक गेंद के जिसमें उन्होंने पहले के एक मैच में रिवर्स स्वीप करने की कोशिश की थी। इसके अलावा, वो बस गेंद को देखते हैं और उस पर प्रतिक्रिया देते हैं। उनकी प्रतिभा इतनी शानदार है कि वो किसी भी गेंद पर उसी तरह प्रतिक्रिया दे सकते हैं जैसे वो दे रहे हैं। वो हर गेंद पर छक्का मार रहे हैं।
इसके अलावा, टॉम मूडी ने आईपीएल सीजन में वैभव के प्रदर्शन की भी चर्चा की और इस युवा खिलाड़ी की सफलता की तुलना टेस्ट क्रिकेट में डोनाल्ड ब्रैडमैन की सफलता से की। मूडी ने कहा कि अविश्वसनीय कहना भी कम होगा। हम इस प्रारूप में ऐसा कुछ देख रहे हैं जो हमने अपने जीवनकाल में कभी नहीं देखा। अन्य प्रारूपों में भी हमने कुछ अद्भुत चीजें देखी हैं, लेकिन इस स्तर तक नहीं। इसकी तुलना मैं केवल ब्रैडमैन के प्रदर्शन से कर सकता हूँ। टेस्ट क्रिकेट में उनका औसत लगभग 100 था और उनके सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी से उनका औसत लगभग 60 था। हम इसी अंतर की बात कर रहे हैं।
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