FCRA बिल 2026 पर सामने आया बसपा सुप्रीमो का बड़ा बयान, कहा- सदन में इस पर चर्चा होनी चाहिए थी
देश में इन दिनों FCRA बिल 2026 की चर्चाएं हैं. सरकार संसद के मानसून सत्र में ही इस बिल को पास करवाना चाहती थी लेकिन विपक्ष के हंगामें की वजह से बिल को जेपीसी में भेजना पड़ गया. पूरे मामले में बसपा सुप्रीमो मायावती का बयान सामने आया है. उन्होंने एक्स पर प्रतिक्रिया दी है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने कहा-
‘1. जैसाकि सर्वविदित है कि FCRA संशोधन बिल, जिसे सरकार अति-महत्वपूर्ण बताकर अन्य विधेयकों की तरह ही इसे तुरन्त पास कराना चाहती थी, किन्तु विपक्ष के ज़बरदस्त विरोध के चलते व संसद में इस पर बिना प्रारम्भिक चर्चा के ही इसे कल काफी आपाधापी में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया गया है.
2. वैसे इस एफसीआरए संशोधन बिल को कांग्रेस पार्टी व इनके सहयोगी दल सीधे तौर पर अल्पसंख्यक विरोधी बताकर इस बिल को वापस लेने की माँग कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे विदेश फण्डिंग के उपयोग में कथित भ्रष्टाचार से जोड़कर इसमें कठोर बदलाव करना चाहती है. इससे स्पष्ट है कि इस बिल का सत्ता व विपक्ष दोनों ने ही राजनीतिकरण ज़्यादा कर दिया है.
3. बेहतर होता यदि विपक्ष कल इस विधेयक को रखने के दौरान् संसद को चलने देता और इसकी कमियोें को उजागर करता तो उसे पूरा देश जानता, लेकिन इन्होंने संसद को ही अपनी ज़िद के हिसाब से नहीं चलने दिया.
4. इतना ही नहीं बल्कि ऐसे अनेकों और बिल भी विपक्ष द्वारा संसद को नहीं चलने देने की वजह से सरकार ने उन्हें मिनटों में पास करा दिये हैं, जिन्हें इनको रोकना चाहिये था, जो विपक्ष ने ऐसा नहीं किया, जिसका सरकार अपने पक्ष में पूरा फायदा उठा रही है. इससे विपक्ष की या तो अन्दरुणी मिलीभगत लगती है या फिर जेन-जी (Gen Z) के वोटों के स्वार्थ में इन्हें देश के अन्य मुद्दे बिल्कुल भी नज़र नहीं आ रहे हैं. हालाँकि वर्तमान हालात में जेनजी की समस्याओं के मुद्दे को प्राथमिकता देते हुये इनको जनहित के अन्य मुद्दों को भी महत्व देना चाहिये था.
5. इसके साथ ही, इनको अयोध्या में राममन्दिर के चढ़ावे में गड़बड़ी का अर्थात् इसके भ्रष्टाचार का मुद्दा भी संसद में उठाना चाहिये था, जिसे भी अब विपक्ष ने अपने राजनैतिक स्वार्थ में उसे पीछे कर दिया है, जबकि इस पर संसद में चर्चा होना बहुत ज़रूरी है.
6. ऐसे में देश की जनता, सत्ता व विपक्ष के बीच इस समय संसद सत्र के दौरान् भी चल रही उनके अपने-अपने राजनैतिक स्वार्थ की लड़ाई से पूरी तरह से सचेत रहते हुये अपनी एकमात्र अम्बेडकरवादी बहुजन समाज पार्टी, जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियों व सिद्धान्तों के आधार पर पूरी ईमानदारी व निष्ठा से चल रही है, उससे देश व आम-जनहित में जुड़े, यही समय की माँग व सर्वसमाज के हित में भी है.’
1. जैसाकि सर्वविदित है कि FCRA संशोधन बिल, जिसे सरकार अति-महत्वपूर्ण बताकर अन्य विधेयकों की तरह ही इसे तुरन्त पास कराना चाहती थी, किन्तु विपक्ष के ज़बरदस्त विरोध के चलते व संसद में इस पर बिना प्रारम्भिक चर्चा के ही इसे कल काफी आपाधापी में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया…
— Mayawati (@Mayawati) August 13, 2026
इंटरनेशनल फंडिंग पर सरकार की निगरानी आवश्यक- भारत-इटली एक्सपर्ट
भारत-इटली संबंधों के सलाहकार और वरिष्ठ विश्लेषक कार्लो लोंबार्डी ने कहा कि सरकारों को ये सुनिश्चित करना होगा कि विदेशी धन का इस्तेमाल सिर्फ एनजीओ के घोषित उद्देश्यों के लिए ही किया जाए न कि किसी राजनीतिक एजेंडे को इस फंडिंग से बढ़ावा दिया जाए. इंटरनेशनल फंडिंग पर सरकार की निगरानी आवश्यक है.
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