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पेट की बीमारियां होंगी दूर और बढ़ेगा आत्मविश्वास, जानें क्यों खास है 'मयूरासन'

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। आज की आधुनिक जीवनशैली में, जहां पेट की समस्याएं और धीमा मेटाबॉलिज्म आम बात हो चुके हैं, वहां मयूरासन शारीरिक स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। यह आसन शरीर के भीतर मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है।

मयूरासन दो शब्दों से मिलकर बना है। मयूर का अर्थ मोर और आसन का अर्थ मुद्रा होता है। यह नाभि चक्र (मणिपुर चक्र) को जागृत कर व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, मयूरासन (मोर मुद्रा) एक उन्नत संतुलन बनाने वाली योग मुद्रा है, जिसमें शरीर का पूरा भार हथेलियों पर रहता है। यह पेट के अंगों को सक्रिय कर पाचन शक्ति बढ़ाने और मांसपेशियों को मजबूत करने में अत्यधिक लाभकारी माना जाता है। इस आसन में शरीर का भार मुख्य रूप से हथेलियों और कंधों पर होता है, जिससे कलाई, कंधे, पैर और पूरे शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

रोजाना मयूरासन करने से शरीर का संतुलन बेहतर होता है, एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक स्थिरता भी मजबूत होती है। यह आसन शरीर को डिटॉक्स करने में भी मददगार माना जाता है। इससे शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलने में सहायता मिलती है और रक्त संचार बेहतर होता है। साथ ही, यह फेफड़ों के लिए भी लाभदायक माना जाता है।

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले वज्रासन में बैठें। इसके बाद दोनों हथेलियों को जमीन पर रखें और उंगलियों को पीछे की ओर रखें। कोहनियों को थोड़ा मोड़ते हुए पेट के पास लाएं। फिर धीरे-धीरे शरीर का भार हथेलियों पर डालते हुए पैरों को पीछे की ओर सीधा करें। सिर को आगे रखें और पूरे शरीर का संतुलन बनाए रखने की कोशिश करें। शुरुआत में इस मुद्रा को कुछ सेकंड तक करें और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। हालांकि, शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए यह आसन थोड़ा कठिन हो सकता है, इसलिए इसे योग विशेषज्ञ की देखरेख में करना बेहतर होता है।

गर्भवती महिलाओं और उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), हर्निया या अल्सर से पीड़ित लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

--आईएएनएस

एनएस/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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इबोला संकट: कांगो में मरीजों और मौतों की संख्या बढ़ी, नियंत्रण के प्रयास तेज

किंशासा, 27 मई (आईएएनएस)। स्वास्थ्य मंत्री रोजर काम्बा ने कहा कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला का प्रकोप अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन संक्रमण और मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

काम्बा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों में करीब 1,000 संदिग्ध मामलों की पहचान की है, जिनमें से 101 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 200 से 220 मौतें इस प्रकोप से जुड़ी मानी जा रही हैं, जबकि 17 मौतों की पुष्टि लैब टेस्ट के जरिए की गई है।

काम्बा ने कहा क‍ि हम अभी महामारी के शुरुआती दौर में हैं, और आगे इसका बढ़ना इस बात पर निर्भर करेगा कि रोकथाम और नियंत्रण के प्रयास कितने प्रभावी होते हैं। मंत्री ने बताया कि सरकार का जवाबी अभियान लगभग चार से छह महीने तक चल सकता है।

यह प्रकोप इबोला के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन से हुआ है, जिसे काम्बा ने बताया कि यह जायर स्ट्रेन जितना घातक नहीं है, लेकिन अगर संक्रमण बढ़ता रहा तो यह फिर भी खतरनाक है। अभी इस स्ट्रेन के लिए कोई मंजूर वैक्सीन या खास इलाज उपलब्ध नहीं है।

संक्रमण को रोकने के लिए अधिकारी निगरानी, टेस्टिंग, मरीजों को अलग रखना, संपर्क में आए लोगों की ट्रेसिंग, समुदाय के साथ काम और सुरक्षित तरीके से अंतिम संस्कार जैसे उपायों पर भरोसा कर रहे हैं।

समाचार एजेंसी स‍िन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को सरकार ने बुनिया शहर, जो इटुरी प्रांत की राजधानी और इस प्रकोप का केंद्र है, वहां से आने-जाने वाली नागरिक यात्री उड़ानों को रोक दिया, जबकि मानवीय सहायता वाली उड़ानों को जारी रखा गया है।

काम्बा ने कहा कि वायरस आधिकारिक रूप से 15 मई को घोषित होने से पहले ही फैल रहा हो सकता है, क्योंकि इबोला का इनक्यूबेशन पीरियड (शरीर में लक्षण दिखने से पहले का समय) 21 दिनों तक हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अभी तक पेशेंट जीरो यानी सबसे पहला संक्रमित व्यक्ति पहचाना नहीं गया है।

इससे पहले 26 मई को, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) ने बताया था कि इबोला वायरस बीमारी का एक पुष्टि किया गया मरीज पूर्वी डीआर कांगो के गोमा शहर में ठीक हो रहा है, और इस प्रकोप से निपटने के लिए प्रतिक्रिया को मजबूत करने का काम चल रहा है।

डब्‍ल्‍यूएचओ की कार्यवाहक प्रतिनिधि एने एंसीया ने गोमा के दौरे के दौरान यह जानकारी दी थी। यह शहर इस समय मार्च 23 मूवमेंट (एम23) विद्रोही समूह के नियंत्रण में है।

उन्होंने बताया कि मरीज का इलाज एक स्थानीय अस्पताल में चल रहा है और उसकी हालत काफी बेहतर है। उसके संपर्क में आए लोगों की नियमित निगरानी की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल चर्चा का मुख्य फोकस शहर की स्वास्थ्य स्थिति और निगरानी, मरीजों के इलाज, संपर्क ट्रेसिंग और समुदाय की भागीदारी को मजबूत करने पर है, ताकि बुंडिबुग्यो स्ट्रेन से फैल रहे इबोला प्रकोप को नियंत्रित किया जा सके।

--आईएएनएस

एवाई/एएस

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