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MP के महाविद्यालयों-विश्वविद्यालयों में चलेगा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान, लगाए गए पौधों की जानकारी पोर्टल पर होगी दर्ज, निर्देश जारी

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अब मध्य प्रदेश के शासकीय और निजी महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान चलाया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अभियान के अंतर्गत लगाए गए पौधों की जानकारी Meri LiFE पोर्टल ((https://merilife.nic.in/)) पर दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मप्र शासन के निर्देश के अनुसार ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान व्यापक रूप से संचालित किया जाना है। उच्च शिक्षा संस्थानों में अभियान की गतिविधियों को आयोजित कर पौधरोपण को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। अभियान में लगाए जाने वाले पौधे को मां की स्मृति और सम्मान से जोड़ने की परिकल्पना की गई है। इससे पौधरोपण को केवल एक गतिविधि के बजाय भावनात्मक और सामाजिक सहभागिता का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है।

विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि पौधरोपण के साथ उनकी जीवितता और संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए पौधों को पानी देने, उनकी सुरक्षा करने तथा आवश्यकता के अनुसार नियमित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। नए पौधरोपण के साथ पूर्व में लगाए गए पौधों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा।

पौधों को सुरक्षित रखने के लिए केवल ऐसे स्थानों का चयन किया जाएगा जहां उचित धूप और जल निकासी की व्यवस्था हो। विशेष प्रजातियों को प्राथमिकता: क्षेत्र की जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए बरगद, पीपल, नीम, सागौन, आम, जामुन, सीशम, आंवला और महुआ जैसी स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने को प्राथमिकता दी जाएगी।

अभियान के दौरान विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से संबंधित गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। पौधरोपण के साथ जल संरक्षण, स्वच्छता, प्लास्टिक के उपयोग में कमी तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता जैसी गतिविधियों को भी अभियान से जोड़ने पर जोर दिया गया है। अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रकृति के साथ जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

उच्च शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षण संस्थानों को निर्देशित किया है कि वे अभियान से जुड़ी सारी जानकारी संकलित कर ‘Meri Life’ पोर्टल पर अपडेट कर इसकी रिपोर्ट 05 अक्टूबर 2026 तक अनिवार्य रूप से विभागीय ईमेल पर भेजना सुनिश्चित करें।

mp higher education department

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उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने की निर्माण कार्यों की समीक्षा, तय समय में पूरा करने के दिए निर्देश

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को लेकर कई विकास परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में नगर निगम और स्मार्ट सिटी के विकास कार्य को लेकर कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने समीक्षा बैठक ली। उन्होंने विभागवार कार्यों का ब्यौरा लिया।

बैठक के दौरान कलेक्टर ने यह निर्देश दिए हैं कि शहर में जितने भी भवन, कार्यालय, अस्पताल, विद्यालय, पुल, सड़क का निर्माण किया जा रहा है उनकी गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए। जो भी काम चल रहे हैं, वो समय सीमा में पूरे होने चाहिए ताकि नागरिकों को किसी तरह की परेशानी ना हो।

कलेक्टर ने की समीक्षा बैठक

कलेक्टर की इस समीक्षा बैठक में सभी विभागों द्वारा निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। सिंह ने निर्माण कार्यों की जानकारी लेते हुए उन कामों के बारे में भी पूछा, जो समय सीमा में पूर्ण नहीं हो पाए हैं। उन्होंने अधिकारियों से देरी होने के बारे में जानकारी मांगी और यह निर्देश दिए कि समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण काम पूरा किया जाए ताकि उनका लोकार्पण जल्द से जल्द हो सके।

 

परेशानियों की ली जानकारी

बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों ने निर्माण कार्यों में आ रही अलग-अलग समस्याओं जैसे भूमि संबंधी बाधाओं और प्रशासनिक अड़चन से सिंह को अवगत कराया। इस पर उन्होंने समस्याओं का तुरंत निराकरण करने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि किसी भी विकास कार्य में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कलेक्टर ने साफ शब्दों में आदेश दिए हैं कि अगर किसी एजेंसी या ठेकेदार द्वारा लापरवाही करते हुए काम में विलंब किया जा रहा है तो उसके विरुद्ध नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ती है तो ठेकेदार को नोटिस देने के साथ उसे हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

पात्र हितग्राहियों को मिले लाभ

इस दौरान सिंह ने शासन की अलग-अलग योजनाओं के कार्यों के संबंध में भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सभी पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ समय पर दिलाया जाए ताकि कोई भी वंचित ना रहे। इसी के साथ महाकाल मंदिर में डिजिटल सेंटर एवं डिजिटल कियोस्क जल्द से जल्द स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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  Sports

Yashasvi Jaiswal और Rishabh Pant के लिए बड़ी चुनौती, Galle के मैदान पर Sri Lankan Spinners का चक्रव्यूह तैयार

कई दफा कुछ क्रिकेटर किसी खास मैदान को अपना पसंदीदा मंच बना लेते हैं और वहां लगातार यादगार प्रदर्शन करते हैं जैसे महेला जयवर्धने और मुथैया मुरलीधरन ने सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब पर प्रतिद्वंद्वी टीम को खूब परेशान किया था। इसी तरह जाक कैलिस के न्यूलैंड्स में आंकड़े अविश्वसनीय रहे हैं जबकि स्टुअर्ट ब्रॉड लॉर्ड्स में लगभग अजेय साबित हुए। अब श्रीलंका के दो स्पिनर प्रभात जयसूर्या और रमेश मेंडिस ने गॉल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को अपना गढ़ बना लिया है जहां वे लगातार विपक्षी बल्लेबाजों पर हावी रहे हैं।

दोनों ने मिलकर इस मैदान पर 145 विकेट झटके हैं। बाएं हाथ के स्पिनर प्रभात जयसूर्या ने सिर्फ 11 टेस्ट में 81 विकेट लिए हैं जबकि ऑफ स्पिनर रमेश मेंडिस ने 12 टेस्ट में 64 विकेट अपने नाम किए हैं। पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर फरवेज महरूफ ने उनकी इस सफलता का कारण बताते हुए कहा, ‘‘प्रभात जयसूर्या श्रीलंका का सबसे बड़ा हथियार होंगे। हमने उन्हें ‘किंग ऑफ गॉल’ का नाम दिया है क्योंकि उन्होंने वहां सबसे ज्यादा विकेट लिए हैं। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें हवा का सही इस्तेमाल करते हुए गेंदबाजी करना अच्छी तरह आता है। गॉल में हवा एक बड़ा कारक होती है क्योंकि इससे स्पिनरों को अतिरिक्त फायदा मिलता है। ’’ यह शायद भारतीय बल्लेबाजों के लिए अच्छी खबर नहीं होगी क्योंकि हाल के समय में वे बेहतरीन स्पिनरों के खिलाफ संघर्ष करते नजर आए हैं। न्यूजीलैंड के बाएं हाथ के स्पिनर एजाज पटेल और मिचेल सैंटनर ने भारत में ही भारतीय बल्लेबाजों को परेशान कर दिया था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका के ऑफ स्पिनर साइमन हार्मर ने भी ऐसा ही प्रदर्शन किया।

अब भारतीय बल्लेबाजों को एक ही मैच में बेहतरीन बाएं हाथ की स्पिन और ऑफ स्पिन की जोड़ी का सामना करना होगा। पूर्व श्रीलंकाई स्पिनर उपुल चंदना ने भी भारतीय बल्लेबाजों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा, ‘‘जयसूर्या बहुत जल्दी श्रीलंका के प्रमुख स्पिनर बन गए हैं। वे पारंपरिक शैली में गेंदबाजी करते हैं और बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं देते। अगर पिच पर असमान उछाल रहा तो उनकी सटीक गेंदबाजी और भी प्रभावी होगी। ’’

चंदना ने उदाहरण देते हुए बताया कि पूर्व श्रीलंकाई कप्तान दिमुथ करुणारत्ने की खोज माने जाने वाले जयसूर्या ने पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज बाबर आजम को कई बार परेशान किया है। उन्होंने कहा, ‘‘वह लगातार ‘अंडर-कटर’ और ‘आर्म बॉल’ फेंकते हैं। बाबर आजम को उनके खिलाफ रन बनाने में मुश्किल हुई क्योंकि वह अक्सर बैकफुट पर चले जाते थे। उनके खिलाफ लगातार रन बनाने की कोशिश करनी पड़ती है। यदि आप सिर्फ रक्षात्मक खेलेंगे तो मुश्किलें बढ़ जाएंगी। ’’ चंदना (54 वर्ष) का मानना है कि दूसरे छोर से रमेश मेंडिस का साथ मिलने से जयसूर्या और भी खतरनाक हो जाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मेंडिस दूसरे छोर से शानदार सहयोग देते हैं जिससे दोनों ओर से लगातार दबाव बना रहता है। वह बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ अलग कोण से गेंदबाजी करते हैं और गेंद को उनके शॉट खेलने की जगह से दूर ले जाते हैं। यदि पिच से टर्न मिला तो वह और भी घातक साबित हो सकते हैं। ’’

भारत के शीर्ष क्रम में यशस्वी जायसवाल और ऋषभ पंत जैसे बाएं हाथ के बल्लेबाज मौजूद हैं और हाल के समय में दोनों का प्रदर्शन भी बहुत प्रभावशाली नहीं रहा है। मैच से पहले मैदानकर्मियों को मध्य पिच पर पानी डालते हुए देखकर यह उम्मीद जरूर जगी कि विकेट बल्लेबाजी के अनुकूल हो सकती है। हालांकि भारतीय टीम अच्छी तरह जानती है कि जयसूर्या और मेंडिस के पास ऐसी कई रणनीतियां हैं जिनसे वे किसी भी बल्लेबाज़ को मुश्किल में डाल सकते हैं।

Thu, 13 Aug 2026 18:07:52 +0530

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