Purnea में नदी में नहाने गए 3 बच्चों की डूबने से मौत, जांच में जुटा प्रशासन
बिहार के पूर्णिया जिले में बुधवार दोपहर नदी में नहाने के दौरान दो चचेरे भाइयों समेत तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। यह घटना जिले के धमदाहा थाना क्षेत्र के थारी राजो पंचायत में एक ईंट भट्ठे के पास हुई।
मृतकों की पहचान राहुल कुमार (14), बैजू कुमार (14) और राज कुमार (15) के रूप में हुई है। राहुल और बैजू चचेरे भाई थे। धमदाहा के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अनुपम कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, ‘‘प्रशासन मृतकों के परिजनों का विवरण एकत्र कर रहा है, जिसके बाद उन्हें जल्द से जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।’’ उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों को घटना की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
धमदाहा थानाध्यक्ष रवि शंकर कुमार ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, चंद्राही-शंकर चौक इलाके के पांच बच्चे बुधवार दोपहर करीब दो बजे नदी में नहाने गए थे। कुछ देर बाद उनमें से दो बच्चे वापस घर लौट आए, जबकि अन्य तीन डूब गए।
स्थानीय लोगों ने तीनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला और उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
Etah की अदालत ने 2005 के मोहरपाल हत्याकांड में दो पुलिसकर्मियों को सुनाई Life Imprisonment
एटा की एक अदालत ने 2005 के चर्चित मोहरपाल हत्याकांड में करीब 20 साल बाद फैसला सुनाते हुए दो तत्कालीन पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनायी है। अदालत ने तत्कालीन दरोगा गजराज सिंह और सिपाही महावीर सिंह को भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की धारा 302/34 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई है और प्रत्येक पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मोहरपाल को पुलिसकर्मी गांव से पकड़कर थाना जैथरा ले गए थे जहां कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की गई जिसके बाद पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर माना कि पुलिसकर्मियों द्वारा मोहरपाल को थाने ले जाने, हिरासत में मारपीट करने और घटना से जुड़े साक्ष्य मिटाने का प्रयास किए जाने का मामला साबित हुआ। मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी मनीष यादव और सिपाही मिठाई लाल भी आरोपी बनाए गए थे, लेकिन मुकदमे की सुनवाई के दौरान दोनों की मृत्यु हो गई। विशेष सत्र न्यायाधीश राकेश धर ने गजराज सिंह और महावीर सिंह को दोषी ठहराया।
दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
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