Explainer: दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद क्या है? 100 साल पुराने क्लब पर क्यों आया खाली करने का आदेश
Explainer: लुटियंस दिल्ली के सबसे पॉश इलाके में स्थित ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब इन दिनों जबरदस्त सुर्खियों में छाया हुआ है. हो भी क्यों न, 2 सफदरजंग रोड पर स्थित लगभग 27.3 एकड़ के विशाल और हरे-भरे क्षेत्र में फैला यह जिमखाना 100 साल से भी अधिक पुराना होने के साथ-साथ देश के सबसे लग्जरी क्लबों में गिना जाता है.
जबरन खाली नहीं करवाया जाएगा क्लब
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) द्वारा क्लब को जगह खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद अब यह पूरा मामला दिल्ली हाईकोर्ट की चौखट पर पहुंच चुका है. हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया है कि क्लब को जबरन खाली नहीं कराया जाएगा.
सरकार का बड़ा बयान और कोर्ट की कार्यवाही
दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने साफ तौर पर कहा कि अगर क्लब के लोग 5 जून तक इस जगह को खाली नहीं करते हैं, तो सरकार कानून के तहत तय की गई उचित प्रक्रिया का पालन करेगी. सरकार किसी भी तरह की जल्दबाजी या गैर-कानूनी कदम नहीं उठाएगी. हाईकोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल के इस बयान को अपने रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया है और फिलहाल इस मामले में कोई दूसरा निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया है.
क्लब की जनरल कमेटी ने की थी सरकार से भावुक अपील
इससे पहले दिल्ली जिमखाना क्लब की जनरल कमेटी ने सोमवार को सरकार से बेहद भावुक अपील की थी कि क्लब के कामकाज को प्रभावित न किया जाए. कमेटी का कहना है कि अगर देश की सुरक्षा और रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इस जमीन पर कब्जे की कार्रवाई को आगे बढ़ाना ही है, तो सरकार क्लब को किसी दूसरी जगह पर उतनी ही जमीन उपलब्ध कराए.
करोड़ों का बकाया और रक्षा मंत्रालय की जरूरत
आखिरकार यह ऐतिहासिक और आलीशान क्लब अचानक विवादों के केंद्र में कैसे आ गया? दरअसल, लुटियंस दिल्ली के इस बेहद खास क्लब पर करीब 48 करोड़ रुपये का ग्राउंड रेंट बकाया है. भूमि और विकास कार्यालय ने पिछले साल सितंबर 2025 से लेकर इस साल मार्च 2026 और अप्रैल 2026 में क्लब के मैनेजमेंट को कई नोटिस भेजे थे.
क्या था आखिरी नोटिस?
अपने आखिरी नोटिस में विभाग ने साफ शब्दों में कहा था कि क्लब एक हफ्ते के भीतर अपनी बकाया राशि को जमा कराए. ऐसा न होने पर क्लब की 27.3 एकड़ जमीन वापस ले ली जाएगी. इसके बाद 22 मई को विभाग ने एक और कड़ा पत्र लिखकर क्लब से 5 जून तक सफदरजंग रोड की यह पूरी जगह खाली करने को कह दिया.
कार्रवाई के पीछे बताई महत्वपूर्ण वजह
सरकारी विभाग ने इस कार्रवाई के पीछे एक बेहद महत्वपूर्ण वजह बताई है. विभाग का कहना है कि सरकार को यह जमीन देश के रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत और पूरी तरह से सुरक्षित करने के लिए वापस चाहिए. चूंकि यह क्लब प्रधानमंत्री आवास के ठीक बगल में स्थित है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से भी इसका महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है. हालांकि, 100 साल से भी पुराने इस क्लब को हटाने के फैसले से दिल्ली के रसूखदार गलियारों में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.
अंग्रेजों के जमाने का शानदार इतिहास
अगर इस क्लब के इतिहास पर नजर डालें, तो इसकी शुरुआत अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान जुलाई 1913 में हुई थी. जब साल 1911 में ब्रिटिश भारतीय सरकार ने देश की राजधानी को कोलकाता से हटाकर दिल्ली स्थानांतरित करने का बड़ा फैसला लिया, तो उसी समय इस क्लब को भी दिल्ली में स्थापित किया गया. इसके बाद फरवरी 1928 में सरकार ने यह कीमती जमीन इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब को लीज पर दे दी. साल 1930 के दशक में यहां आलीशान और भव्य इमारतों का निर्माण कार्य पूरा किया गया था.
आजादी के बाद अमीर लोगों का बन गया पसंदीदा ठिकाना
सरकारी दस्तावेजों पर गौर करें, तो यह लीज हमेशा के लिए यानी परपेचुअल दी गई थी, हालांकि इसमें कुछ खास शर्तें भी जोड़ी गई थीं. इसके लिए कोई अंतिम समय-सीमा तय नहीं की गई थी. शुरुआती दौर में यह क्लब विशेष रूप से ब्रिटिश अधिकारियों के मनोरंजन और आराम के लिए आरक्षित था. लेकिन साल 1947 में देश को आजादी मिलने के बाद यह भारतीय नौकरशाही, न्यायपालिका, सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और देश के बेहद अमीर लोगों का सबसे पसंदीदा ठिकाना बन गया.
ये है नाम के पीछे का इतिहास
इस खूबसूरत इमारत को मशहूर आर्किटेक्ट रॉबर्ट टी रसेल ने डिजाइन किया था, जिन्होंने दिल्ली के कनॉट प्लेस और कमांडर-इन-चीफ के आवास को भी नया रूप दिया था. कमांडर-इन-चीफ का यही आवास बाद में 'तीनमूर्ति भवन' के नाम से जाना गया और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का सरकारी आवास बना. आजादी के बाद इस क्लब के नाम से 'इंपीरियल' शब्द को हटाकर इसका नया नाम 'दिल्ली जिमखाना क्लब' रख दिया गया था.
दिल्ली की जमीन पर सरकार का मालिकाना हक
देश के आजाद होने के बाद केंद्र सरकार ने अपने भूमि और विकास कार्यालय के माध्यम से दिल्ली की जमीनों का मालिकाना हक पूरी तरह से अपने हाथों में ले लिया था. इसी विभाग के जरिए दिल्ली में तमाम रिहायशी कॉलोनियों, बड़े संस्थानों, शानदार क्लबों और राजनीतिक पार्टियों के दफ्तरों के विकास के लिए जमीन आवंटित की जाती है और उन्हें लीज पर दिया जाता है. ये लीज एक निश्चित समय के लिए हो सकती हैं, जैसे कि 99 साल या फिर इन्हें हमेशा के लिए भी दिया जा सकता है.
लीज की जमीनों के लिए देना होता है तय किराया
लीज पर दी गई इन जमीनों के लिए एक तय किराया देना होता है, जिसे पट्टे की शर्तों के मुताबिक समय-समय पर बदला और बढ़ाया जा सकता है. रिहायशी संपत्तियों के मामले में सरकार ने पिछले कुछ सालों के दौरान आधे से अधिक संपत्तियों को फ्रीहोल्ड का दर्जा दे दिया है. इसका सीधा मतलब यह होता है कि मालिकाना हक पूरी तरह से बदल जाता है और मालिक को उस जमीन पर पूरा अधिकार मिल जाता है. सीएजी की साल 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस विभाग की जमीन पर मौजूद लगभग 60 हजार संपत्तियों में से करीब 35 हजार संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदला जा चुका है.
क्या है असली विवाद की जड़?
दिल्ली जिमखाना क्लब को 22 मई को भेजे गए अपने सरकारी पत्र में भूमि और विकास कार्यालय ने साफ किया है कि देश के रक्षा ढांचे के लिए इस 27.3 एकड़ जमीन की सख्त जरूरत है. इस पत्र में मूल लीज डीड के क्लॉज 4 का विशेष रूप से जिक्र किया गया है. यह क्लॉज सरकार को यह कानूनी अधिकार देता है कि वह किसी भी सार्वजनिक या राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए इस जमीन पर दोबारा अपना कब्जा जमा सकती है.
कितनी अहम है ये भूमि?
सरकारी पत्र में कहा गया है कि चूंकि यह तय किया गया है कि दिल्ली के एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक इलाके में स्थित यह जगह, देश के रक्षा ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक सुरक्षा के अन्य जरूरी मकसदों के लिए बेहद आवश्यक है, इसलिए इस पर दोबारा कब्जा किया जा रहा है. यह जमीन देश के शासन के ढांचे और जनहित के बड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए बहुत अहम है.
जमीन खाली करवाने के पीछे क्या है उद्देश्य
गौर करने वाली बात यह है कि यह जमीन लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री के सरकारी आवास के ठीक बगल में स्थित है. इसके पास ही रेस कोर्स रोड पर बनी झुग्गियों को भी इस समय अतिक्रमण से मुक्त कराया जा रहा है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार इस पूरे इलाके को किसी बहुत बड़े और बेहद सुरक्षित उद्देश्य के लिए खाली करा रही है.
हजारों सदस्यों के भविष्य का सवाल
सरकारी नोटिस मिलने के बाद क्लब की जनरल कमेटी की एक आपात बैठक 23 मई को बुलाई गई थी. इस बैठक में सरकार के इस कदम के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने और विभाग को एक पत्र भेजने का फैसला किया गया. क्लब के कार्यवाहक सचिव की ओर से भेजे गए पत्र में सरकार से गुजारिश की गई है कि क्लब के कामकाज में किसी भी तरह की रुकावट न डाली जाए.
कमेटी ने दी ये दलील
कमेटी ने दलील दी है कि क्लब के करीब 14 हजार प्रतिष्ठित सदस्य हैं, जो नियमित रूप से अपनी फीस जमा करते हैं. इसके अलावा यहां काम करने वाले 500 कर्मचारियों का रोजगार भी सीधे तौर पर इस फैसले से प्रभावित होगा. क्लब के एक सदस्य ने इस आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने हाईकोर्ट में इस बेहद संवेदनशील मामले का जिक्र करते हुए इसे तुरंत लिस्ट करने की मांग की थी, जिस पर अदालत ने गंभीरता से संज्ञान लिया है.
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान, इन परियोजनाओं के लिए मंजूर किए 1427 करोड़ रुपए
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने तमिलनाडु में एनएच-83 के नागपट्टिनम-तंजावुर खंड पर 4-लेन तिरुवरूर बाईपास के निर्माण के लिए 1,427.61 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है. यह जानकारी मंगलवार को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा दी गई. मंत्रालय ने बताया कि यह परियोजना 14.9 किलोमीटर लंबी है और इसमें एनएच-129ए और एनएच-134ए पर दो अतिरिक्त रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण भी शामिल है.
नितिन गडकरी ने 1,427.61 करोड़ रुपये का किया ऐलान
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया कि तमिलनाडु में, हमने एनएच-83 के नागपट्टिनम-तंजावुर खंड पर 14.9 किलोमीटर लंबे 4-लेन तिरुवरूर बाईपास के निर्माण के साथ ही एनएच-129ए और एनएच-134ए पर 2 अतिरिक्त आरओबी (रोडिंग लाइन) के निर्माण के लिए 1,427.61 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है.
इससे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों को होगा फायदा
यह रणनीतिक परियोजना तिरुचिरापल्ली और कोयंबटूर जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों को कराईकल और नागपट्टिनम जैसे बंदरगाह शहरों से जोड़ने में सहायक होगी, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. मंत्रालय ने बयान में कहा कि आदियाक्कमंगलम-तंडलाई से शुरू होने वाला बाईपास, अतिपुलियूर, अंडीपलायम, किदारमकोंडान, पल्लीवरमंगलम, पेरुम्पुगलुर, इलावंगारकुडी और अनाइवादपति कॉलोनी सहित प्रमुख स्थानों से होकर गुजरेगा.
यातायात को भीड़भाड़ से मिलेगा राहत
इस परियोजना के पूरा हो जाने पर, यह तिरुवरूर शहर में भीड़भाड़ को काफी हद तक कम कर देगा, यात्रा के समय को लगभग 15 मिनट तक घटा देगा और घनी आबादी वाले और वाणिज्यिक क्षेत्रों से यातायात को परिवर्तित कर सड़क सुरक्षा को बढ़ाएगा. बयान में आगे कहा गया कि यह मार्ग मार्ग एसएच-23, एसएच -65 और पूजनीय त्यागराज स्वामी मंदिर से बेहतर संपर्क स्थापित करने में भी सहायक होगा, जिससे क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास और यात्रा में सुगमता दोनों में योगदान मिलेगा.
नीतीन गडकरी ने की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा
इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री गडकरी ने पंजाब में 4,335 किलोमीटर और दिल्ली और हरियाणा में 3,332 किलोमीटर की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और रखरखाव की प्रगति की समीक्षा की. नई दिल्ली में आयोजित समीक्षा बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा और हर्ष मल्होत्रा तथा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों और परियोजना ठेकेदारों ने भाग लिया.
(स्त्रोत - आईएनएस)
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