पीएम मोदी के नेतृत्व में समुद्री क्षेत्र ने पकड़ी विकास की रफ्तार: सर्बानंद सोनोवाल
नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का समुद्री क्षेत्र रिफॉर्म एक्सप्रेस पर आगे बढ़ रहा है और हर सुधार का फायदा सीधे लोगों तक पहुंचना चाहिए।
सोनोवाल ने घोषणा की कि मंत्रालय समुद्री क्षेत्र में सुधार और विकास के 12 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में मैरीटाइम रिफॉर्म उत्सव मनाएगा।
इस पहल के जरिए बंदरगाह, जहाजरानी, अंतर्देशीय जलमार्ग, तटीय बुनियादी ढांचे, ग्रीन शिपिंग, डिजिटलीकरण और समुद्री कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भारत की बड़ी उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे दुनिया में भारत के एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र के रूप में उभरने की तस्वीर सामने आएगी।
सोनोवाल ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता भी की। बैठक में भारत के समुद्री क्षेत्र में तेजी से बदलाव लाने के लिए सुधार आधारित रोडमैप पर चर्चा हुई।
बैठक में सुशासन को मजबूत करने, कारोबार करने में आसानी बढ़ाने, डिजिटल इंटीग्रेशन को बेहतर बनाने, शिकायत निवारण प्रणाली को प्रभावी बनाने और प्रमुख समुद्री परियोजनाओं को तय समय में पूरा करने पर जोर दिया गया। इसके लिए जवाबदेह और व्यवस्थित संस्थागत व्यवस्था तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के गतिशील नेतृत्व में भारत के समुद्री क्षेत्र में रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इन्फॉर्म के मंत्र के जरिए अभूतपूर्व बदलाव आया है।
उन्होंने कहा, मैरीटाइम रिफॉर्म उत्सव भारत के आधुनिक, प्रभावी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री शक्ति बनने की यात्रा का जश्न होगा।
डिजिटल गवर्नेंस और कारोबार में आसानी को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने महानिदेशालय जहाजरानी (डीजी शिपिंग) के तहत एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप विकसित करने का भी फैसला लिया है।
प्रस्तावित प्लेटफॉर्म के जरिए स्टेकहोल्डर्स को बेहतर सुविधाएं, रियल टाइम सेवाएं, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन, शिकायत निवारण और एकीकृत समुद्री सेवाएं एक ही डिजिटल सिस्टम के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।
सोनोवाल ने मंत्रालयों, राज्य सरकारों, बंदरगाह प्राधिकरणों, समुद्री संस्थानों और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि बड़े समुद्री और लॉजिस्टिक प्रोजेक्ट्स पर तेजी से फैसले लिए जा सकें और उनका बेहतर तरीके से क्रियान्वयन हो सके।
उन्होंने अधिकारियों को मंत्रालयों के बीच समन्वय व्यवस्था और संस्थागत परामर्श को मजबूत करने के निर्देश दिए, ताकि नीतियों का बेहतर तरीके से पालन और निगरानी हो सके।
मंत्री ने इसके अलावा परिणामों, प्रतिबद्धताओं और रणनीतिक पहलों की समीक्षा और निगरानी के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग और कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाने के भी निर्देश दिए।
--आईएएनएस
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‘बेटियों की शादी को बचाने के चक्कर में माता-पिता मौत के मुंह में धकेल देते हैं’, सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने दहेज के लिए पत्नी की हत्या करने के मामले में एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इस दौरान, अदालत ने जोर दिया कि अपनी बेटियों की शादी को बचाने के चक्कर में माता-पिता उन्हें मौत के जाल में धकेल सकती है. वे प्रताड़ना की शिकायतों के बाद भी अपने बेटियों को ससुराल वापस भेज देते हैं. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने सवाल पूछा कि क्या युवा सोमा आचार्य की जान बचाई जा सकती थी? क्या सिर्फ सामाजिक बदनामी के डर की वजह से सोमा को भेड़ियों के हवाले नहीं कर दिया गया?
कोर्ट ने क्यों की ये टिप्पणी?
अदालत ने कहा कि सुनवाई के दौरान सामने आया कि सोमा ने अपने साथ हो रही प्रताड़ना को कई बार अपने माता-पिता को बताया था लेकिन बड़ों द्वारा उसके पति के बीच सुलह कराने की कोशिश के बाद उसे वापस भेज दिया गया. जस्टिस विश्वनाथन ने मामले को आंख खोलने वाला बताया. उन्होंने कहा कि बार-बार उसने अपने माता-पिता से उसे बचाने की गुहार लगाई और वह परेशान होकर अपने मायके आई और कुछ दिन उनके साथ भी रही लेकिन जब भी उसने ये मुद्दा उठाया तो हर बार सुलह करवाने और उसको वापस उसके ससुराल भेजने की कोशिश की गई.
'घरवालों ने रखी झूठी उम्मीद'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गांव के बड़े-बड़े बुजुर्ग इसमें शामिल थे और कथित समझौतों के बाद प्रस्ताव पारित किए गए थे. सोमा के अपने करीबियों और प्रियजनों ने ये मान लिया कि किसी न किसी प्रकार से हालात बेहतर हो जाएंगे. उन्हें एक झूठी उम्मीद ने घेर लिया था. हालांकि, जब सोमा की मौत हुई तो उनकी उम्मीदें टूटने लग गईं.
शादी के 15 महीने बाद सोमा का शव फंदे से लटका मिला था. पति ने दलील दी थी कि उसने आत्महत्या की थी. कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि मेडिकल और अन्य सबूत साफ तौर पर दहेज उत्पीड़न से जुड़ी हत्या की ओर ही इशारा करते हैं.
दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे ससुराली
सबूतों से पता चलता है कि सोमा को एक बाइक, टीवी और अन्य सामानों की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया था. उसके माता-पिता ने कुछ मांगे मान ली थी. अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मृतक के शरीर पर मिले जख्म आत्महत्या के लिए फांसी लगाने के किसी सामान्य मामले से मेल नहीं खाते हैं. ये जख्म ऐसे नहीं थे, जिन्हें व्यक्ति खुद पहुंचा सकता हो.
बेंच ने कहा कि मेडिकल सबूतों से संकेत मिलता है कि सोमा की मौत से पहले उसके साथ हिंसा की गई थी, जिससे आत्महत्या की थ्योरी गलत साबित होती है. ये फांसी का नकली मामा लगता है.
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