ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्रों को किसी भी व्यक्ति के जीवन से गहराई से जुड़ा माना जाता है। माना जाता है कि कुछ खास नक्षत्रों में जन्मी लड़कियां अपने पिता के लिए सुख और सौभाग्य लेकर आती हैं। कुछ खास नक्षत्रों में जन्मी लड़कियों के कारण घर में समृद्धि और खुशहाली बढ़ती है। वहीं उनके जन्म से पिता के करियर और आर्थिक स्थिति में भी पॉजिटिव बदलाव देखने को मिलता है। यह लड़कियां अपने गुणों और संस्कार से परिवार का नाम रोशन करती हैं। साथ ही यह घर में आनंद का माहौल बनाए रखती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन नक्षत्रों में जन्मी लड़कियां अपने पिता के लिए शुभ मानी जाती हैं।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक उत्तरा फाल्गुनी, कृतिका और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्मी लड़कियों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और तेज बुद्धि स्वाभाविक रूप से होती है। माना जाता है कि इन नक्षत्रों के प्रभाव से परिवार और खासकर पिता के जीवन में सम्मान और उन्नति बढ़ती है। उत्तरा फाल्गुनी के पहले चरण में जन्मी लड़कियों को ज्यादा शुभ फल देने वाला माना गया है।
रवि नक्षत्र
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को पिता का प्रतिनिधि ग्रह माना जाता है। इसलिए रवि नक्षत्र में जन्मी लड़कियां अपने पिता के लिए भाग्यशाली मानी जाती है। इस नक्षत्र में जन्मी लड़कियों में सूर्य के प्रभाव की वजह से निर्णय लेने की क्षमता, साहस और नेतृत्व गुण ज्यादा स्पष्ट होते हैं। यह लड़कियां जीवन की मुश्किल परिस्थितियों में भी मजबूती के साथ खड़ी रहती हैं।
रोहिणी, हस्त और श्रवण नक्षत्र
रोहिणी, हस्त और श्रवण नक्षत्रों में जब चंद्रमा स्थित होता है, उस समय जन्मी लड़कियां परिवार में संतुलन और शांति बनाए रखने में सहायक मानी जाती है। इन लड़कियों के स्वभाव में धैर्य, प्रेम और संवेदनशीलता होती है। जिससे घर-परिवार के रिश्ते मजबूत होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
मृगशिरा और धनिष्ठा नक्षत्र
वहीं मृगशिरा और धनिष्ठा नक्षत्रों में जन्मी लड़कियां प्रतिभाशाली और मेहनती होती हैं। वह अपनी काबिलियत के दम पर जीवन में आगे बढ़ती हैं और परिवार को भी सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाती हैं। माना जाता है कि इस नक्षत्र में जन्मी लड़कियां जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम होती हैं और कई बार फैमिली में अहम भूमिका निभाती हैं।
Continue reading on the app
QUAD Meeting: दिल्ली में चल रही QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक को इंडो-पैसिफिक की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. चीन के बढ़ते प्रभाव, ट्रंप-पुतिन की नजदीकियों और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत इस मंच के जरिए खुद को संतुलनकारी शक्ति के रूप में पेश करना चाहता है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अध्यक्षता में हो रही बैठक में अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि शामिल हैं. सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर QUAD ठोस फैसले लेता है तो भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का गेमचेंजर बन सकता है.
Continue reading on the app