मानसून सत्र का आज आखिरी दिन:जंतर-मंतर प्रदर्शन पर शाह जवाब दे सकते हैं, रिजिजू बोले- विपक्ष चाहे तो सत्र बढ़ा सकते हैं
मानसून सत्र का आज आखिरी दिन है। 20 जुलाई से शुरू हुए सत्र में विपक्ष NEET पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर लगातार हंगामा कर रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने जंतर-मंतर प्रदर्शन पर संसद में चर्चा की पेशकश करते हुए स्पीकर को पत्र लिखा है। समय तय होने पर वे गुरुवार को जवाब दे सकते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष को शाह का “लेक्चर” नहीं चाहिए, पहले बताएं कि छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, ‘मैं पूरी तरह निराश हूं। सरकार चर्चा चाहती है, लेकिन विपक्ष भाग रहा है।’ उन्होंने कहा कि विपक्ष तैयार हो तो सत्र बढ़ाया जा सकता है। मानसून सत्र के तीसरे हफ्ते की कार्यवाही 3 अगस्तः राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया। लोकसभा ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या (CJI सहित) 34 से बढ़ाकर 38 करने संबंधी बिल बिना चर्चा के पास कर दिया। पूरी खबर पढ़ें… 4 अगस्तः राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच बहस हुई। खड़गे ने कहा- राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था। सरकार को चढ़ावा चोरी मामले पर सदन में जवाब देना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें… 5 अगस्त: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ 50 मिनट बैठक की। सरकार लोकसभा सीटें 816 करने और 33% महिला आरक्षण लागू करने से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पास कराना चाहती है। पूरी खबर पढ़ें… 6 अगस्त: दिल्ली में छात्रों पर हुई लाठीचार्ज मामले में अमित शाह के बयान की मांग को लेकर राज्यसभा में खड़गे और रिजिजू के बीच तीखी बहस हुई।खड़गे ने सभापति से गृहमंत्री को सदन में बुलाने के लिए आदेश देने की अपील की। पूरी खबर पढ़ें… 7 अगस्त: विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) MSME विधेयक 2026 ध्वनिमत से पास हुआ। दोनों सदन सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिए गए हैं। पूरी खबर पढ़ें… मानसून सत्र के दूसरे हफ्ते की कार्यवाही 27 जुलाई: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026' को लेकर विपक्षी पार्टियों के नेताओं से बातचीत की। पूरी खबर पढ़ें… 28 जुलाई: लोकसभा में प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाने पर हंगामा हुआ। संसद के बाहर राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने रेपिस्ट की पैरवी करने वाले शख्स को शिक्षा मंत्री बनाया है। पूरी खबर पढ़ें… 29 जुलाई: लोकसभा में पेपर लीक से जुड़ा 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 बुधवार को ध्वनि मत से पास हो गया। पूरी खबर पढ़ें… 30 जुलाईः पेपर लीक से जुड़ा संशोधन बिल लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा में भी पास हो गया। अब ये बिल राष्ट्रपति के पास जाएगा। उनकी सहमति मिलते ही यह कानून बन जाएगा। पूरी खबर पढ़ें… 31 जुलाईः विपक्षी सांसदों ने शुक्रवार को संसद परिसर में राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर प्रदर्शन किया। सांसद पप्पू यादव पुजारी के वेश में दानपेटी लेकर पहुंचे। पूरी खबर पढ़ें… मानसून सत्र के पहले हफ्ते की कार्यवाही 20 जुलाई: राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खड़गे ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने के लिए लाठीचार्ज करा रही है और गृह मंत्री से जवाब मांगा। पूरी खबर पढ़ें… 21 जुलाई: संसद सत्र शुरू होने से पहले NDA और INDIA गठबंधन की अलग-अलग बैठकें हुईं। विपक्ष के हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही प्रभावित रही। पूरी खबर पढ़ें… 22 जुलाई: राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च और धरना देने की कोशिश की। संसद में भी लगातार विरोध के कारण कामकाज प्रभावित हुआ। पढ़ें पूरी खबर… 23 जुलाई: संसद परिसर में NDA और INDIA गठबंधन के सांसद आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की और माहौल गर्म रहा। पूरी खबर पढ़ें… 24 जुलाई: राज्यसभा में 'राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किया गया। इसमें 'वंदे मातरम्' के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रस्ताव रखा गया। पूरी खबर पढ़ें…
रिपोर्ट-ईरान को पता था तुर्किये में कहां रुकेंगे ट्रम्प:बिल्डिंग के फ्लोर की भी जानकारी; कल ट्रम्प ने कहा था- ईरान के डर से प्लेन बदला
ईरानी एजेंट्स को पता था कि 7 जुलाई को तुर्की के अंकारा में हुए NATO समिट में ट्रम्प किस बिल्डिंग में रुके हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस ने यह आकलन किया है। ईरान को यह भी पता था कि ट्रम्प बिल्डिंग के किस फ्लोर पर रुके हैं। इसी जानकारी के बाद ट्रम्प को तुर्की से दूसरे विमान में ले जाया गया। मंगलवार को ट्रम्प ने भी ईरान के डर से विमान बदलने की बात मानी थी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से नाटो समिट में हिस्सा लेने गए थे, उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया। ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन में दाखिल हुए एयरफोर्स वन के पीछे एक केटरिंग ट्रक नजर आ रही है ट्रम्प के खिलाफ खास खतरे की जानकारी मिली रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रम्प को ले जाने वाले किसी भी विमान पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से हमला किया जा सकता था। अमेरिकी इंटेलिजेंस को पता चला कि नाटो शिखर सम्मेलन के आसपास एक व्यक्ति कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा गया था। इसके बाद सीक्रेट सर्विस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने ट्रम्प को तुर्की से निकालने के लिए ऑपरेशन तैयार किया। कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं। तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।" ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। ------------------------ यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अधिकारी बोले- मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझाएंगे:कहा- उनके बीच अच्छे संबंध; 5 दिन पहले अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल पास हुआ था अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े 100% टैरिफ के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। पूरी खबर पढ़ें… 8 जुलाई को बदला गया विमान यह खतरा 8 जुलाई को सामने आया, जब ट्रम्प नाटो शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन अंकारा से रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह पुराने एयरफोर्स वन विमान से तुर्की से निकलेंगे, जिसे उन्होंने “पुराने समय की याद के लिए” बताया था। कैमरों के सामने ट्रम्प को उसी विमान में सवार होते देखा गया। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में उन्हें गुप्त रूप से एयरपोर्ट के कैटरिंग कंटेनर के जरिए उस विमान से निकाला गया और छोटे सैन्य विमान में ले जाया गया। पुराना एयरफोर्स वन विमान ट्रम्प के साथ व्हाइट हाउस के अधिकारियों, सुरक्षा कर्मचारियों और पत्रकारों को लेकर रवाना हुआ। इस तरह वह विमान एक डिकॉय के तौर पर काम कर रहा था। इसके बाद ट्रम्प ब्रिटेन में रुके। वहां उन्होंने गुप्त रूप से दोबारा उस विमान में सवारी की और बाद में कतर से मिले बोइंग 747-8 विमान में लौटे। ट्रम्प ने कहा- मुझे दूसरे विमान में भेजना चाहते थे ट्रम्प ने मंगलवार को पुष्टि की कि उन्हें दूसरे विमान में ले जाया गया था। उन्होंने बताया कि सीक्रेट सर्विस और सेना ने उनसे कहा था कि वे चाहते हैं कि ट्रम्प किसी दूसरे विमान से जाएं। द एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा, “वे चाहते थे कि मैं दूसरी फ्लाइट, दूसरे विमान से जाऊं।” उन्होंने कहा, “शायद बाहर कोई खतरा था। मैंने इसके बारे में ज्यादा नहीं पूछा। मुझे बहुत धमकियां मिलती हैं।” ट्रम्प ने खतरे को कम करके बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि जिस विमान से वह वास्तव में गए थे, वह शायद ज्यादा खतरे में था। डिकॉय ऑपरेशन को असामान्य क्यों माना गया खतरनाक जगहों की यात्राओं के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी गुप्त यात्रा योजनाओं और डिकॉय विमानों का इस्तेमाल कर चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2023 में गुप्त रूप से कीव की यात्रा की थी। वह पहले पोलैंड गए और वहां से रात में गुप्त ट्रेन के जरिए यूक्रेन पहुंचे। दो पत्रकार उनके साथ थे और यात्रा शुरू होने के बाद उन्होंने इस दौरे की जानकारी दर्ज की थी। ट्रम्प ने 2019 में अफगानिस्तान की गुप्त थैंक्सगिविंग यात्रा भी की थी। अधिकारियों ने एक डिकॉय विमान और अलग प्रेस पूल का इस्तेमाल किया था, ताकि यह impression बना रहे कि ट्रम्प छुट्टियां अपने मार-ए-लागो एस्टेट में मना रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और बिल क्लिंटन ने भी सुरक्षा कारणों से गुप्त यात्राएं की थीं या यात्रा के दौरान भ्रम पैदा करने वाली व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया था। ट्रम्प के मामले में असामान्य बात यह थी कि वह तत्काल खतरे वाले इलाके से निकलने के बाद भी यह धोखा जारी रहा। उनके साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल को नहीं बताया गया कि राष्ट्रपति उस विमान में नहीं थे, जिसे वे राष्ट्रपति को ले जाने वाला विमान समझ रहे थे। “रेवेन रॉक” किताब के लेखक गैरेट एम ग्राफ ने एपी से कहा कि राष्ट्रपति पहले भी बिना पहचान वाले या डिकॉय विमानों से यात्रा कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के ठिकाने को लेकर लंबे समय तक जानकारी छिपाए जाने को अभूतपूर्व बताया। ईरान पहले भी ट्रम्प को निशाना बना चुका है ट्रम्प पहले भी ईरान से जुड़ी धमकियों और साजिशों का निशाना बन चुके हैं। 2024 में पेंसिलवेनिया के बटलर में चुनावी रैली के दौरान एक संभावित हमलावर की गोली उन्हें छूकर निकल गई थी। उसी साल बाद में फ्लोरिडा के उनके गोल्फ कोर्स में एक हथियारबंद व्यक्ति ने भी उन्हें निशाना बनाया था। हत्या के ये दोनों प्रयास ईरान से जुड़ी धमकियों से अलग थे। इसके अलावा, ट्रम्प की हत्या के लिए सुपारी देने की साजिश के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया था। इस साजिश का पता बाइडेन प्रशासन के दौरान चला था। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि यह साजिश ईरानी एजेंट्स के एक प्रॉक्सी के जरिए काम करने से जुड़ी थी। द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ताजा खुफिया जानकारी ट्रम्प के अंकारा में रहने के दौरान मिले एक खास खतरे से जुड़ी थी।
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