पूजा में शंख बजाने का क्या है रहस्य? जानें इसका धार्मिक महत्व और सही तरीका
Shankh bajane ka mahatva: हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ, आरती या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत में शंख बजाने की परंपरा बेहद प्राचीन काल से चली आ रही है। मान्यता है कि शंख की ध्वनि से वातावरण पवित्र होता है और देवी-देवताओं का आह्वान होता है। यही कारण है कि लगभग हर मंदिर और घर की पूजा में आरती के समय शंख जरूर बजाया जाता है।
भगवान विष्णु से जुड़ी है शंख की पौराणिक कथा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शंख को भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय और पवित्र प्रतीक माना जाता है। भगवान विष्णु के चार हाथों में से एक हाथ में हमेशा शंख देखा जाता है, जिसे "पांचजन्य" के नाम से जाना जाता है। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि समुद्र मंथन के दौरान शंख की उत्पत्ति हुई थी, इसी वजह से इसे देवताओं और असुरों के बीच हुए इस महान मंथन से निकला एक दिव्य रत्न भी माना जाता है।
इसके अलावा महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण के शंख "पांचजन्य" का उल्लेख भी मिलता है, जिसकी ध्वनि से युद्धभूमि में विपक्षी सेना के मन में भय उत्पन्न हो जाता था।
शंख बजाने के पीछे की धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि शंख की ध्वनि से घर और आसपास के वातावरण में मौजूद नकारात्मक शक्तियां और बुरी आत्माएं दूर भागती हैं। इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि नियमित रूप से शंख बजाने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसी वजह से पूजा और आरती के समय शंखनाद करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
कुछ मान्यताओं के अनुसार, दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा के समय शंख बजाना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है, क्योंकि इससे घर में धन और समृद्धि का आगमन होता है।
किन दिनों में नहीं बजाना चाहिए शंख?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कुछ विशेष अवसरों पर शंख बजाने की मनाही होती है। मान्यता है कि सूतक और पातक के समय, यानी परिवार में जन्म या मृत्यु होने की स्थिति में शंख नहीं बजाना चाहिए। इसके अलावा शाम के समय एक बार से ज्यादा शंख बजाने से भी बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है।
घर में शंख रखने का भी है खास महत्व
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वास्तु शास्त्र में भी शंख को घर के लिए अत्यंत शुभ बताया गया है। कहा जाता है कि घर के पूजा स्थान में शंख रखने से घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। हालांकि यह भी सलाह दी जाती है कि पूजा में इस्तेमाल होने वाले शंख को नियमित रूप से साफ रखा जाए और उसे स्वच्छ स्थान पर ही रखा जाए।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय, व्रत या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान या पंडित से सलाह अवश्य लें।
Sawan Ekadashi 2026: कामिका एकादशी पर करें ये खास उपाय, धन-दौलत से लेकर करियर और विवाह तक में मिल सकता है लाभ
Sawan Ekadashi 2026: कामिका एकादशी आज रविवार, 9 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। सावन मास की कृष्ण पक्ष की इस एकादशी को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से श्रीहरि की पूजा करने से भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना करने से मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
इस दिन पूजा-पाठ के साथ कुछ विशेष धार्मिक उपाय करने की भी परंपरा है। मान्यता के अनुसार इन उपायों को श्रद्धा के साथ करने से आर्थिक परेशानियों, पारिवारिक कलह, विवाह संबंधी अड़चनों और करियर से जुड़ी समस्याओं में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। आइए जानते हैं कामिका एकादशी के दिन किए जाने वाले कुछ प्रमुख उपाय।
आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए
अगर आप आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं या आमदनी में स्थिरता चाहते हैं तो एकादशी के दिन स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान करें। इसके बाद 'ॐ नमो भगवते नारायणाय' मंत्र का जाप करते हुए तुलसी को प्रणाम करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मकता और समृद्धि का वातावरण बनता है।
कारोबार में तरक्की के लिए
व्यापार में लगातार मंदी चल रही है तो पूजा के समय पीले वस्त्र की एक छोटी पोटली तैयार कर सकते हैं। इसमें हल्दी की गांठ, एक सिक्का और पीली कौड़ी रखकर पोटली बांधें। भगवान विष्णु के सामने इसे रखकर पूजा करें और बाद में इसे उस स्थान पर रखें जहां आप धन या व्यापार से जुड़े जरूरी कागजात रखते हैं। इसे श्रद्धा आधारित उपाय माना जाता है।
पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता के लिए
दांपत्य जीवन में तनाव या आपसी दूरी महसूस हो रही हो तो एक नारियल को पीले कपड़े में लपेटकर मौली से बांधें। इसके बाद भगवान विष्णु के मंदिर में श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। मान्यता है कि यह उपाय वैवाहिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आपसी प्रेम बढ़ाने के उद्देश्य से किया जाता है।
मनपसंद विवाह के लिए
विवाह में बार-बार बाधा आ रही हो तो कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। पूजा के बाद 'ॐ लक्ष्मी नारायणाय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके पश्चात अपने विवाह और भविष्य के लिए भगवान से प्रार्थना करें।
परिवार में सुख-शांति के लिए
अगर परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव चल रहा है तो भगवान विष्णु की पूजा के दौरान शंख में जल भरकर श्रीहरि को अर्पित करने की परंपरा बताई गई है। जल में थोड़ा गंगाजल मिलाया जा सकता है। पूजा के बाद इसे प्रसाद स्वरूप परिवार के सदस्यों को दिया जाता है। धार्मिक दृष्टि से इसे पारिवारिक शांति के लिए किया जाने वाला उपाय माना जाता है।
नौकरी और प्रमोशन के लिए
अगर नौकरी मिलने में लगातार परेशानी आ रही है या लंबे समय से प्रमोशन की प्रतीक्षा है तो कामिका एकादशी के दिन गेहूं से भरा मिट्टी का घड़ा किसी जरूरतमंद या योग्य ब्राह्मण को दान करने की परंपरा है। दान करते समय अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यताओं में अन्नदान को विशेष महत्व दिया गया है।
कर्ज से राहत के लिए
कर्ज से परेशान लोगों के लिए एकादशी के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने की मान्यता है। स्नान के बाद पीपल के वृक्ष की श्रद्धापूर्वक परिक्रमा करें और उसकी जड़ में जल अर्पित करें। इसके बाद भगवान से आर्थिक परेशानियां दूर होने की प्रार्थना करें। किसी भी उपाय के साथ अपने वित्तीय प्रबंधन और कर्ज चुकाने की व्यावहारिक योजना पर भी ध्यान देना जरूरी है।
धन लाभ के लिए
आर्थिक स्थिति में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है तो कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु का व्रत और पूजन करें। इसके साथ पीले रेशमी कपड़े में सात हल्दी की गांठें बांधकर केले के पेड़ के पास श्रद्धापूर्वक रखने की परंपरा बताई जाती है। इस उपाय को धन-समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
करियर और कारोबार में सफलता के लिए
करियर या व्यापार में आगे बढ़ने की इच्छा रखने वाले लोग एक पीपल का पत्ता लेकर उस पर हल्दी से स्वास्तिक बना सकते हैं। इसे भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करते हुए 'ॐ नमो भगवते नारायणाय' मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान को पीली मिठाई या केले का भोग लगाने की परंपरा है।
कामिका एकादशी पर इन बातों का रखें ध्यान
कामिका एकादशी के उपाय धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य श्रद्धा, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक विश्वास को बढ़ावा देना है। किसी भी उपाय को निश्चित रूप से धन, नौकरी, विवाह या अन्य समस्या का समाधान मानने के बजाय धार्मिक आस्था के रूप में अपनाना उचित है। साथ ही व्रत रखने वाले लोग अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही उपवास करें।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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