घर में दीपक जलाने की सही दिशा क्या है? जानें इससे जुड़े धार्मिक नियम और मान्यताएं
Diya jalane ki disha niyam: हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत दीपक जलाए बिना अधूरी मानी जाती है। मान्यता है कि दीपक की लौ न सिर्फ अंधकार को दूर करती है, बल्कि यह ज्ञान, सकारात्मकता और ईश्वर की उपस्थिति का भी प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि सुबह-शाम पूजा के समय हर हिंदू घर में दीपक जलाने की परंपरा सदियों से निभाई जा रही है।
दीपक जलाने की सही दिशा को लेकर मान्यता
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, दीपक जलाते समय उसकी दिशा का खास ध्यान रखा जाता है। मान्यता है कि घी का दीपक जलाते समय उसकी बाती को पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है, क्योंकि पूर्व दिशा को सूर्योदय और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। वहीं तेल के दीपक की बाती को दक्षिण दिशा की ओर रखने की परंपरा है, जिसे यमराज की दिशा से जोड़कर देखा जाता है और इसे नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा से जोड़ा जाता है।
हालांकि यह भी मान्यता है कि दीपक की बाती कभी भी उत्तर दिशा की ओर नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है।
घी और तेल के दीपक का अलग-अलग महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, घी के दीपक को देवी-देवताओं की पूजा में विशेष रूप से शुभ माना जाता है और इसे सुख-समृद्धि लाने वाला बताया गया है। वहीं तेल के दीपक को शनि देव और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि शनिवार के दिन तेल का दीपक जलाना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
दीपक जलाते समय रखें इन बातों का ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक जलाने से पहले दीपक के स्थान और आसपास की जगह को स्वच्छ रखना बेहद जरूरी माना जाता है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि दीपक जलाते समय मन में भगवान का ध्यान करना चाहिए और दीपक को कभी भी बुझने नहीं देना चाहिए, क्योंकि बीच में दीपक का बुझ जाना अशुभ संकेत माना जाता है।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, टूटे-फूटे या चटके हुए दीपक का इस्तेमाल पूजा में नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है।
सुबह-शाम दीपक जलाने की परंपरा का महत्व
हिंदू परंपरा में सुबह और शाम दोनों समय दीपक जलाने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि सुबह दीपक जलाने से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है, जबकि शाम के समय दीपक जलाने से घर में सुख-शांति का वास होता है। खासतौर पर संध्या के समय दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इसी समय को देवी-देवताओं के जागरण का समय माना जाता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय, व्रत या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान या पंडित से सलाह अवश्य लें।
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का साया, क्या बदलेगा राखी बांधने का मुहूर्त?
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना करती हैं, जबकि भाई बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेते हैं।
साल 2026 का रक्षाबंधन कुछ खास संयोग लेकर आ रहा है। 28 अगस्त, शुक्रवार को रक्षाबंधन मनाया जाएगा और इसी दिन आंशिक चंद्र ग्रहण भी पड़ेगा। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ग्रहण के कारण राखी बांधने का शुभ समय बदल जाएगा और क्या त्योहार पर सूतक काल प्रभावी होगा?
28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन
पंचांग के अनुसार, 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन श्रावण पूर्णिमा तिथि रहेगी। दी गई जानकारी के मुताबिक पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त होने की बात कही गई है। ऐसे में भद्रा के कारण राखी बांधने में बाधा की स्थिति नहीं रहेगी।
रक्षाबंधन के दिन कब लगेगा चंद्र ग्रहण?
28 अगस्त 2026 को साल का दूसरा चंद्र ग्रहण बताया जा रहा है। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। दी गई खगोलीय गणना के अनुसार इसकी आंशिक अवस्था भारतीय समय के मुताबिक सुबह करीब 8 बजकर 3 मिनट से शुरू होकर 11 बजकर 22 मिनट तक रह सकती है। ग्रहण का चरम करीब 9 बजकर 43 मिनट पर बताया गया है। हालांकि, इस ग्रहण की सबसे अहम बात यह है कि यह भारत में दिखाई नहीं देगा।
क्या चंद्र ग्रहण से बदलेगा राखी बांधने का मुहूर्त?
ग्रहण को लेकर सबसे ज्यादा चिंता राखी बांधने के समय को लेकर होती है। चूंकि 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए दी गई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां इसके कारण रक्षाबंधन की राखी बांधने की परंपरा पर कोई विशेष रोक नहीं होगी।
यानी बहनें निर्धारित शुभ समय में भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। केवल ग्रहण की खबर सुनकर राखी बांधने का समय बदलने की जरूरत नहीं होगी।
क्या रक्षाबंधन पर लगेगा सूतक काल?
चंद्र ग्रहण से पहले सूतक काल की धार्मिक मान्यता है। हालांकि, सूतक को लेकर परंपराओं में ग्रहण के भारत में दिखाई देने या न दिखाई देने को भी महत्व दिया जाता है।
चूंकि यह आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होने की बात कही जा रही है। ऐसे में रक्षाबंधन के दिन भारत में पूजा-पाठ और राखी बांधने की परंपरा सामान्य रूप से निभाई जा सकती है।
इन देशों में दिखाई दे सकता है चंद्र ग्रहण
28 अगस्त का आंशिक चंद्र ग्रहण भारत के अलावा दुनिया के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। इसकी दृश्यता मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण अमेरिका के कई क्षेत्रों में रहने की संभावना बताई गई है। ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा के एक हिस्से पर पड़ेगी, जिसके कारण यह आंशिक चंद्र ग्रहण के रूप में नजर आएगा।
रक्षाबंधन पर ऐसे बांधें भाई को राखी
रक्षाबंधन के दिन बहन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा की थाली तैयार करें। थाली में राखी, रोली, अक्षत, दीपक और मिठाई रखी जा सकती है।
सबसे पहले भगवान का पूजन करें। इसके बाद भाई को तिलक लगाकर उसकी कलाई पर राखी बांधें। राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई खिलाएं और उसके सुखी जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को उपहार देकर उसके सम्मान, सुरक्षा और खुशियों का हमेशा ध्यान रखने का संकल्प लेता है।
रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण का संयोग क्यों खास?
2026 में रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण का एक ही दिन पड़ना खगोलीय दृष्टि से खास संयोग है। हालांकि भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां रहने वाले लोगों के लिए रक्षाबंधन की सामान्य धार्मिक परंपराओं में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं बताई जा रही है।
फिर भी अलग-अलग पंचांग और स्थानीय धार्मिक परंपराओं में मुहूर्त को लेकर अंतर हो सकता है। इसलिए राखी बांधने के सटीक शुभ समय के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग या स्थानीय ज्योतिषाचार्य से पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
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