NEET SS Counselling 2025: सुपर स्पेशियलिटी सीटों की वर्चुअल वैकेंसी लिस्ट जारी, जानें पूरी डिटेल
NEET SS Counselling 2025 के Round 2 में शामिल होने वाले मेडिकल उम्मीदवारों के लिए जरूरी अपडेट सामने आया है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने दूसरे राउंड की Virtual Vacancy List जारी कर दी है।
इस लिस्ट में देशभर के भाग लेने वाले मेडिकल संस्थानों में DM, M.Ch और DNB SS जैसे सुपर स्पेशियलिटी कोर्स की कुल 5,605 वर्चुअल वैकेंसी दिखाई गई हैं। उम्मीदवार इस लिस्ट की मदद से यह समझ सकते हैं कि दूसरे राउंड की काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान किन संस्थानों और स्पेशियलिटी में सीट उपलब्ध होने की संभावना बन सकती है।
DM और M.Ch की 3243 सीटें
जारी Virtual Vacancy List के मुताबिक Round 2 में DM और M.Ch की कुल 3,243 सीटें शामिल हैं। इनमें कई प्रमुख सुपर स्पेशियलिटी कोर्स शामिल हैं।
DM में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, क्रिटिकल केयर मेडिसिन, पल्मोनरी मेडिसिन और क्लिनिकल हेमेटोलॉजी जैसी स्पेशियलिटी शामिल हैं।
वहीं M.Ch में न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी समेत अन्य सुपर स्पेशियलिटी कोर्स शामिल हैं।
DNB SS की 2362 वर्चुअल सीटें
Virtual Vacancy List में DNB SS की 2,362 सीटें भी शामिल हैं। इनमें कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, क्रिटिकल केयर मेडिसिन और मेडिकल ऑन्कोलॉजी जैसी प्रमुख स्पेशियलिटी उपलब्ध हैं।
इसके अलावा DNB SS में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, जेनिटो यूरिनरी सर्जरी (यूरोलॉजी), कार्डियक एनेस्थीसिया और अन्य सुपर स्पेशियलिटी कोर्स भी शामिल हैं।
कुल 5605 वर्चुअल वैकेंसी
MCC की ओर से जारी सूची में सीटों का विवरण संस्थान के हिसाब से दिया गया है। इसमें राज्य, मेडिकल कॉलेज या अस्पताल, कोटा, कोर्स/स्पेशियलिटी, कैटेगरी और वर्चुअल सीटों की संख्या जैसी जानकारी शामिल है।
कौन-कौन से कोर्स शामिल हैं?
DM:
- कार्डियोलॉजी
- न्यूरोलॉजी
- नेफ्रोलॉजी
- मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
- एंडोक्राइनोलॉजी
- मेडिकल ऑन्कोलॉजी
- क्रिटिकल केयर मेडिसिन
- पल्मोनरी मेडिसिन
- क्लिनिकल हेमेटोलॉजी
- अन्य DM स्पेशियलिटी
M.Ch:
- न्यूरोसर्जरी
- यूरोलॉजी
- प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी
- पीडियाट्रिक सर्जरी
- सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
- सर्जिकल ऑन्कोलॉजी
- कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी
- अन्य M.Ch स्पेशियलिटी
DNB SS:
- कार्डियोलॉजी
- न्यूरोलॉजी
- नेफ्रोलॉजी
- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
- क्रिटिकल केयर मेडिसिन
- मेडिकल ऑन्कोलॉजी
- सर्जिकल ऑन्कोलॉजी
- जेनिटो यूरिनरी सर्जरी (यूरोलॉजी)
- कार्डियक एनेस्थीसिया
- अन्य DNB SS स्पेशियलिटी
उम्मीदवारों के लिए क्यों जरूरी है Virtual Vacancy List?
Round 2 में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवार इस सूची को देखकर अपनी चॉइस फिलिंग की रणनीति तैयार कर सकते हैं। संस्थान और स्पेशियलिटी के अनुसार सीटों की स्थिति जानने से उम्मीदवारों को उपलब्ध विकल्पों का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, वर्चुअल वैकेंसी काउंसलिंग के दौरान बदल सकती है। इसलिए उम्मीदवारों को अंतिम सीट अलॉटमेंट से पहले MCC की ओर से जारी अपडेट और अंतिम सीट मैट्रिक्स को जरूर देखना चाहिए।
UPI Payment New Rule: ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर लग सकता है MDR चार्ज, सरकार कर रही नए नियमों की तैयारी
UPI Payment New Rule: अगर आप Paytm, PhonePe, Google Pay या किसी अन्य UPI ऐप के जरिए ₹2,000 से अधिक का भुगतान करते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने Payment and Settlement Systems Act में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है, जिससे भविष्य में चुनिंदा UPI ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने का कानूनी प्रावधान बनाया जा सकता है।
हालांकि फिलहाल UPI भुगतान पर कोई नया शुल्क लागू नहीं किया गया है। यदि संसद इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो सरकार बाद में अलग अधिसूचना जारी कर MDR लागू कर सकती है। प्रस्ताव के अनुसार, यह शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं बल्कि पात्र व्यापारियों (Merchants) से लिया जा सकता है।
क्या ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार और संबंधित पक्षों के बीच एक प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है, जिसके तहत ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% तक MDR लगाया जा सकता है। हालांकि यह प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं है और इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।
किन कारोबारियों पर लागू हो सकता है नियम?
प्रस्ताव के अनुसार, MDR केवल उन व्यापारियों (Merchants) पर लागू हो सकता है, जिनका सालाना कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है। सरकार एक अन्य मॉडल पर भी विचार कर रही है, जिसमें ट्रांजैक्शन की राशि के बजाय व्यापारी के वार्षिक कारोबार के आधार पर शुल्क तय किया जा सकता है। इसके अलावा MDR की अधिकतम सीमा तय करने पर भी चर्चा हो रही है।
क्या ग्राहकों को देना होगा अतिरिक्त पैसा?
मौजूदा प्रस्ताव के अनुसार MDR का भुगतान ग्राहकों को नहीं, बल्कि व्यापारियों को करना होगा। यानी यदि यह नियम लागू होता भी है, तो शुल्क सीधे उपभोक्ताओं से नहीं लिया जाएगा। हालांकि कुछ बड़े व्यापारी अपनी व्यावसायिक रणनीति के तहत इस अतिरिक्त लागत को उत्पाद या सेवाओं की कीमत में शामिल कर सकते हैं। वहीं छोटे कारोबारियों को इस प्रस्ताव के दायरे से बाहर रखा जा सकता है।
सरकार यह बदलाव क्यों करना चाहती है?
फिलहाल UPI पर Zero MDR व्यवस्था लागू है। इसका मतलब है कि UPI भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारियों से कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं ली जाती। बैंकों और डिजिटल पेमेंट कंपनियों का कहना है कि बिना MDR के डिजिटल पेमेंट नेटवर्क का विस्तार और रखरखाव करना मुश्किल हो रहा है। कार्ड पेमेंट्स में जहां व्यापारी पहले से प्रोसेसिंग फीस देते हैं, वहीं UPI में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
भारत में UPI का कितना बड़ा नेटवर्क है?
UPI आज देश का सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म बन चुका है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने UPI के जरिए 23.7 अरब (23.7 Billion) से अधिक ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये रही।रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन कुल UPI भुगतान का केवल लगभग 5% हैं, लेकिन कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी करीब 65% है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
अभी तक ₹2,000 से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई MDR लागू नहीं किया गया है। सरकार ने केवल ऐसा कानूनी प्रावधान तैयार करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर अधिसूचना जारी कर शुल्क लागू किया जा सके। अंतिम फैसला संसद की मंजूरी और बाद की सरकारी अधिसूचना पर निर्भर करेगा।
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