रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर पर चार्जशीट दाखिल:4 NHAI रोड प्रोजेक्ट्स से ₹187 करोड़ की हेराफेरी का आरोप, फर्जी बिल और डायमंड इम्पोर्ट के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग
प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, उसके पूर्व डायरेक्टर सतीश सेठ और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम PMLA के तहत चार्जशीट दाखिल की है। यह कार्रवाई नई दिल्ली के द्वारका जिला अदालत स्थित विशेष PMLA कोर्ट में 8 अगस्त को की गई। ED ने इस मामले में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर पर आरोप लगाया है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI की चार रोड प्रोजेक्ट्स के सार्वजनिक पैसों का इस्तेमाल सड़क निर्माण में करने के बजाय फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए कहीं और ट्रांसफर कर दिया गया। फर्जी बिल और डायमंड इम्पोर्ट के बहाने मनी लॉन्ड्रिंग इस मामले की नींव मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा 11 फरवरी 2026 को दर्ज की गई FIR (सं. 172/2026) पर टिकी है। EOW की जांच में सामने आया था कि फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों की मदद से कई शेल कंपनियां बनाई गईं। इन शेल कंपनियों का इस्तेमाल जाली इनवॉइस यानी फर्जी बिल और अत्यधिक कीमत पर हीरे इम्पोर्ट दिखाने के बहाने फंड की आवाजाही और विदेश पैसे भेजने के लिए किया जा रहा था। इसी FIR के आधार पर ED ने PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। 4 हाईवे प्रोजेक्ट्स के पैसों का हुआ डायवर्जन ED की जांच के अनुसार, NHAI द्वारा अलॉट की गई चार प्रमुख टोल-रोड परियोजनाओं में जनता और बैंकों का पैसा लगा हुआ था। ये चार प्रोजेक्ट्स निम्नलिखित हैं: इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए NHAI से अनुदान और बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थानों से लोन लिया गया था। जांच में सामने आया कि सितंबर से अक्टूबर 2010 के बीच लगभग ₹187 करोड़ की रकम बैक-डेटेड यानी पुराने समय की संविदाओं और फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग व्यवस्थाओं के जरिए कंपनी से बाहर निकाली गई। कैसे घुमाया गया फंड: कंस्ट्रक्शन से डायमंड ट्रेडर्स तक मनी ट्रेल ₹187 करोड़ की संपत्ति अटैच, सतीश सेठ जेल में जांच एजेंसी ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 3 अगस्त को ₹187 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को प्रोविजनली यानी अस्थायी रूप से अटैच कर लिया था। अटैच की गई संपत्तियों में अचल संपत्तियां, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के पास मौजूद रिलायंस पावर लिमिटेड के इक्विटी शेयर और क्षीराब्ध कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड की जमीन शामिल है। मामले में आरोपी सतीश सेठ को ED ने 12 जून को गिरफ्तार किया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत (जेल) में हैं। आगे की कार्रवाई: अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी ED का कहना है कि इस मामले में अन्य व्यक्तियों, अधिकारियों और सहयोगियों की भूमिका की आगे जांच जारी है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्षों के आधार पर पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है। क्या होती है शेल कंपनी? शेल कंपनियां कागज पर होती हैं। छोटे-छोटे लोगों को उनका डायरेक्टर बनाकर कारोबार किया जाता है। एंट्री द्वारा ब्लैक मनी को व्हाइट करने का खेल खेला जाता है।
अगस्त के पहले-हफ्ते में विदेशी-निवेशकों ने ₹12,921 करोड़ निवेश किए:जुलाई में भारतीय बाजार में ₹20,200 करोड़ आए थे, वजह- क्रूड सस्ता हुआ
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अगस्त के पहले हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार में ₹12,921 करोड़ का भारी निवेश किया है। भारतीय अर्थव्यवस्था की बेहतर होती स्थिति, अमेरिका में ब्याज दरें घटने की उम्मीद, कच्चे तेल के गिरते दाम और स्थिर रुपए के कारण विदेशी निवेशकों की लिवाली जारी है। जुलाई में हुए ₹20,200 करोड़ के निवेश के बाद लगातार दूसरे महीने भारतीय बाजार में पॉजिटिव फंड फ्लो देखा जा रहा है। लगातार 4 महीने की बिकवाली के बाद ट्रेंड बदला विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs की जून में ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में ₹1.17 लाख करोड़ रुपए की रिकॉर्ड बिकवाली के बाद जुलाई से बाजार में ट्रेंड बदला है। CDSL के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से जून तक लगातार चार महीनों की बिकवाली से पहले FPIs ने फरवरी में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था। इसके बाद जुलाई में ₹20,200 करोड़ का इनफ्लो दर्ज किया गया, जिससे भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी देखने को मिली है। 2026 में अब तक ₹2.41 लाख करोड़ निकाले हालिया खरीदारी के बावजूद, विदेशी निवेशक 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी में कुल मिलाकर नेट सेलर बने हुए हैं। इस साल अब तक FPIs भारतीय शेयर बाजार से ₹2.41 लाख करोड़ रुपए निकाल चुके हैं। यह आंकड़ा पूरे साल 2025 में हुई ₹1.66 लाख करोड़ रुपए की कुल बिकवाली से भी ज्यादा हो चुका है। सेकेंडरी मार्केट और लिस्टेड कंपनियों में रुचि बढ़ी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Trackk के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते ने बताया कि हालिया निवेश बाजार में सुधरते सेंटिमेंट का नतीजा है। अमेरिका में रेट कट की उम्मीद, कच्चे तेल की घटती कीमतें और स्थिर रुपए ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। वेदांत गुप्ते ने कहा कि RBI द्वारा ग्रोथ और महंगाई को लेकर दिए गए बेहतर आउटलुक ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी फिलहाल निचले स्तर पर है, जिससे नए फंड्स के लिए काफी गुंजाइश बची हुई है। इसके अलावा, हालिया खरीदारी का बड़ा हिस्सा सिर्फ IPO के बजाय सेकेंडरी मार्केट से आ रहा है, जो लिस्टेड कंपनियों में विदेशी निवेशकों की गहरी रुचि को दर्शाता है। भू-राजनीतिक तनाव घटने से सेंटिमेंट सुधरा बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी का मानना है कि FIIs और DIIs की ओर से लगातार जारी खरीदारी के पीछे भू-राजनीतिक तनाव का कम होना एक मुख्य वजह है। तनाव कम होने से वैश्विक निवेशकों का सेंटिमेंट पॉजिटिव हुआ है, जिससे भारतीय शेयर बाजार को मजबूत सहारा मिला है। ऑटो-हेल्थकेयर सेक्टर बने पहली पसंद जिओजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार ने बताया कि FPIs की खरीदारी में एक खास ट्रेंड देखा जा रहा है। विदेशी निवेशक ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर्स पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं और इनमें तेजी से अलॉटमेंट बढ़ा रहे हैं। डेट मार्केट में भी पैसा लगा रहे विदेशी निवेशक शेयर बाजार के साथ-साथ विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय डेट मार्केट में भी लगातार बना हुआ है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान FPIs ने जनरल रूट के जरिए भारतीय डेट मार्केट में ₹622 करोड़ का निवेश किया है। क्या होता है फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट? ऐसे विदेशी निवेशक या संस्थाएं जो किसी देश के शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या डेट मार्केट में वित्तीय लाभ के लिए पैसा लगाते हैं। वे कंपनियों में सीधे मैनेजमेंट या ऑपरेशनल कंट्रोल नहीं लेते। क्या होता है सेकेंडरी मार्केट? वह वित्तीय बाजार जहां पहले से लिस्टेड शेयरों की खरीद-बिक्री निवेशकों के बीच होती है (जैसे BSE या NSE)। इसमें पैसा सीधे कंपनी को न जाकर बेचने वाले निवेशक के पास जाता है।
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