हाइब्रिड-EV कारें 1 अप्रैल 2027 से सस्ती होंगी:पेट्रोल-डीजल गाड़ियां महंगी मिलेंगी, ज्यादा प्रदूषण वाली कारों पर लगेगा जुर्माना; नई पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी
केंद्र सरकार ने यात्री वाहनों के लिए नए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी मानकों का मसौदा यानी ड्राफ्ट जारी किया है। ये नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य कारों की ईंधन दक्षता यानी माइलेज बढ़ाना और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना है। इससे एथेनॉल, हाइब्रिड और EV कारें सस्ती हो सकती हैं और ज्यादा प्रदूषण वाली पेट्रोल-डीजल कारें महंगी हो सकती हैं। सस्ती क्यों हो सकती हैं महंगी क्यों हो सकती हैं: E85 और E100 एथेनॉल वाली कारें लेने पर भी फायदा होगा ई85, ई100 कारों पर क्या असर होगा? फ्लेक्स फ्यूल कारें यानी 85%-100% तक एथेनॉल पर चलने वाली पेट्रोल कारें। इन्हें 22.3% की छूट मिलेगी। कंपनी एक फ्लेक्स फ्यूल कार बेचेगी तो कागजों पर 1.1 के बराबर गिना जाएगा। ई20 पेट्रोल कारें कैसे प्रभावित होंगी? नई पॉलिसी में अगर आप ई20 वाली कार खरीदते हैं, तो सरकार कंपनी के खाते में उस कार से निकलने वाले धुएं (CO2) को 8% कम मानेगी। यानी प्रदूषण लक्ष्य पाने में मददगार होंगी। ई20 वाली कारें सस्ती होंगी या महंगी? कारों में ईंधन बचाने वाली नई तकनीकें (जैसे टायर प्रेशर मॉनिटरिंग, एलईडी लाइट्स, बेहतर गियरबॉक्स) अनिवार्य होंगे। शुरुआती कीमत बढ़ सकती है। क्या पुरानी कार पर कोई असर पड़ेगा? नहीं। यह नियम केवल 1 अप्रैल 2027 के बाद बनने वाली या विदेश से आयात होने वाली नई कारों (एम1 कैटेगरी) पर ही लागू किया जाएगा। क्या कारों का गियर सिस्टम भी बदलेगा? पॉलिसी में 6-स्पीड या उससे ज्यादा गियर वाले बॉक्स को बढ़ावा दिया गया है, क्योंकि ये 5% तक तेल बचाता है। क्या माइलेज अलग ढंग से नापा जाएगा? हां, अब भारत पुराने एमआईडीसी सिस्टम से हटकर वैश्विक स्तर के डब्ल्यूएलटीपी की ओर बढ़ेगा, जो असली माइलेज के ज्यादा करीब है। कंपनियों की ‘पासबुक’ का क्या मतलब? हर कंपनी का एक खाता होगा, जिसे ‘पासबुक’ कहा जाएगा। इसमें उनके अच्छे प्रदर्शन (क्रेडिट) या खराब प्रदर्शन (डेबिट) का पूरा हिसाब होगा। क्या ‘क्रेडिट’ खरीदा-बेचा जा सकेगा? हां, पॉलिसी में ‘पूलिंग’ का विकल्प है, ज्यादा क्लीन कारें बेचने वाली कंपनी दूसरी कंपनी को बचत बेच सकती है। नए नियम किन पर लागू नहीं होंगे? जो कंपनियां साल में 1,000 से कम कारें बेचती हैं, उन्हें इससे छूट मिलेगी। इस पॉलिसी का अंतिम लक्ष्य क्या है? सरकार का मकसद भारत की तेल आयात पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करना है। क्या डीजल कारें बंद हो सकती हैं? नई पॉलिसी डीजल कारें बंद होने की बात नहीं कहती, लेकिन उन्हें कंपनियों के लिए ‘घाटे का सौदा’ बना देती है। डीजल को पेट्रोल की तरह फिक्स छूट नहीं मिलती। इसे ज्यादा ईंधन पीने वाला माना जाता है। जुर्माने से बचने को कंपनियां डीजल कारों के दाम बढ़ा सकती हैं, जिससे बिक्री पर असर संभव। ये खबर भी पढ़ें… रेडमी नोट 17 स्मार्टफोन 8,000mAh बैटरी के साथ लॉन्च: शुरुआती कीमत ₹27,999; 7 इंच एमोलेड डिस्प्ले और स्नैपड्रैगन 4 जेन 4 प्रोसेसर मिलेगा शाओमी ने भारत में अपना नया मिड-रेंज स्मार्टफोन रेडमी नोट 17 लॉन्च कर दिया है। इस फोन में 8,000mAh की बड़ी बैटरी, स्नैपड्रैगन 4 जेन 4 चिपसेट और 6.9-inch का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। फोन की शुरुआती कीमत 27,999 रुपए है। इसकी बिक्री 12 अगस्त से शुरू होगी। पूरी खबर पढ़ें…
स्पेसएक्स का 4000 किलो वजनी रॉकेट चांद से टकराया:8,690 kmph की रफ्तार से अंतरिक्ष में घूम रहा था; NASA ने कहा- धरती को खतरा नहीं
इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का एक बेकाबू रॉकेट चांद की सतह से टकरा गया है। 4 हजार किलो वजनी यह रॉकेट करीब 8,690 किमी/घंटा की रफ्तार से टकराया। नासा ने कहा कि इस टक्कर से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है। यह बेकाबू 45 फीट का टुकड़ा स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा है। इसे जनवरी 2025 में फ्लोरिडा से अमेरिका और जापान के दो लूनर लैंडर को अंतरिक्ष में भेजने के लिए लॉन्च किया गया था। मिशन पूरा होने के बाद रॉकेट का यह हिस्सा अंतरिक्ष में तैरता रह गया। पिछले 18 महीनों के दौरान पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण की वजह से इसका रास्ता धीरे-धीरे बदल गया। खगोलविदों ने डेटा का अध्ययन करके पहले ही अनुमान लगा लिया था कि यह रॉकेट भटककर सीधे चांद की ओर जा रहा है और उससे टकराएगा। आइंस्टीन क्रेटर के पास टक्कर हुई यह टक्कर चांद के 'आइंस्टीन क्रेटर' के पास हुई। यह क्षेत्र चांद के उस हिस्से में है जहां दिन का उजाला रहता है और जो पृथ्वी से दिखाई देता है। हालांकि, वैज्ञानिकों के मुताबिक इसे आम टेलिस्कोप से देखना नामुमकिन था, क्योंकि टक्कर के वक्त बनी रोशनी बेहद हल्की थी। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के खगोलविद डॉ. मैट बोथवेल का कहना है कि टक्कर के कारण चांद की धूल का एक बड़ा गुबार उठा होगा, जो 100 किलोमीटर तक ऊपर गया होगा और कई मिनटों तक रहा होगा। तस्वीरों के लिए इंतजार करना होगा, ऑर्बिटर जारी करेंगे डेटा फिलहाल जब यह हादसा हुआ, तब चांद का चक्कर लगा रहा कोई भी स्पेसक्राफ्ट सही पोजिशन में नहीं था, इसलिए लाइव तस्वीरें नहीं मिल पाई हैं। दक्षिण कोरिया का 'दानुरी' ऑर्बिटर और नासा का 'लूनर रिकोनिसेंस ऑर्बिटर' (LRO) आने वाले दिनों में टक्कर वाली जगह के ऊपर से गुजरेंगे और तस्वीरें लेंगे। वैज्ञानिक पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करके चांद की सतह पर बने नए निशान की पहचान करेंगे। चांद पर पहले से मौजूद है 190 टन कचरा इस टक्कर के बाद चांद पर इंसानों की छोड़ी गई या दुर्घटनाग्रस्त हुई चीजों की संख्या बढ़कर लगभग 3,000 हो गई है। इनका कुल वजन करीब 190 टन हो चुका है। सितंबर 1959 में सोवियत संघ का 'लूना 2' चांद की सतह पर पहुंचने वाला पहला मानव निर्मित ऑब्जेक्ट था। इसके अलावा नासा के अकेले अपोलो प्रोग्राम से जुड़ी 796 चीजें चांद पर मौजूद हैं। चांद पर कोई वायुमंडल या पर्यावरण नहीं है, इसलिए इस कचरे से वहां किसी ईकोसिस्टम को नुकसान नहीं पहुंचता। हालांकि, वैज्ञानिक चिंतित हैं कि भविष्य में बढ़ते लूनर ट्रैफिक के कारण ऐतिहासिक अपोलो लैंडिंग साइट्स को नुकसान न पहुंचे और नए स्पेसक्राफ्ट्स के टकराने का जोखिम न बढ़े। NASA और वैज्ञानिकों को इस टक्कर से क्या फायदा होगा? साइंस म्यूजियम की स्पेस हेड लिब्बी जैक्सन के अनुसार, यह वैज्ञानिकों के लिए काफी रोमांचक प्रयोग है क्योंकि रॉकेट की स्पीड, वजन और आकार का डेटा पहले से मौजूद था। आमतौर पर जब कोई प्राकृतिक उल्कापिंड चांद से टकराता है, तो वैज्ञानिकों के पास उसका शुरुआती डेटा नहीं होता। इस टक्कर से बने नए गड्ढे और उड़ी हुई धूल की परत का अध्ययन करके वैज्ञानिक यह समझ सकेंगे कि अरबों साल पहले चांद और हमारे सौर मंडल का निर्माण कैसे हुआ था। इधर ऊपरी हिस्सा टकराया, उधर 18वीं बार उड़ने को तैयार बूस्टर स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का निचला हिस्सा रीयूजेबल होता है। इसे बूस्टर कहते हैं और लैंडिंग करके धरती पर वापस आ जाता है। जिस जनवरी 2025 वाले मिशन का ऊपरी हिस्सा भटककर चांद से टकराया, उसी रॉकेट के निचले बूस्टर को 10 अगस्त को 18वीं बार लॉन्च किया जाएगा। नॉलेज पार्ट: जानें क्या है स्पेस डैब्रिस और आइंस्टीन क्रेटर... इंसान द्वारा अंतरिक्ष में भेजे गए रॉकेट्स के छूटे हुए टुकड़े, निष्क्रिय सैटेलाइट्स और मलबे को स्पेस डैब्रिस कहा जाता है। वहीं चंद्रमा के पश्चिमी किनारे पर स्थित एक बड़ा गड्ढा है, जिसका व्यास करीब 170 किलोमीटर है। इसे आइंस्टीन क्रेटर नाम दिया गया है। ---------------------------------------- ये खबर भी पढ़े… हजारों वॉट्सएप अकाउंट अचानक बंद, मैसेज आया- अंडर रीव्यू:बिना वार्निंग सभी फीचर्स ब्लॉक, कंपनी बोली- कभी-कभी गलती हो जाती है मैसेजिंग एप वॉट्सएप ने भारत समेत कुछ अन्य देशों में हजारों यूजर्स के अकाउंट 24 घंटे के लिए रीव्यू में डाल दिए हैं। इस दौरान एप के सभी मैसेजिंग और कॉलिंग फीचर्स को ब्लॉक कर दिया गया। पूरी खबर पढ़े…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 









