UNCOVERED with Manoj Gairola: बंगाल में ‘मुस्लिम आरक्षण’ पर बड़ा पलटवार! सुवेंदु सरकार ने खत्म किया ममता-लेफ्ट का सबसे बड़ा वोटबैंक दांव
UNCOVERED with Manoj Gairola: क्या पश्चिम बंगाल के मुसलमान आरक्षण के हकदार थे? या ममता और लेफ्ट की सरकारों ने केवल वोटबैंक पॉलिटिक्स की खातिर आम आदमी का हक मारकर उन्हें आरक्षण दिया था? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपना चुनावी वादा पूरा करते हुए, प्रदेश में मुस्लिमों को आरक्षण से आउट कर दिया है. अनकवर्ड में आज हम आपको पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आरक्षण की पूरी कहानी बताएंगे. इसका वोटबैंक की राजनीति से क्या कनेक्शन है और लेफ्ट व टीएमसी ने इससे कैसे फायदा उठाने की कोशिश की? इसके बारे में जानेंगे.
आपको बता दें कि हमारे देश के संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था नहीं है. तो सवाल ये उठता है कि आखिरकार मुसलमानों को कैसे आरक्षण मिला? इसका जवाब है, वोटबैंक और Appeasement Politics और इसका टूल है ओबीसी आरक्षण. बंगाल का मुस्लिम आरक्षण इसका क्लासिक एग्जामपल है. भले ही इस आरक्षण की पैरोकार ममता बनर्जी दिखती हों लेकिन ये सियासी दांव लेफ्ट की सरकार ने खेला था और वो भी ममता बनर्जी के खिलाफ. ये साल था 2010, जब प्रदेश में साल भर बाद ही विधानसभा चुनाव होने वाले थे. लेफ्ट की 32 साल पुरानी सरकार को ममता बनर्जी की टीएमसी तगड़ी चुनौती दे रही थी और उसे सिंगूर और नंदीग्राम जैसे मुद्दों पर ममता ने बैकफुट पर धकेल दिया था. ऐसे में तत्कालीन सीएम बुद्धदेब भट्टाचार्य की सरकार ने बड़ा दांव चला और वो था ओबीसी आरक्षण में 10 प्रतिशत का इजाफा.
बंगाल में 2010 तक आरक्षण की स्थिति
बंगाल में साल 2010 तक आरक्षण की स्थिति कुछ इस तरह थी.
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22 प्रतिशत SC
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6 प्रतिशत ST और
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7 प्रतिशत OBC
इसका मतलब ये कि राज्य में 2010 तक कुल आरक्षण 35 प्रतिशत था.
लेफ्ट सरकार का आरक्षण बढ़ाने का दांव काम नहीं आया
लेफ्ट की सरकार ने ओबीसी आरक्षण 17 फीसदी कर दिया और यहीं से बंगाल में मुस्लिमों को आरक्षण देने की शुरुआत हो गई. क्योंकि जो 10 प्रतिशत कोटा बढ़ाया गया, उसे OBC-A कहा गया यानी अधिक पिछड़ा वर्ग. OBC-A में 42 जातियों को राज्य सरकार ने अधिक पिछड़ा मानते हुए शामिल किया और इनमें से 31 जातियां मुस्लिम थीं. अब कहने को तो ये ओबीसी आरक्षण था, लेकिन असल में इसके लाभार्थी ज्यादातर मुस्लिम थे और मोहम्मद सलीम जैसे लेफ्ट के बड़े नेता खुलकर ये दावा कर रहे थे कि उनकी सरकार ने मुसलमानों को आरक्षण दे दिया है. लेकिन आरक्षण के जरिए मुसलमानों का वोट हासिल करके.सत्ता बरकरार रखने का लेफ्ट का दांव काम नहीं आया. 33 साल बाद बंगाल से लेफ्ट सरकार की विदाई हो गई और 2011 में मुख्यमंत्री टीएमसी की लीडर ममता बनर्जी बनीं.
बंगाल की सत्ता में आई ममता सरकार
बंगाल में सत्ता तो बदल गई लेकिन सियासत वही रही. अब मुसलमान ममता के वोटर बन चुके थे. इस वोट बैंक को और मजबूत करने के लिए ममता ने मुस्लिम आरक्षण वाला फॉर्मूला जारी रखा. सरकार बनते ही ममता ने इसमें और अधिक मुस्लिम जातियों को जोड़ दिया. 2012 तक ममता सरकार ने ओबीसी की लिस्ट में 77 नई जातियों को जोड़ा जिनमें 75 जातियां मुस्लिम थीं.
कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता सरकार के फैसले को किया रद्द
एक अनुमान के मुताबिक, कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल की 80 प्रतिशत मुस्लिम आबादी ओबीसी आरक्षण का लाभ उठाने लगी. इसे कोर्ट में चुनौती दी गई और साल 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता सरकार के इस फैसले को रद्द कर दिया. कोर्ट का कहना था कि "बिना किसी सर्वेक्षण के आधार पर दिया गया ये आरक्षण सिर्फ वोटबैंक पॉलिटिक्स का हिस्सा नजर आता है."
हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
हाई कोर्ट के फैसले के साथ ही लाखों ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द हो गए. कोर्ट के इस फैसले से ममता बेहद नाराज हुईं. उन्होंने कोर्ट की मंशा पर सवाल उठाते हुए इस फैसले को स्वीकार नहीं किया. ममता सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया और फैसला आने तक ये आरक्षण बंगाल में जारी रहने वाला था.
CM सुवेंदु अधिकारी ने मुस्लिम आरक्षण पर की दोहरी चोट
अब सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने इस मुस्लिम आरक्षण पर दोहरी चोट की है. पहली तो ये कि पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर उस याचिका को वापस ले लिया, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी. और दूसरी चोट ये दी है कि 2010 में बढ़ाए गए 10 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को वापस ले लिया है. और साथ ही उन सभी जातियों को ओबीसी कैटेगरी से बाहर कर दिया, जो ममता या लेफ्ट की सरकारों ने इसमें शामिल की थी. अब बंगाल में ठीक 2010 से पहले वाला ही 7 फीसदी ओबीसी आरक्षण लागू है और इसमें वही 66 जातियां हैं, जो 2010 से पहले इसमें शामिल थीं. इनमें कुछ मुस्लिम जातियां भी शामिल हैं.
बंगाल में मुस्लिम आरक्षण का सच
पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की सरकार 3 दशक से ज्यादा वक्त तक रही. सिंगूर और नंदीग्राम जैसे आंदोलनों के चलते जब उसे अपना किला ढहता हुआ नजर आने लगा तो उसने 2010 में मुस्लिम आरक्षण का कार्ड चला. ये वो दौर था, जब ममता बंगाल में एक बड़ी राजनीतिक ताकत बन गईं थीं. लेफ्ट को लगा कि ममता को रोकने के लिए मुस्लिम आरक्षण बड़ा कारगर साबित होगा. लेकिन ये दांव फेल हो गया और ममता ने जीत के बाद, लेफ्ट के इस आईडिया को अपना लिया. वो ओबीसी कैटेगरी में मुस्लिम जातियों को भरती चलीं गईं. अब ये मुस्लिम जातियां वाकई पिछड़ी थीं या नहीं. इसके लिए कोई स्टडी या सर्वे नहीं करवाए गए. ऐसे में वोटबैंक पॉलिटिक्स की खातिर बिना किसी आधार के, इस तरह का आरक्षण देना किसी आम आदमी के हक को मारने जैसा है.
At least 90 killed in Chinese coal mine explosion, state media reports | BBC News
At least 90 people have been killed in a coal mine blast in northern China, according to state media. The gas explosion at the Liushenyu Coal Mine in Shanxi province is the worst mining disaster in China since 2009. There were 247 workers reportedly on duty when the blast happened at 19:29 local time on Friday (22:29 GMT), with more than 100 people reportedly pulled to safety and hundreds of rescuers sent to the site. Chinese President Xi Jinping called for no effort to be spared in efforts to treat the injured and search for survivors, and asked the government to investigate the cause of the blast and hold those responsible to account. Subscribe here: http://bit.ly/1rbfUog For more news, analysis and features visit: www.bbc.com/news #China #BBCNews
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