Sports Bike: यामाहा R2 की प्री-बुकिंग शुरू, 27 अगस्त को होगी एंट्री; जानें कीमत और फीचर
Sports Bike: यामाहा ने अपकमिंग सुपरस्पोर्ट बाइक R2 के लिए भारत में प्री-बुकिंग शुरू कर दी है। ग्राहक इसे 10 हजार रुपये टोकन मनी देकर बुक कर सकते हैं। कंपनी नई मोटरसाइकिल को 27 अगस्त को भारतीय बाजार में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, यामाहा ने अभी तक आधिकारिक तौर पर बाइक के नाम की पुष्टि नहीं की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी संभावित एक्स-शोरूम कीमत 2.20 लाख रुपये तक हो सकती है।
बुकिंग से जुड़ी जानकारी
यामाहा R2 की बुकिंग के लिए 10,000 रुपये की राशि तय की गई है। कंपनी के बुकिंग पेज के अनुसार, बाइक के फाइनल वेरिएंट, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन और कीमत की पूरी जानकारी लॉन्च के समय सामने आएगी।
जो ग्राहक पहले बुकिंग करेंगे, उन्हें डिलीवरी में प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, अगर कोई ग्राहक लॉन्च के बाद बाइक खरीदने का फैसला नहीं करता है, तो उसकी बुकिंग राशि वापस कर दी जाएगी।
R15 और R3 के बीच होगी नई बाइक
यामाहा R2 नाम का ट्रेडमार्क भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप और फिलीपींस जैसे बाजारों में भी दर्ज किया जा चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नई मोटरसाइकिल को यामाहा के मौजूदा R15 और R3 के बीच की जगह भरने के लिए विकसित किया जा रहा है।
इससे कंपनी के R-Series पोर्टफोलियो में ग्राहकों को एक नया विकल्प मिलेगा, जो R15 से ज्यादा पावरफुल और R3 से अधिक किफायती हो सकता है।
200-220cc इंजन मिलने की उम्मीद
यामाहा ने अभी तक बाइक के इंजन की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। हालांकि, रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इसमें करीब 200cc से 220cc के बीच का इंजन दिया जा सकता है।
पावर आउटपुट की सटीक जानकारी भी फिलहाल सामने नहीं आई है। उम्मीद है कि यामाहा इसे अपने सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन के साथ पेश करेगी। लॉन्च के बाद इसका मुकाबला KTM RC 200 और Hero Karizma XMR जैसी मोटरसाइकिलों से हो सकता है, जो करीब 25hp के आसपास पावर देती हैं।
कितनी हो सकती है कीमत?
फिलहाल यामाहा R15 की कीमत S वेरिएंट के लिए करीब 1.57 लाख रुपये से शुरू होती है और टॉप M वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत करीब 1.98 लाख रुपये तक जाती है। ऐसे में R2 की संभावित कीमत 2 लाख रुपये से 2.20 लाख रुपये के बीच रखे जाने की उम्मीद है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यामाहा R2 का उत्पादन भारत में ही किया जाएगा और यहां तैयार होने वाली बाइक को दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी एक्सपोर्ट किया जा सकता है। कंपनी 27 अगस्त को इसके लॉन्च के दौरान बाइक की कीमत, इंजन और फीचर्स से जुड़ी पूरी जानकारी सामने ला सकती है।
(मंजू कुमारी)
15 अगस्त विशेष: तिरंगा कितनी बार बदला? 1906 से 1947 तक जानें भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का पूरा इतिहास
15 अगस्त विशेष: भारत का तिरंगा आज जिस स्वरूप में दिखाई देता है, वह हमेशा से ऐसा नहीं था। स्वतंत्रता से पहले भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के स्वरूप में कई बदलाव हुए। 1906 में सामने आए पहले झंडे से लेकर 1947 में अपनाए गए वर्तमान तिरंगे तक इसकी यात्रा बेहद दिलचस्प रही है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजादी से पहले भारत का झंडा कितनी बार बदला था? इस लेख में जानिए 1906 से 1947 तक भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के बदलाव की पूरी कहानी और वर्तमान तिरंगे को कब अपनाया गया।
जानिए राष्ट्रीय तिरंगे झंडे से जुड़ी कुछ रोचक बातें।
आपको बता दें कि भारत का पहला झंडा 7 अगस्त 1906 को अस्तित्व में आया था। इसके बाद से भारत के झंडे में कई बदलाव देखे गए। देश का झंडा कुल 6 बार बदला जा चुका है।
भारत का पहला झंडा कब बना? 1906 में कैसा था राष्ट्रीय ध्वज
भारत का पहला झंडा 7 अगस्त 1906 को अस्तित्व में आया था। इस झंडे में तीन रंग हरा, पीला और लाल रंग की पट्टियां देखने को मिलती है। इसमें बीच में वन्देमातरम लिखा हुआ था।
1907 में भारत के झंडे में क्या बदलाव हुआ?
1907 में मैडम कामा और उनके कुछ क्रांतिकारी साथियों, जिन्हें भारत से निर्वासित कर दिया गया था। इसमें केसरिया, पीला और हरे रंग की पट्टियां थी।
1917 का भारतीय झंडा कैसा था? जानें क्या हुआ बदलाव
1917 में डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने एक नया झंडा फहराया। इस झंडे में पांच लाल और 4 हरे रंग की पट्टियां थी। इसके साथ ही इसमें सप्तऋशि को दर्शाते सात तारे अर्द्ध चंद्र और सितारे थे। इस झंडे में बाएं साइड के कोने में यूनियन जैक भी था।
1921 में भारत के झंडे का स्वरूप कैसे बदला?
अखिल भारत कांग्रेस कमेटी के सेशन के दौरान आंध्र प्रदेश के एक व्यक्ति ने 1921 में महात्मा गांधी को चौथा झंडा दिया था। इसमें सफेद, हरे और लाल रंग की पट्टियां थीं। वहीं देश के विकास को दर्शाने के लिए बीच में चरखा भी था।
1931 में भारतीय झंडे में क्या बड़ा बदलाव हुआ?
1931 में एक बार फिर भारत का झंडा बदला गया। अब इस झंडे को इंडियन नेशनल कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर अपनाया था। इस झंडे में केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टियां थीं। चरखा झंडे के केंद्र में ही था।
1947 में वर्तमान तिरंगा कैसे बना?
1931 में बना झंडा ही आज के वर्तमान भारतीय तिरंगे से काफी मिलता जुलता है। 1947 में इस झंडे में थोड़ा संशोधन करते हुए चरखे के स्थान पर अशोक चक्र को रखा गया।
भारत का राष्ट्रीय ध्वज कब अपनाया गया?
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को वर्तमान स्वरूप में 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। इसको पहले स्वराज झंडा कहा जाता था। इसे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर फहराया जाता है।
तिरंगे के तीन रंगों और अशोक चक्र का क्या अर्थ है?
भारत के राष्ट्रीय ध्वज की ऊपरी पट्टी में केसरिया रंग है जो देश की शक्ति और साहस को दर्शाता है। मध्य में स्थित सफेद पट्टी शांति और सत्य का प्रतीक है। सबसे नीचे हरी पट्टी वृद्धि और भूमि की पवित्रता को दर्शाती है। तिरंगे झंडे में मौजूद चक्र को विधि का चक्र कहते हैं। इस चक्र को प्रदर्शित करने का आशय यह है कि जीवन गतिशील है।
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