कैब बुक करते समय अगर आपको यात्रा शुरू होने से पहले ही टिप देने का विकल्प दिखाई देता है, तो आने वाले दिनों में इसमें बदलाव हो सकता है। केंद्र सरकार ने सवारी बुकिंग की सुविधा देने वाले मंचों को यात्रा से पहले टिप लेने की व्यवस्था की समीक्षा करने और उसे बंद करने का निर्देश दिया है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बुधवार को जारी एक परिपत्र में कहा कि कुछ सवारी बुकिंग मंचों ने अपने अनुप्रयोगों में यात्रा से पहले टिप देने की सुविधा शुरू की थी। मंत्रालय के मुताबिक ऐसी व्यवस्था यात्रियों को पहले ही टिप देने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। इसके पीछे यह धारणा भी बन सकती है कि पहले से टिप देने पर वाहन जल्दी मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
मंत्रालय ने साफ किया है कि किसी चालक को दी जाने वाली टिप पूरी तरह यात्री की इच्छा पर निर्भर होती है। इसे यात्रा की सुविधा या वाहन मिलने की गति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार यात्री अगर चालक की सेवा से संतुष्ट है तो वह यात्रा पूरी होने के बाद अपनी इच्छा से टिप दे सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार का यह कदम यात्रियों पर किसी तरह का अतिरिक्त भुगतान करने का दबाव न पड़े, यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। खासकर व्यस्त समय में जब वाहन की मांग अधिक होती है, उस दौरान पहले से टिप देने का विकल्प यात्रियों को जल्दी वाहन मिलने के लिए अतिरिक्त भुगतान करने की ओर धकेल सकता है।
गौरतलब है कि देश के बड़े शहरों में कैब और अन्य सवारी बुकिंग सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इन मंचों पर किराया, वाहन मिलने का अनुमानित समय और अन्य शुल्क पहले से दिखाई देते हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि टिप को मूल किराये या वाहन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया से अलग रखा जाए।
बता दें कि मंत्रालय ने कंपनियों से इस सुविधा की समीक्षा कर जरूरी बदलाव करने को कहा है। सरकार का जोर इस बात पर है कि यात्री को टिप देने या नहीं देने का फैसला बिना किसी दबाव के करने की पूरी आजादी मिले। यानी यात्रा से पहले टिप देकर वाहन जल्दी पाने जैसी स्थिति को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। इससे यात्रियों के लिए सवारी बुकिंग की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद हैं।
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