सटोरिए सतीश सनपाल को लगा बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने खारिज की सभी 6 याचिकाएं, जानिए पूरा मामला?
विदेश में बैठकर सट्टे का कारोबार चलाने वाले सटोरिए सतीश सनपाल को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दरअसल हाई कोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने सतीश सनपाल के खिलाफ जबलपुर के विभिन्न थानों में दर्ज छह अलग-अलग प्राथमिकियों को निरस्त करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने सतीश सनपाल की ओर से दायर सभी छह याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए उन्हें खारिज कर दिया।
वहीं इस मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से किए जाने वाले अपराधों में केवल इस आधार पर आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती कि वह घटना के समय देश में मौजूद नहीं था। कोर्ट ने कहा कि आरोपी का घटनास्थल या संबंधित देश में शारीरिक रूप से मौजूद न होना उसे अपने आप आपराधिक जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता।
जबलपुर के अलग-अलग थानों में दर्ज हैं 6 FIR
दरअसल सटोरिए सतीश सनपाल के खिलाफ जबलपुर पुलिस ने कार्रवाई की है। उसके खिलाफ जबलपुर के अलग-अलग थानों में कुल छह एफआईआर दर्ज हैं। सतीश सनपाल ने इन सभी प्राथमिकियों को निरस्त कराने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था।
वहीं याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिकाओं में जबलपुर के ओमती थाने में दर्ज तीन एफआईआर, सिविल लाइन्स थाने में दर्ज एक एफआईआर, लॉर्डगंज थाने में दर्ज एक एफआईआर और मदन महल थाने में दर्ज एक एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी। इन सभी मामलों में पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे से जुड़े कथित अवैध कारोबार के आरोपों के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं।
सनपाल ने कहा – 2020 से दुबई में रह रहा हूं
दरअसल सतीश सनपाल की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने अदालत में दलील दी कि वह 14 मार्च 2020 से लगातार दुबई में रह रहा है और इस दौरान एक बार भी भारत वापस नहीं आया। याचिका में दावा किया गया कि उसकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर उसे बदनाम करने की दुर्भावनापूर्ण नीयत से अलग-अलग थानों में ये झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। इसी आधार पर सनपाल ने अपने खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों को निरस्त करने की मांग की थी।
सरकार ने किया याचिकाओं का विरोध
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह ने इन याचिकाओं का विरोध किया। उन्होंने अदालत के सामने दलील दी कि तकनीकी युग में अपराध करने के लिए आरोपी का मौके पर शारीरिक रूप से मौजूद होना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि आरोपी विदेश में बैठकर भी भारत में अपराध को संचालित कर सकता है।
MCRC_11693_2026_FinalOrder_11-08-2026_digiहाई कोर्ट ने कहा – यह मिनी ट्रायल का चरण नहीं
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि सह-आरोपी के बयानों की विश्वसनीयता, गवाहों के मुकरने की स्थिति और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की सत्यता की जांच करना निचली अदालत का काम है। अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट धारा 528 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मिनी-ट्रायल की तरह साक्ष्यों का मूल्यांकन नहीं कर सकता। कोर्ट ने माना कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें पहली नजर में आरोपों को पूरी तरह झूठा, बेबुनियाद या असंभव माना जा सके। इसलिए इस शुरुआती स्तर पर एफआईआर और चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है।
निचली अदालत में जारी रहेगी सुनवाई
सभी छह याचिकाएं खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि जबलपुर के न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में लंबित मामलों की कार्यवाही कानून के मुताबिक जारी रहेगी। हालांकि, याचिकाकर्ता को ट्रायल के दौरान अपने सभी कानूनी बचाव रखने की स्वतंत्रता होगी।
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इस हादसे की गंभीरता को देखते हुए एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) वर्तमान में फ्लाइट क्रू और मुख्य पायलट (पायलट इन कमांड) से पूछताछ कर रही है। मुख्य पायलट पर गांजा पीकर उड़ान भरने के आरोप लगे हैं।
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