संजय राउत का पीएम मोदी पर बड़ा निशाना, सोशल मीडिया पर शेयर की कॉकरोच-मेलोडी की तस्वीर
सियासी हलकों में इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और ‘मेलोडी’ की चर्चाएं जोरों पर हैं, इसी बीच शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत ने एक तस्वीर के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा निशाना साधा है। दरअसल उद्धव ठाकरे गुट के प्रमुख नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक ऐसी तस्वीर साझा की है जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। इस तस्वीर में एक कॉकरोच मेलोडी चॉकलेट को चट करता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसके जरिए राउत ने बिना नाम लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परोक्ष रूप से घेरा है। इंटरनेट पर इन दोनों नामों की खूब चर्चा हुई और हो रही है, जिसने सियासी पारा भी चढ़ा दिया है।
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी की हालिया इटली यात्रा के दौरान उन्होंने वहां की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी को भारत की बेहद लोकप्रिय मेलोडी चॉकलेट भेंट की थी। यह घटना उस समय सुर्खियां बटोरने लगी जब इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर एक वीडियो साझा किया।
पीएम मोदी का वीडियो हुआ था वायरल
वहीं इस वीडियो में पीएम मोदी उन्हें मेलोडी टॉफी का पैकेट देते नजर आए और मेलोनी मुस्कुराते हुए कहती हैं, “प्राइम मिनिस्टर मोदी ब्रॉट अस अ गिफ्ट, ए वेरी वेरी गुड टॉफी।” इसके बाद दोनों नेता साथ में ‘मेलोडी’ कहते हुए दिखे। यह वीडियो कुछ ही घंटों में इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया और इसने जनता के बीच खूब चर्चा बटोरी। प्रधानमंत्री के इस मेलोडी गिफ्ट पर विपक्ष ने तत्काल निशाना साधा। कई विपक्षी नेताओं ने यह कहते हुए सरकार को घेरा कि देश की जनता महंगाई से त्रस्त है और ऐसे समय में प्रधानमंत्री विदेशी धरती पर मेलोडी चॉकलेट भेंट कर रहे हैं। यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया, जहां एक तरफ सरकार की विदेश नीति और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सराहा जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे जनता की समस्याओं से भटकाने का प्रयास बता रहा था।
कॉकरोच जनता पार्टी भी हुई वायरल
दूसरी तरफ, सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम भी जबरदस्त तरीके से वायरल हुआ और गूगल ट्रेंड्स पर छाया रहा। इस अभियान ने भी करोड़ों लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इसकी शुरुआत तब हुई जब देश के सीजेआई सूर्यकांत शर्मा ने एक टिप्पणी करते हुए बेरोजगार नौजवानों की तुलना ‘कॉकरोच’ से कर दी। इस टिप्पणी के बाद अभिजीत दीपके नामक एक छात्र ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक सोशल मीडिया अभियान चलाया, जिसने रातोंरात सनसनी मचा दी। कुछ ही समय में इसके करोड़ों फॉलोवर्स बन गए और यह बेरोजगार युवाओं की आवाज बन गया। इसने करोड़ों लोगों का ध्यान आकर्षित किया और सोशल मीडिया पर अपनी एक मजबूत पहचान बनाई।
— Sanjay Raut (@rautsanjay61) May 21, 2026
संजय राउत ने साधा निशाना
संजय राउत ने अपनी साझा की गई तस्वीर में ठीक यही दर्शाने का प्रयास किया है कि किस तरह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ प्रधानमंत्री मोदी के मेलोडी गिफ्ट पर भारी पड़ गई है। उन्होंने सांकेतिक रूप से यह संदेश दिया है कि जहां प्रधानमंत्री विदेशों में चॉकलेट बांट रहे हैं, वहीं देश के अंदर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ जैसा बड़ा जन आंदोलन खड़ा हो गया है, जो करोड़ों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। यह तस्वीर एक सीधा सियासी वार है, जो प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं और जनता की वास्तविक समस्याओं के बीच के अंतर को उजागर करने की कोशिश करती है। राउत के इस कदम ने एक बार फिर सियासी गलियारों में इन दोनों नामों की चर्चा को तेज कर दिया है, जिससे राजनीतिक पारा और चढ़ गया है और विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का एक नया मुद्दा मिल गया है।
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पंचायत-निकाय चुनाव 31 जुलाई तक कराने के दिए निर्देश, OBC रिपोर्ट सौंपने की तारीख भी तय
राजस्थान में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों का इंतजार कर रहे लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इन चुनावों को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। जयपुर हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में हर हाल में 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव संपन्न करा लिए जाएं। इसके साथ ही, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सीटों के वर्गीकरण की महत्वपूर्ण रिपोर्ट सौंपने के लिए OBC आयोग को भी सख्त समय सीमा दी गई है। आयोग को अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट 20 जून से पहले राज्य सरकार को सौंपनी होगी, ताकि चुनाव प्रक्रिया को बिना किसी देरी के आगे बढ़ाया जा सके।
दरअसल, प्रदेश में लंबे समय से लंबित इन चुनावों के टलने के पीछे सबसे बड़ा कारण OBC सीटों का सही वर्गीकरण न हो पाना था। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 11 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है। कोर्ट ने इस जटिल मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए OBC आयोग के लिए रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 20 जून तय की है, जिससे सरकार को सीटों का उचित वर्गीकरण करने और चुनाव की तैयारियां पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
चुनाव आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने हाईकोर्ट में लगाई थी गुहार
बता दें कि राज्य सरकार ने इससे पहले हाईकोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इस प्रार्थना पत्र के माध्यम से सरकार ने चुनाव कराने की समय सीमा को आगे बढ़ाने की गुहार लगाई थी। राज्य सरकार की इस मांग का राज्य चुनाव आयोग ने भी पूरी तरह से समर्थन किया था। सरकार ने अदालत में अपनी दलील पेश करते हुए कहा था कि OBC आयोग की रिपोर्ट आए बिना चुनाव कराना न तो वैधानिक रूप से उचित होगा और न ही व्यावहारिक रूप से संभव। रिपोर्ट के अभाव में OBC सीटों का सही वर्गीकरण (Classification) करना असंभव था। इन्हीं परिस्थितियों और चुनौतियों का हवाला देते हुए सरकार ने कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग की थी। अदालत ने सरकार की इस दलील को स्वीकार करते हुए 31 जुलाई तक का समय प्रदान कर दिया है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब हाईकोर्ट ने इन चुनावों को लेकर निर्देश दिए हैं। इससे पहले, राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को कुल 439 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए एक विस्तृत फैसला सुनाया था। उस फैसले में राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए गए थे कि प्रदेश में 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव हर हाल में संपन्न करा लिए जाएं। हालांकि, उस समय तय की गई समय सीमा यानी 15 अप्रैल 2026 करीब आने तक भी OBC आयोग की रिपोर्ट पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाई थी। इसके अतिरिक्त, कुछ अन्य प्रशासनिक कारण भी थे, जिनकी वजह से राज्य सरकार तय समय पर चुनाव कराने में असमर्थ रही थी। इन्हीं कारणों के चलते सरकार को एक बार फिर अदालत का रुख करना पड़ा और चुनाव टालने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करना पड़ा था। जिस पर अब अदालत ने यह नया और महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। इस ताजा फैसले के बाद, राजस्थान के राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच चुनावी सरगर्मियां एक बार फिर से तेज होने की पूरी संभावना है। सभी की निगाहें अब OBC आयोग की रिपोर्ट और आगामी चुनावी प्रक्रिया पर टिकी हैं।
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