Heat Stroke Relief: लू लगने पर सबसे पहले क्या करें? जानिए स्टेप बाय स्टेप राहत पाने के आसान टिप्स
Heat Stroke Relief: गर्मी का मौसम आते ही तेज धूप और बढ़ता तापमान लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगता है। खासकर दोपहर के समय लंबे वक्त तक धूप में रहने से लू लगने का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। कई बार लोग इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है।
लू लगने पर शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाता है और व्यक्ति को चक्कर, उल्टी, तेज बुखार, सिरदर्द और कमजोरी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में सही समय पर सही कदम उठाना बेहद जरूरी होता है। आइए जानते हैं लू लगने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए और राहत पाने के आसान स्टेप्स कौन-से हैं।
लू लगने के शुरुआती लक्षण पहचानें
लू लगने पर शरीर कई संकेत देता है। तेज प्यास लगना, अत्यधिक पसीना आना, सिर भारी लगना, चक्कर आना और कमजोरी महसूस होना इसके शुरुआती लक्षण माने जाते हैं।
अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो शरीर का तापमान बहुत बढ़ सकता है और व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है। इसलिए लक्षण दिखते ही तुरंत राहत देने वाले उपाय शुरू करना जरूरी है।
स्टेप 1: तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं
अगर किसी व्यक्ति को लू लग गई है तो सबसे पहले उसे धूप से हटाकर ठंडी और हवादार जगह पर बैठाएं या लिटाएं। इससे शरीर का तापमान धीरे-धीरे कम होने लगता है।
कपड़े ज्यादा टाइट हों तो उन्हें ढीला कर दें ताकि शरीर को आराम मिल सके।
स्टेप 2: शरीर को ठंडा करें
लू लगने पर शरीर को ठंडा करना सबसे जरूरी माना जाता है। इसके लिए माथे, गर्दन और हाथ-पैरों पर ठंडे पानी की पट्टी रखें।
अगर संभव हो तो पंखे या कूलर की हवा में बैठाएं। बहुत ज्यादा ठंडा बर्फ वाला पानी सीधे शरीर पर डालने से बचना चाहिए।
स्टेप 3: शरीर में पानी की कमी पूरी करें
लू लगने पर शरीर में डिहाइड्रेशन तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में व्यक्ति को थोड़ा-थोड़ा करके पानी पिलाएं। ORS, नींबू पानी, छाछ या नारियल पानी देना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
अगर व्यक्ति बेहोश हो या पानी पीने की स्थिति में न हो तो तुरंत डॉक्टर की मदद लें।
स्टेप 4: आराम करने दें
लू लगने के बाद शरीर काफी कमजोर महसूस करता है। ऐसे में व्यक्ति को आराम करना चाहिए और कुछ घंटों तक धूप में जाने से बचना चाहिए। हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना बेहतर माना जाता है।
लू से बचने के लिए क्या करें
दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तेज धूप में निकलने से बचें। बाहर जाते समय सिर को कपड़े या टोपी से ढकें। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं और गर्मियों में मौसमी फल, छाछ और नारियल पानी को डाइट में शामिल करें।
कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं
अगर तेज बुखार, बेहोशी, सांस लेने में दिक्कत या लगातार उल्टी जैसी समस्या हो रही हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यह गंभीर हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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Sunscreen SPF: सनस्क्रीन में SPF का मतलब जानते हैं? जानिए आपकी स्किन के लिए क्या रहेगा बेहतर
Sunscreen SPF: गर्मी के मौसम में तेज धूप सिर्फ टैनिंग ही नहीं करती, बल्कि स्किन को अंदर तक नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में ज्यादातर लोग सनस्क्रीन का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन अक्सर SPF नंबर देखकर कंफ्यूज हो जाते हैं। कोई SPF 30 चुनता है तो कोई SPF 50, लेकिन क्या ज्यादा SPF हमेशा ज्यादा सुरक्षा देता है?
दरअसल, सनस्क्रीन में लिखा SPF आपकी त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने की क्षमता को दर्शाता है। सही SPF चुनना आपकी स्किन टाइप, धूप में बिताए समय और मौसम पर निर्भर करता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि SPF क्या होता है और कौन-सा सनस्क्रीन आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है।
SPF का क्या मतलब होता है?
SPF का फुल फॉर्म “सन प्रोटेक्शन फैक्टर” होता है। यह बताता है कि सनस्क्रीन आपकी स्किन को UVB किरणों से कितनी सुरक्षा दे सकता है। UVB किरणें सनबर्न और स्किन डैमेज की बड़ी वजह मानी जाती हैं।
उदाहरण के तौर पर अगर आपकी त्वचा बिना सनस्क्रीन के 10 मिनट में जलने लगती है और आप SPF 30 सनस्क्रीन लगाते हैं, तो यह सुरक्षा का समय लगभग 30 गुना तक बढ़ा सकता है। हालांकि यह पूरी तरह मौसम, पसीना और स्किन टाइप पर भी निर्भर करता है।
SPF 15, 30 और 50 में क्या फर्क है?
SPF 15 लगभग 93 प्रतिशत UVB किरणों से बचाव देता है। वहीं SPF 30 करीब 97 प्रतिशत और SPF 50 लगभग 98 प्रतिशत तक सुरक्षा देने में मदद करता है।
एक बात समझना जरूरी है कि SPF 100 लगाने का मतलब 100 प्रतिशत सुरक्षा नहीं होता। इसलिए एक्सपर्ट आमतौर पर SPF 30 या SPF 50 को रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए बेहतर मानते हैं।
किसे कौन-सा SPF चुनना चाहिए?
अगर आप घर के अंदर ज्यादा रहते हैं या हल्की धूप में बाहर निकलते हैं तो SPF 30 काफी माना जाता है। वहीं लंबे समय तक धूप में रहने वाले लोगों, ट्रैवलिंग करने वालों या बीच और पहाड़ी इलाकों में घूमने वालों के लिए SPF 50 ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को 'ब्रॉड स्पेक्ट्रम' सनस्क्रीन चुनना चाहिए, जो UVA और UVB दोनों किरणों से सुरक्षा देता हो।
सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका
सनस्क्रीन को घर से बाहर निकलने से लगभग 15 से 20 मिनट पहले लगाना चाहिए। सिर्फ चेहरे ही नहीं, बल्कि गर्दन, हाथ और कानों पर भी इसे लगाना जरूरी है।
अगर ज्यादा पसीना आ रहा हो या आप लंबे समय तक बाहर हों तो हर 2 से 3 घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाएं। कम मात्रा में लगाने से SPF का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।
क्या सिर्फ गर्मियों में लगाना जरूरी है?
कई लोग सोचते हैं कि सनस्क्रीन सिर्फ गर्मियों में जरूरी होता है, लेकिन सूरज की UV किरणें हर मौसम में त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए सर्दी और बारिश में भी सनस्क्रीन लगाना फायदेमंद माना जाता है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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