विनेश फोगाट पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, WFI की खिंचाई कर जांच का दिया आदेश
Vinesh Phogat : भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट एक बार फिर से चर्चाओं में आ गई हैं. उन्हें एक बड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) की मशहूर पहलवान विनेश फोगट को घरेलू इवेंट्स में हिस्सा लेने के लिए "अयोग्य" घोषित करने के फैसले के लिए खिंचाई की और केंद्र से उनका मूल्यांकन करने के लिए एक एक्सपर्ट पैनल बनाने को कहा है.
विनेश फोगाट पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा कि जाने-माने एथलीटों को हिस्सा लेने की इजाजत देने के पहले के तरीके से WFI का हटना "बहुत कुछ कहता है" और केंद्र से यह पक्का करने को कहा कि फोगाट, जो मैटरनिटी ब्रेक से वापस आना चाहती हैं, उन्हें आने वाले एशियन गेम्स के सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाजत मिले.
STORY | HC pulls up WFI over decision to declare Vinesh Phogat ineligible
— Press Trust of India (@PTI_News) May 22, 2026
The Delhi High Court on Friday pulled up the Wrestling Federation of India (WFI) for its decision to declare celebrated grappler Vinesh Phogat "ineligible" from participation in domestic events and asked… pic.twitter.com/Oh2HJTXT94
बता दें कि, बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि देश में मां बनने का जश्न मनाया जाता है और फेडरेशन को "बदले की भावना" से काम नहीं करना चाहिए. सरकारी वकील के यह कहने के बाद कि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया का दिया गया फ्रेमवर्क कुछ मामलों में एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया में ढील देता है, कोर्ट ने केंद्र से फोगट का मूल्यांकन करने के लिए एक एक्सपर्ट पैनल बनाने को कहा है.
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भारत के इंडस्ट्रियल एनर्जी ट्रांजिशन में 100 अरब डॉलर के अवसर: रिपोर्ट
Industrial Energy Transition: भारत के इंडस्ट्रियल एनर्जी ट्रांजिशन से 2030 तक 100 अरब डॉलर के कार्बन उत्सर्जन कमी के अवसर खुल सकते हैं. यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में दी गई. टीडीके वेंचर्स और थेइया वेंचर्स की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में अभी भी पूंजी की भारी कमी है - वर्तमान फंडिंग अधिक विकसित अर्थव्यवस्थाओं में देखे गए स्तरों के आधे (40 प्रतिशत) से भी कम है.
क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट में इंडस्ट्रियल डीकार्बोनाइजेशन को न केवल जलवायु लक्ष्य के रूप में, बल्कि एक रणनीतिक सुरक्षा कवच के रूप में भी बताया गया. वर्तमान में, भारत को प्रतिवर्ष 140 अरब डॉलर के ऊर्जा आयात बिल का सामना करना पड़ता है, जिससे देश भू-राजनीतिक झटकों जैसे मध्य पूर्व संकट के प्रति संवेदनशील हो जाता है.
इन तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडस्ट्रियल एनर्जी ट्रांजिशन एक ऐसी "मजबूत अर्थव्यवस्था" के निर्माण का मार्ग है जो देश को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों से बचाएगी. इसमें तकनीक और निवेश के लिहाज से सबसे अधिक प्रभाव डालने वाले तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया, जिसमें दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण, औद्योगिक आईओटी और डिजिटल ट्विन्स, और ऊर्जा दक्षता शामिल हैं.
हम पीढ़ीगत निवेश अवसर देखते हैं- रवि जैन
टीडीके वेंचर्स के निवेश निदेशक रवि जैन ने कहा, "भारत की कार्बन उत्सर्जन कम करने की यात्रा केवल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है. यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि उद्योग में ऊर्जा का उपयोग कितनी कुशलता से किया जाता है. हम ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करने, बड़े पैमाने पर औद्योगिक बुद्धिमत्ता को लागू करने और दक्षता प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने में एक पीढ़ीगत निवेश अवसर देखते हैं."
विशाल है ये अवसर
जैन ने आगे कहा, "यह अवसर विशाल है, इसमें पूंजी की कमी है और यह तेजी से विकसित हो रहा है. हम इसका नेतृत्व करने वाले उद्यमियों के दीर्घकालिक भागीदार बनने के लिए प्रतिबद्ध हैं."
प्रिया शाह की भी आई प्रतिक्रिया
थेया वेंचर्स की संस्थापक और जनरल पार्टनर प्रिया शाह ने कहा, "यह रिपोर्ट अनावश्यक बातों को दरकिनार करते हुए उद्यमियों और पूंजी आवंटनकर्ताओं को यह व्यावहारिक और ठोस दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए बनाई गई है कि सबसे अधिक प्रभाव डालने वाले अवसर कहां हैं और उन्हें बड़े पैमाने पर साकार करने के लिए क्या आवश्यक होगा."
रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्यमियों और पूंजी आवंटनकर्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल नियामक अनुपालन की औपचारिकता पूरी करने के बजाय लागत दक्षता ही अगले दशक में इस परिवर्तन को गति प्रदान करेगी, क्योंकि उद्योग स्थानीयकृत, सस्ते पदार्थों के साथ आगे बढ़ेंगे.
स्रोत- आईएनएस
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