जून से महंगी होंगी मारुति सुजुकी की कारें; कीमतों में होगी 30,000 रुपए तक की बढ़ोतरी
नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने गुरुवार को घोषणा की है कि वह जून 2026 से अपनी गाड़ियों की कीमतों में 30,000 रुपए तक की बढ़ोतरी करेगी।
कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि उसने अपने सभी मॉडलों की कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।
नियामकीय फाइलिंग में कंपनी ने कहा, इनपुट लागत में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए कंपनी ने जून 2026 से अपने सभी मॉडलों की कीमतों में 30,000 रुपए तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।
आधिकारिक बयान में कंपनी ने कहा कि ऑटोमोबाइल उद्योग पर कच्चे माल और परिचालन लागत में लगातार वृद्धि का असर पड़ रहा है, जिसके कारण यह फैसला लिया गया है।
कंपनी ने आगे कहा, पिछले कुछ महीनों से कंपनी लागत कम करने के कई उपायों के जरिए लागत बढ़ोतरी के असर को कम करने की लगातार कोशिश कर रही थी।
मारुति सुजुकी इंडिया ने बताया कि उसने पिछले कुछ महीनों में लागत कम करने के कई कदम उठाए, ताकि बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन किया जा सके, लेकिन लगातार बढ़ते खर्चों के कारण कीमतों में आंशिक बढ़ोतरी करना जरूरी हो गया।
कंपनी ने कहा कि ग्राहकों पर इसका असर कम से कम पड़े, इसके लिए हर संभव कोशिश की गई है।
कंपनी ने फाइलिंग में कहा, हालांकि, अब महंगाई का दबाव काफी बढ़ गया है और प्रतिकूल लागत का माहौल बना हुआ है। ऐसे में कंपनी को बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा बाजार पर डालना पड़ रहा है, जबकि ग्राहकों पर असर न्यूनतम रखने की कोशिश जारी रहेगी।
कंपनी ने यह भी कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडलों के हिसाब से अलग होगी।
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत में कई ऑटोमोबाइल कंपनियां कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, लॉजिस्टिक्स खर्च और सप्लाई चेन में बढ़ते महंगाई दबाव के कारण अपने वाहनों की कीमतें बढ़ा चुकी हैं।
इससे पहले महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी 6 अप्रैल से अपने एसयूवी और कमर्शियल व्हीकल पोर्टफोलियो की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की थी।
कंपनी ने कहा था कि इनपुट और परिचालन लागत बढ़ने के कारण वाहनों की कीमतों में 2.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जाएगी, जबकि औसतन कीमतें करीब 1.6 प्रतिशत बढ़ेंगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
केरल केंद्र के सहयोग से 40 करोड़ रुपए की लागत से दो एआई केंद्र स्थापित करेगा
तिरुवनंतपुरम, 21 मई (आईएएनएस)। केरल ने गुरुवार को खुद को एक राष्ट्रीय एआई हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाले इंडिया एआई मिशन के साथ साझेदारी में दो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (एआई-सीओई) स्थापित करने की घोषणा की।
ये दो प्रोजेक्ट कोच्चि में एक बायो-एआई सेंटर और तिरुवनंतपुरम में एक एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मिलकर करीब 40 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित करेंगे। उम्मीद है कि ये प्रोजेक्ट केरल में तकनीक आधारित विकास के अगले चरण को आगे बढ़ाएंगे, जिसमें शोध, स्टार्टअप को बढ़ावा और व्यावसायिक नवाचार पर खास ध्यान दिया जाएगा।
कोच्चि स्थित डिजिटल हब में केरल स्टार्टअप मिशन द्वारा स्थापित किया जाने वाला ‘बायो-एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का उद्देश्य केरल की जैव विविधता, आयुर्वेदिक परंपरा और जीनोमिक्स क्षमताओं को उन्नत एआई तकनीक के साथ जोड़ना है।
कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के ‘तेजस्वी’ सुपरकंप्यूटर द्वारा संचालित और केरल जीनोम डेटा सेंटर के सहयोग से, इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य चार वर्षों में 48 डीप टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना और लगभग 600 प्रत्यक्ष उच्च-मूल्य वाली नौकरियां पैदा करना है।
केंद्र एआई-आधारित दवा खोज, सटीक आयुर्वेद, जीनोमिक्स और केरल के मसाला क्षेत्र के लिए कृषि-तकनीक नवाचार जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के तहत विकसित एआई-आधारित टूल्स से 40,000 से अधिक मसाला किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य पूर्वानुमान विश्लेषण, कीट प्रबंधन और प्रीमियम गुणवत्ता प्रमाणीकरण प्रणालियों के जरिए उनकी आय में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करना है।
20 करोड़ रुपये की यह परियोजना 40:40:20 के वित्त पोषण मॉडल पर आधारित है, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एक उद्योग संघ शामिल हैं।
दूसरा एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तिरुवनंतपुरम में डिजिटल यूनिवर्सिटी केरल के तहत स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए 10,000 वर्ग फुट की एक विशेष सुविधा बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य एआई अनुसंधान और बाजार में उपयोग होने वाले अनुप्रयोगों के बीच की दूरी को कम करना है।
केंद्र स्टार्टअप्स को व्यावसायीकरण, कौशल विकास और उद्योग सहयोग में सहायता देगा, साथ ही केरल की सामाजिक-आर्थिक जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए एआई समाधानों पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
इस पहल की शुरुआत करते हुए, केरल के आईटी और उद्योग मंत्री पी.के. कुन्हालीकुट्टी ने कहा कि ये परियोजनाएं राज्य के लिए एक ऐतिहासिक क्षण हैं।
उन्होंने कहा, “केरल न केवल भारत के एआई मिशन में हिस्सा ले रहा है, बल्कि हम इसे आकार देने में भी मदद कर रहे हैं।”
--आईएएनएस
एसएचके/एबीएम
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