घर में बचा सूखा नारियल फेंकने की बजाय बनाएं हलवाई जैसी बर्फी, दूध और मलाई से मिलेगी मिठास, जानिए आसान रेसिपी
Dry Coconut Barfi Recipe: पूजा या त्योहार के बाद बचे सूखे नारियल से घर पर स्वादिष्ट बर्फी तैयार की जा सकती है. नारियल को बारीक पीसने से बर्फी का टेक्सचर ज्यादा मुलायम और अच्छा बनता है. दूध, मलाई या मिल्क पाउडर मिलाने से बर्फी को रिच और क्रीमी स्वाद मिलता है. नारियल को धीमी आंच पर भूनते समय उसका रंग बदलने से बचाना जरूरी है. बादाम और पिस्ता से सजाकर इसे त्योहार या मेहमानों के लिए सर्व किया जा सकता है. मिल्क पाउडर न हो तो कंडेंस्ड मिल्क का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, लेकिन ऐसे में चीनी की मात्रा कम रखें.
Justice Yashwant Varma Cash Case: पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड में बड़ा खुलासा! लोकसभा अध्यक्ष की जांच समिति ने तीनों आरोपों में पाया दोषी
दिल्ली के 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास के स्टोररूम में लगी आग के बाद बरामद हुई भारी नकदी के मामले में जांच समिति ने गंभीर टिप्पणियां की हैं। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि स्टोररूम में ₹500 मूल्यवर्ग के करेंसी नोटों की बड़ी खेप मौजूद थी। समिति के अनुसार, पूर्व जज यह संतोषजनक ढंग से स्पष्ट करने में पूरी तरह विफल रहे कि यह पैसा किसका था, वहां कैसे पहुंचा और इसका वास्तविक स्रोत क्या था।
सीलिंग से पहले बदल गई स्थिति, कहां गायब हुए नोटों के साक्ष्य?
रिपोर्ट में साक्ष्यों के संरक्षण और रख-रखाव को लेकर सबसे गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। जांच समिति ने पाया कि घटना के बाद स्टोररूम में मौजूद भौतिक साक्ष्यों को कानूनी तरीके से सील और संरक्षित नहीं किया गया था। आधिकारिक निरीक्षण से पहले ही स्टोररूम की स्थिति बदल दी गई और बाद में वहां से बरामद नकदी के नोट ही गायब हो गए। समिति ने साक्ष्यों के इस तरह गायब होने पर गहरी चिंता जताते हुए इसे संस्थागत जवाबदेही में बड़ी लापरवाही माना है।
'जस्टिस वर्मा का जवाब टालमटोल वाला था', साजिश के सबूत नहीं मिले
जस्टिस वर्मा ने मामले की शुरुआत में दावा किया था कि नकदी से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें फंसाने के लिए कोई साजिश रची गई हो सकती है। हालांकि, समिति ने साजिश के दावों को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 22 मार्च 2025 को दिए गए जवाब और उसके बाद जस्टिस वर्मा के रुख में पारदर्शिता की कमी थी। जब स्वतंत्र गवाहों और अन्य पुष्टिकारक सामग्रियों के साथ उनके बयानों का मिलान किया गया, तो उनका जवाब असंतोषजनक और टालमटोल वाला पाया गया।
मई 2026 में सौंपी गई थी रिपोर्ट, 9 अप्रैल को दे चुके हैं इस्तीफा
उल्लेखनीय है कि 12 अगस्त 2025 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर और वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य शामिल थे। समिति ने मई 2026 में अपनी गोपनीय रिपोर्ट सौंपी थी। हालांकि, कार्रवाई से पहले ही जस्टिस यशवंत वर्मा ने 9 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।
मानसून सत्र में संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखी जाएगी रिपोर्ट
जस्टिस वर्मा के पद से इस्तीफा देने के बावजूद मामले की संस्थागत गंभीरता को देखते हुए संसदीय प्रक्रिया रोकी नहीं गई। लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि जांच समिति की यह विस्तृत रिपोर्ट संसद के मानसून सत्र में दोनों सदनों के समक्ष पेश की जाएगी। इस खुलासे के बाद न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और उच्च पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18
Haribhoomi








