डिजिलॉकर के 72.43 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर्स, उमंग प्लेटफॉर्म पर 11.66 करोड़ उपयोगकर्ता; डिजिटल सेवाओं का तेजी से बढ़ा दायरा
नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की प्रमुख डिजिटल पहल डिजिलॉकर और उमंग (यूएमएएनजी) प्लेटफॉर्म का दायरा लगातार बढ़ रहा है। संसद में बुधवार को दी गई जानकारी के अनुसार, डिजिलॉकर पर अब 72.43 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं, जबकि पिछले तीन वर्षों में इस प्लेटफॉर्म पर 72.86 करोड़ दस्तावेज एक्सेस लेनदेन (डॉक्यूमेंट एक्सेस ट्रांजैक्शन्स) दर्ज किए गए हैं।
राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि उमंग प्लेटफॉर्म पर भी उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म पर 11.66 करोड़ से अधिक पंजीकृत यूजर्स हैं और पिछले तीन वर्षों के दौरान लगभग 798 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नागरिकों को तकनीक के माध्यम से सशक्त बनाने और डिजिटल सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के विजन के अनुरूप जुलाई 2015 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया गया था, जिसके तहत सरकार ने डिजिटल पहुंच बढ़ाने और नागरिकों को निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 31 जुलाई 2026 तक देश भर में 2,575 सरकारी सेवाएं उमंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। इनमें 880 सेवाएं केंद्र सरकार और 1,695 सेवाएं राज्य सरकारों से संबंधित हैं। वहीं डिजिलॉकर प्लेटफॉर्म पर 5,437 प्रकार के दस्तावेज और सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 661 केंद्र सरकार तथा 4,776 राज्य सरकारों से जुड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार किया है। ये केंद्र नागरिकों को सरकारी सेवाओं के अलावा बैंकिंग, वित्तीय, बीमा, पेंशन और बिल भुगतान जैसी सुविधाएं प्रदान करते हैं।
मंत्री के अनुसार, 30 जून 2026 तक देश की ग्राम पंचायत स्तर पर 4,07,122 कॉमन सर्विस सेंटर संचालित हो रहे थे। इनमें से 70,069 सीएससी महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जो महिला सशक्तिकरण और डिजिटल समावेशन का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
उन्होंने बताया कि उमंग और डिजिलॉकर दोनों प्लेटफॉर्म मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध हैं, जिससे नागरिक कभी भी और कहीं से भी सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स को आधार, ई-साइन, एपीआई सेतु और अन्य प्रमुख डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा गया है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षित प्रमाणीकरण, डिजिटल दस्तावेज सत्यापन और सहमति-आधारित साझाकरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने और कागजी प्रक्रियाओं से गुजरने की आवश्यकता कम हुई है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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यूपी के कारीगरों के लिए बड़ी मदद, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना में मुफ्त ट्रेनिंग से लेकर 10 लाख तक लोन
उत्तर प्रदेश सरकार पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना (VSSY) चला रही है. इसका उद्देश्य पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और बेहतर संसाधनों से जोड़ना है, ताकि कारीगर अपनी कमाई बढ़ाने के साथ स्वरोजगार को भी विस्तार दे सकें. योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को प्रशिक्षण, टूलकिट और कारोबार के लिए रियायती ऋण जैसी सुविधाएं मिलती हैं.
किन कारीगरों को मिल सकता है लाभ?
यह योजना पारंपरिक शिल्प और व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए है. इसके दायरे में बढ़ई, दर्जी, नाई, कुम्हार, लोहार, मोची, राजमिस्त्री, बांस-बेंत कारीगर, धोबी, सुनार और हलवाई जैसे पेशे शामिल हैं.
सरकार का मकसद इन कामों से जुड़े लोगों को आधुनिक उपकरण और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता और काम करने की क्षमता में सुधार कर सकें.
6 दिन की मुफ्त ट्रेनिंग
योजना का एक प्रमुख लाभ पात्र कारीगरों के लिए 6 दिन का निःशुल्क प्रशिक्षण है. यह प्रशिक्षण जिला मुख्यालय पर उद्योग विभाग के माध्यम से कराया जाता है.
प्रशिक्षण के दौरान कारीगरों को उनके पारंपरिक काम में आधुनिक तकनीक, बेहतर कार्यप्रणाली और जरूरी कौशल की जानकारी दी जाती है. प्रशिक्षण के दौरान रहने और खाने का खर्च भी सरकार की ओर से वहन किया जाता है.
ट्रेनिंग के बाद आधुनिक टूलकिट
प्रशिक्षण पूरा करने वाले पात्र कारीगरों को उनके ट्रेड के अनुसार आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जाती है. इसकी कीमत करीब 10 हजार रुपये बताई गई है.
आधुनिक उपकरण मिलने से कारीगरों को काम तेजी से करने और उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिल सकती है. इससे पारंपरिक कारोबार को नए बाजारों तक पहुंचाने का रास्ता भी आसान हो सकता है.
कारोबार बढ़ाने के लिए 10 लाख तक का लोन
योजना के तहत कारीगरों को अपना कारोबार शुरू करने या मौजूदा व्यवसाय का विस्तार करने के लिए 10 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक के रियायती ऋण की सुविधा मिल सकती है. यह ऋण उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है.
इसका उद्देश्य कारीगरों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें अपने हुनर के जरिए स्थायी रोजगार का अवसर देना है.
कौन कर सकता है आवेदन?
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना जरूरी है. इसके अलावा आवेदक का किसी पात्र पारंपरिक शिल्प या पेशे से जुड़ा होना आवश्यक है.
पिछले दो वर्षों में किसी अन्य केंद्र या राज्य सरकार की योजना के तहत टूलकिट सहायता लेने वाले आवेदक पात्र नहीं होंगे. एक परिवार से केवल एक व्यक्ति को लाभ देने का प्रावधान है. पात्रता से संबंधित निर्धारित हलफनामा भी देना पड़ सकता है.
PM विश्वकर्मा से अलग है यह योजना
VSSY को केंद्र सरकार की PM विश्वकर्मा योजना से अलग समझना जरूरी है. PM विश्वकर्मा सितंबर 2023 में शुरू हुई केंद्रीय योजना है, जिसमें 18 पारंपरिक ट्रेड शामिल हैं.
दोनों योजनाओं के लाभ और पात्रता अलग-अलग हैं. इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित योजना की मौजूदा शर्तों की जांच करना जरूरी है.
ऑनलाइन कैसे करें आवेदन?
इच्छुक कारीगर उत्तर प्रदेश सरकार के MSME विभाग के पोर्टल diupmsme.upsdc.gov.in के जरिए आवेदन कर सकते हैं.
आवेदन से पहले आधार कार्ड, फोटो, पैन कार्ड और संबंधित ट्रेड का प्रमाण जैसे जरूरी दस्तावेज तैयार रखना उपयोगी होगा. साथ ही पोर्टल पर उपलब्ध वर्तमान पात्रता, दस्तावेज और आवेदन संबंधी निर्देश जरूर जांच लें.
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