दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को मेटा से कहा कि वह उन मानदंडों के बारे में बताए जिनके आधार पर यूज़र्स को उसके कॉपीराइट मैनेजमेंट टूल का एक्सेस दिया जाता है। यह टूल लोगों को Facebook और Instagram पर अपने ओरिजिनल कंटेंट को सुरक्षित रखने और उसे मैनेज करने की सुविधा देता है। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की बेंच कंटेंट क्रिएटर मोहित कुमार की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कुमार ने शिकायत की थी कि कुछ लोगों ने उनका कंटेंट डाउनलोड किया और 'मेटा राइट्स टूल' का इस्तेमाल करके उनके वीडियो पर कॉपीराइट का दावा किया। कुमार ने कहा कि वह वीडियो पर कॉपीराइट का दावा नहीं कर सकते थे क्योंकि मेटा ने उन्हें उस टूल का एक्सेस नहीं दिया था।
जस्टिस भंभानी ने टिप्पणी की, तो फिर हर किसी के पास इसका एक्सेस क्यों नहीं है? यह तो घर के मालिक के बजाय चोर को चाबी देने जैसा है। कोर्ट ने यह टिप्पणी कुमार द्वारा दायर एक मामले में की। कुमार एक भारतीय ई-कॉमर्स और AI बिज़नेस कोच हैं, जो सोशल मीडिया पर Rise with Mohit हैंडल के तहत एजुकेशनल कंटेंट बनाते हैं। कुमार ने कहा कि उन्होंने इस टूल का एक्सेस पाने के लिए तीन बार आवेदन किया, लेकिन बिना किसी साफ़ वजह के उनके आवेदन खारिज कर दिए गए, जबकि कुछ सौ फ़ॉलोअर्स वाले लोगों को इसका एक्सेस मिल गया। उन्होंने आगे कहा कि फ़र्ज़ी कॉपीराइट स्ट्राइक की वजह से किसी असली क्रिएटर का अकाउंट रातों-रात बंद हो सकता है, जिससे बरसों की मेहनत, कमाई, ब्रांड कोलैबोरेशन और बिज़नेस के मौके खत्म हो सकते हैं। मेटा के वकील ने बताया कि कुमार के ख़िलाफ़ लगाई गई फ़र्ज़ी स्ट्राइक को हटा दिया गया है और उन स्ट्राइक की वजह से हटाया गया कंटेंट वापस बहाल कर दिया गया है।
हालांकि, कोर्ट ने कुमार के मुक़दमे में समन जारी किया और मामले की सुनवाई के लिए 24 सितंबर की तारीख तय की। कोर्ट ने कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स से जुड़े कई मामलों में यह समस्या सामने आई है, इसलिए इस मामले की बारीकी से जांच की ज़रूरत है। कोर्ट ने कहा इसमें कुछ कमियां हैं, कुछ खामियां देखी गई हैं। बेहतर होगा कि हम इन्हें ठीक कर लें।
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बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष पर जान-बूझकर संसद में बाधा डालने और अहम मुद्दों पर बहस रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जनता देख रही है कि बुधवार को कौन चर्चा से भाग रहा है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, नबिन ने लगातार हो रहे व्यवधानों को विपक्ष की अराजक मानसिकता का नतीजा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से अहम मुद्दों को उठाने की बार-बार कोशिशों के बावजूद, विपक्षी दलों ने कार्यवाही में बाधा डालना ही बेहतर समझा।
नबिन ने कहा कि संसद में विपक्ष की लगातार बाधा उनकी अराजक मानसिकता को उजागर करती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सभी अहम मुद्दों पर चर्चा करने को तैयार थी, लेकिन विपक्ष संसद को काम नहीं करने दे रहा था। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और अब जानती है कि असल में कौन चर्चा से भाग रहा है। नबिन की ये टिप्पणियां संसद में चल रहे राजनीतिक टकराव के बीच आईं, जिसमें सरकार और विपक्ष दोनों ही सत्रों के दौरान कामकाज में बाधा डालने और व्यवहार को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
इससे पहले, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सरकार विपक्ष के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में शाह ने कहा कि सरकार हर तरह की संसदीय बहस के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे बातचीत में शामिल होने के बजाय विरोध-प्रदर्शन का इस्तेमाल करके अव्यवस्था फैला रहे हैं। शाह ने विपक्ष से लोकसभा स्पीकर को चर्चा के लिए पत्र सौंपने को कहा और बताया कि सरकार बुधवार दोपहर 3 बजे से गुरुवार दोपहर 3 बजे तक इस मामले पर चर्चा करने के लिए तैयार है।
यह घटनाक्रम संसद में बार-बार हुए हंगामे के बाद हुआ है, जिसके कारण अक्सर सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और विधायी कामकाज कम हो गया। सरकार ने विपक्षी दलों से संसदीय प्रक्रियाओं के ज़रिए अपनी चिंताएँ उठाने का आग्रह किया है, जबकि विपक्ष के सदस्यों ने हंगामे और विरोध-प्रदर्शनों का बचाव करते हुए कहा है कि जिन मुद्दों को वे महत्वपूर्ण मानते हैं, उन पर चर्चा के लिए ये ज़रूरी हैं।
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