टॉप-10-कंपनियों में से 9 की वैल्यू ₹3.12 लाख करोड़ घटी:रिलायंस टॉप लूजर रही, वैल्यू ₹1.34 लाख करोड़ घटी; SBI-TCS का मार्केट कैप भी घटा
मार्केट कैप के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 9 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 3.12 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट वैल्यू सबसे ज्यादा घटी है। रिलायंस की मार्केट वैल्यू ₹1.34 लाख करोड़ घटकर ₹18.08 लाख करोड़ पर आ गई। वहीं SBI की की मार्केट वैल्यू ₹52,245 करोड़ घटकर ₹8.89 लाख करोड़ पर आ गई। इसके अलावा TCS, बजाज फाइनेंस, HDFC बैंक, ICICI बैंक, लार्सन एंड टुब्रो, HUL और LIC की मार्केट वैल्यू भी घटी है। वहीं बीते हफ्ते सिर्फ भारतीय एयरटेल की मार्केट वैल्यू बढ़ी है। बीते हफ्ते सेंसेक्स 2,090 अंक गिरा था पिछले हफ्ते सेंसेक्स 2,090 (2.7%) अंक और निफ्टी 532 (2.2%) अंक गिरा था। वहीं बीते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को सेंसेक्स 516 अंक की गिरावट के साथ 77,328 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 150 अंकों की गिरावट रही, ये 24,176 पर आ गया। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें... मान लीजिए... कंपनी 'A' के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं... मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।
इस हफ्ते शेयर बाजार में काफी हलचल की उम्मीद:अमेरिका-ईरान तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे 5 फैक्टर तय करेंगे चाल
कल 18 मई से शुरू होने वाले हफ्ते में शेयर बाजार में काफी हलचल रहने वाली है। अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से लेकर टेक्निकल फैक्टर बाजार की दिशा तय करेंगे। चलिए समझते हैं अगले हफ्ते बाजार में क्या हो सकता है… सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 23,466 | 23,345 | 23,320 | 22,858 | 22,780 | 22,558 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 23,812 | 23,872 | 23,935 | 24,140 | 24,382 | 24,450 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। अब 5 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं… 1. अमेरिका-ईरान युद्ध और शांति वार्ता अमेरिका-ईरान युद्ध को शुरू हुए लगभग तीन महीने होने वाले हैं। ईरान ने घोषणा की है कि वह जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए समुद्री ट्रैफिक को मैनेज करने का प्रस्ताव पेश करेगा। इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान शांति समझौते पर आगे बढ़ने से इनकार करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। 2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के विदेश मंत्री के बयानों के बाद शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा की तेजी आई। इन बयानों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास जहाजों पर हमलों को रोकने के समझौते की उम्मीदें कमजोर हुई हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.35% बढ़कर 109.26 प्रति बैरल पर बंद हुआ। 3. चौथी तिमाही के नतीजों का छठा हफ्ता 500 से ज्यादा कंपनियां 31 मार्च, 2026 को समाप्त तिमाही के अपने वित्तीय नतीजे जारी करेंगी। प्रमुख दिग्गज कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL), लेंसकार्ट सॉल्यूशंस, LIC और एफएसएन ई-कॉमर्स वेंचर्स (नायका) शामिल हैं। 4. FII की लगातार बिकवाली विदेशी निवेशकों ने इस महीने की 16 तारीख तक ₹27,177 करोड़ के शेयर बेचे हैं। इसके साथ ही साल 2026 में अब तक उनकी कुल बिकवाली ₹2,31,486 रुपए करोड़ तक पहुंच गई है। 5. टेक्निकल फैक्टर्स सेंसेक्स एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि सेंसेक्स अभी 75,200 से 75,300 के जोन के आसपास है। यह दिखाता है कि लगातार बनी वैश्विक अनिश्चितता और बाजार के उतार-चढ़ाव वाले माहौल के बीच बाजार धीरे-धीरे और संभलकर रिकवरी करने की कोशिश कर रहा है। बाजार के लिए तुरंत का रेजिस्टेंस 75,600 से 76,000 के दायरे में है, जबकि मजबूत सपोर्ट 74,500 से 74,200 के जोन के आसपास दिख रहा है। बाजार अब किसी भी तरफ एक बड़ा ब्रेकआउट (दायरा तोड़ना) देगा, तभी आगे के लिए बाजार की असली चाल तय होगी। निफ्टी 50 निफ्टी 50 के आउटलुक पर चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने कहा कि अगर बाजार ऊपर की तरफ जाता है, तो इसके लिए इमिडिएट रेजिस्टेंस 24,000 और 24,250 पर रहेगा। वहीं अगर बाजार गिरता है, तो इसे 23,250 पर सपोर्ट मिल सकता है। अगर निफ्टी 23,000 का स्तर तोड़ता है, तो बिकवाली का दबाव और ज्यादा बढ़ सकता है। बाजार के मौजूदा हालातों को देखते हुए ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे अनुशासन में रहें और इस उतार-चढ़ाव के बीच सख्त स्टॉप-लॉस स्ट्रैटेजी (नुकसान से बचने का नियम) का पालन करें। शुक्रवार को सेंसेक्स 160 अंक गिरकर बंद हुआ था
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